Normal Delivery vs C Section: जब कोई महिला मां बनने वाली होती है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि डिलीवरी सामान्य होगी या सी-सेक्शन से। पहले जहां ज्यादातर बच्चों का जन्म नॉर्मल डिलीवरी से होता था, वहीं अब दुनिया के कई देशों में सी-सेक्शन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हाल ही में इंग्लैंड और भारत से आए आंकड़े बताते हैं कि प्रसव का तरीका तेजी से बदल रहा है।
इंग्लैंड में हर चौथे बच्चे का जन्म इमरजेंसी C-Section से
BBC के विश्लेषण के मुताबिक, इंग्लैंड में अब हर 4 में से 1 बच्चे (25%) का जन्म इमरजेंसी सी-सेक्शन से हो रहा है। पिछले पांच साल में इस आंकड़े में 8 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, बिना किसी उपकरण की मदद से होने वाली सामान्य डिलीवरी में गिरावट आई है। कुछ साल पहले जहां आधे से ज्यादा बच्चों का जन्म सामान्य तरीके से होता था, अब यह आंकड़ा घटकर 43% रह गया है।

महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल पर रिसर्च करने वाली National Perinatal Epidemiology Unit की निदेशक प्रोफेसर मैरियन नाइट का कहना है कि यह इंग्लैंड में प्रसव के तरीके में एक बड़ा बदलाव है।
भारत में भी बढ़ रहा है यही ट्रेंड
यह बदलाव सिर्फ इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। NFHS-6 (National Family Health Survey-6) के अनुसार, भारत में भी सी-सेक्शन डिलीवरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। देश में अब 27.2% डिलीवरी सी-सेक्शन के जरिए हो रही हैं, जबकि NFHS-5 में यह आंकड़ा 21.5% था। यानी भारत में भी हर चार में से एक से ज्यादा बच्चे का जन्म सर्जरी के जरिए हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, निजी अस्पतालों में यह संख्या और ज्यादा है। प्राइवेट अस्पतालों में 54.1% डिलीवरी सी-सेक्शन से हुईं, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 16.9% रहा।

आखिर कब पड़ती है C-Section की जरूरत?
NHS और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित मेडिकल रिसर्च के अनुसार, इमरजेंसी सी-सेक्शन तब किया जाता है जब मां या बच्चे की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसी स्थितियों में शामिल हैं:
- बच्चे की धड़कन का असामान्य होना
- बच्चे तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचना
- लेबर पेन के बावजूद डिलीवरी का आगे न बढ़ना
- अत्यधिक रक्तस्राव
- प्लेसेंटा से जुड़ी जटिलताएं
- बच्चे का उल्टी या आड़ी पोजीशन में होना
ऐसे मामलों में डॉक्टरों के लिए सी-सेक्शन कई बार जीवन बचाने वाला फैसला साबित होता है।
क्यों बढ़ रहे हैं C-Section के मामले?
आज महिलाएं पहले की तुलना में अधिक उम्र में मां बन रही हैं। साथ ही डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले भी बढ़ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि प्रसव के दौरान किसी भी जोखिम से बचने की कोशिश में डॉक्टर और परिवार दोनों ज्यादा सतर्क हो गए हैं। विशेषज्ञों ने यह चिंता भी जताई कि प्रसूति वार्डों में बढ़ता दबाव और किसी भी जटिलता का डर भी सी-सेक्शन की संख्या बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।
क्या C-Section हमेशा बुरा होता है?
सोशल मीडिया और आम बातचीत में अक्सर सी-सेक्शन को लेकर गलतफहमियां देखने को मिलती हैं। कई लोग इसे नॉर्मल डिलीवरी से कमतर मानते हैं, जबकि मेडिकल विशेषज्ञ ऐसा नहीं मानते। सच यह है कि सी-सेक्शन एक बड़ी सर्जरी है, इसलिए रिकवरी में ज्यादा समय लग सकता है। लेकिन जब मां या बच्चे की जान को खतरा हो, तब यही प्रक्रिया सबसे सुरक्षित और जीवनरक्षक विकल्प बन जाती है।
सबसे जरूरी है मां और बच्चे की सुरक्षा
डिलीवरी नॉर्मल हो या सी-सेक्शन, सबसे महत्वपूर्ण बात मां और बच्चे का स्वस्थ और सुरक्षित रहना है। हर गर्भावस्था अलग होती है, इसलिए डिलीवरी का तरीका भी महिला की स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल जरूरतों के आधार पर तय किया जाता है। इसलिए सी-सेक्शन को डर या असफलता की तरह नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर एक महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।मां और बच्चा दोनों सुरक्षित और स्वस्थ रहें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


