किशनगंज में पोक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में अनन्य विशेष न्यायाधीश दीप चंद पाण्डेय की अदालत ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी अनारुल उर्फ अमेरुल उर्फ छोटन को नाबालिग के अपहरण और छेड़खानी का दोषी मानते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। यह मामला पोठिया थाना क्षेत्र से संबंधित है, जिसका थाना कांड संख्या 92/24 और पोक्सो वाद संख्या 33/24 है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी पर नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ छेड़खानी करने का आरोप था। छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। अनुसंधान पूरा होने पर आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद मामले की सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान, विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने पीड़िता के बयान और जांच से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत पक्ष रखा। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। पांच साल के सश्रम कारावास के साथ, अदालत ने 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह राशि पीड़िता को दी जाएगी। यदि आरोपी अर्थदंड जमा नहीं करता है, तो उसे छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मुआवजा राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया
इसके अतिरिक्त, अदालत ने सरकार को भी पीड़िता को 50 हजार रुपये की मुआवजा राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़िता को न्याय दिलाना और उसे सहायता प्रदान करना न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। फैसला आने के बाद न्यायालय परिसर में इस पर चर्चा हुई। विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने कहा कि पोक्सो मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को सजा मिलना समाज में सकारात्मक संदेश देता है। उन्होंने मामले के समय पर निष्पादन के लिए अदालत के प्रयासों की भी सराहना की। इस फैसले को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से यह संदेश गया है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के प्रति कानून सख्त है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। किशनगंज में पोक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में अनन्य विशेष न्यायाधीश दीप चंद पाण्डेय की अदालत ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी अनारुल उर्फ अमेरुल उर्फ छोटन को नाबालिग के अपहरण और छेड़खानी का दोषी मानते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। यह मामला पोठिया थाना क्षेत्र से संबंधित है, जिसका थाना कांड संख्या 92/24 और पोक्सो वाद संख्या 33/24 है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी पर नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ छेड़खानी करने का आरोप था। छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। अनुसंधान पूरा होने पर आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद मामले की सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान, विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने पीड़िता के बयान और जांच से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत पक्ष रखा। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। पांच साल के सश्रम कारावास के साथ, अदालत ने 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह राशि पीड़िता को दी जाएगी। यदि आरोपी अर्थदंड जमा नहीं करता है, तो उसे छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मुआवजा राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया
इसके अतिरिक्त, अदालत ने सरकार को भी पीड़िता को 50 हजार रुपये की मुआवजा राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़िता को न्याय दिलाना और उसे सहायता प्रदान करना न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। फैसला आने के बाद न्यायालय परिसर में इस पर चर्चा हुई। विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने कहा कि पोक्सो मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को सजा मिलना समाज में सकारात्मक संदेश देता है। उन्होंने मामले के समय पर निष्पादन के लिए अदालत के प्रयासों की भी सराहना की। इस फैसले को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से यह संदेश गया है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के प्रति कानून सख्त है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।


