दैनिक भास्कर क्विज में बेगूसराय के राजीव को वॉशिंग मशीन:‘जीतो ₹3 करोड़-चुनाव क्विज’ में मिला बंपर प्राइज, बोले- कोरोना काल से डीबी एप का यूजर हूं

दैनिक भास्कर क्विज में बेगूसराय के राजीव को वॉशिंग मशीन:‘जीतो ₹3 करोड़-चुनाव क्विज’ में मिला बंपर प्राइज, बोले- कोरोना काल से डीबी एप का यूजर हूं

बेगूसराय शहर के राजीव कुमार ने दैनिक भास्कर एप के ‘जीतो 3 करोड़, चुनाव क्विज’ में बंपर प्राइज के रूप में वॉशिंग मशीन जीता है। राजीव बेगूसराय जिला मुख्यालय के कपस्या मोहल्ले के रहने वाले हैं। क्विज में पूछे गए सवालों के सही जवाब देने वालों में से लकी ड्रा के जरिए चुने गए विजेताओं में शामिल राजीव को बेगूसराय दैनिक भास्कर ऑफिस में ये पुरस्कार सौंपा गया। शुरुआत में फोन आने पर साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए राजीव कुमार को इस पर विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन दैनिक भास्कर ऐप की प्रामाणिकता और टीम की ओर से किए गए प्रयासों के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कोरोना काल से नियमित रूप से पढ़ने लगे दैनिक भास्कर डिजिटल विजेता राजीव कुमार पेशे से व्यवसायी हैं और बेगूसराय में अपना व्यवसाय चलाते हैं। उन्होंने अपनी डिजिटल समाचार यात्रा के संबंध में बताते हुए कहा कि मैं कोरोना काल 2020 से लगातार दैनिक भास्कर ऐप पर खबरें देख और पढ़ रहा हूं। जब कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन लगा और घरों में अखबारों का आना बंद हो गया। तब एक दिन फेसबुक पर दैनिक भास्कर ऐप का विज्ञापन दिखाई दिया। मैंने तुरंत लिंक पर जाकर ऐप डाउनलोड कर लिया। उसके बाद से आज तक एक भी दिन ऐसा नहीं गया, जब मैंने भास्कर ऐप न खोला हो। अब यह मेरे दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। न सिर्फ अपने मोबाइल में, बल्कि घर के सभी मोबाइल में दैनिक भास्कर ऐप डाउनलोड कर रखा हूं। सभी लोग अपने पसंद के अनुसार ऐप खोलकर संबंधित विषय पढ़ता हूं। दैनिक भास्कर एप क्यों है अन्य न्यूज ऐप से अलग राजीव कुमार ने दैनिक भास्कर में क्या खास लगता है के जबाव में बहुत ही तार्किक और स्पष्ट जवाब दिए। उन्होंने भास्कर एप की तीन सबसे बड़ी खूबियां गिनाई। राजीव ने बताया कि भास्कर एप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई फालतू विज्ञापन नहीं आता। साल का मात्र 149 रुपए का मामूली शुल्क है, लेकिन इसके बदले में जो अनुभव मिलता है, वह लाजवाब है। बिना किसी विज्ञापन के खबरें देखने से हमारा समय बर्बाद नहीं होता। अन्य एप में सिर्फ लिखित खबरें होती हैं, उनमें वीडियो या खबरें सुनने (Audio News) का विकल्प नहीं होता। दैनिक भास्कर एप में खबरें सुनने और वीडियो फॉर्मेट में देखने की बेहतरीन सुविधा है। यदि कभी मेरे पास चश्मा नहीं भी होता है तो मैं आसानी से खबरें सुन लेता हूं। इससे समाचार जानना बेहद आसान हो गया है। यह शानदार अनुभव होता है। एप के लेआउट की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें डिस्ट्रिक्ट वाइज (जिला स्तर पर) पार्टीशन रहता है, जिससे स्थानीय खबरें तुरंत मिल जाती हैं। सुबह में मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ और शाम को इवनिंग न्यूज के जरिए महज 10 मिनट में पूरे दिन भर की बड़ी खबरों से अपडेट हुआ जा सकता है। किसी भी अन्य न्यूज एप से पहले और सबसे सटीक पूरी खबर दैनिक भास्कर में मिल जाता है। जब पटना से आया फोन तो लगा साइबर फ्रॉड है इस पुरस्कार को जीतने और उसके बाद की प्रक्रिया का अनुभव साझा करते हुए राजीव कुमार ने एक बेहद दिलचस्प वाक्या बताया। उन्होंने कहा कि मैं रोज सुबह मॉर्निंग ब्रीफ देखने के लिए ऐप खोलता हूं। उस दिन ऐप पर बिहार क्विज (इलेक्शन क्विज) का विकल्प आया। उसमें चुनाव से संबंधित तीन बेहद सामान्य और ज्ञानवर्धक सवाल पूछे गए थे। ये सवाल अक्सर वही होते हैं, जो एक-दो दिन पहले भास्कर के खबर के रूप में चल चुके होते हैं। मैंने उनके सही जवाब दे दिए, मैं अक्सर खेलता था, लेकिन उस दिन मेरा भाग्य चमक गया। क्विज जीतने के बाद जब मुझे पटना कार्यालय से फोन आया कि आप वॉशिंग मशीन जीत चुके हैं, तो आज के दौर के साइबर अपराधों को देखते हुए मुझे लगा कि यह कोई साइबर फ्रॉड है। मैंने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया। साइबर ठगों के डर से मैं उन्हें अपना आधार कार्ड या पैन कार्ड देने को बिल्कुल तैयार नहीं था। मुझे लगा कि कोई मुझे ठगने की कोशिश कर रहा है। भास्कर एप की खबर ने जीता भरोसा राजीव कुमार के इस डर को दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने बेहद संवेदनशीलता और पेशेवर तरीके से दूर किया। राजीव कुमार ने बताया कि भास्कर टीम के प्रतिनिधि ने मेरे वॉट्सऐप प्रोफाइल से मेरी फोटो ली और उस पर एक समाचार फॉर्मेट तैयार किया। जब वह न्यूज़ बनाकर दैनिक भास्कर एप पर लाइव चलाई गई और मैंने खुद को एप पर विजेता के रूप में देखा, तब जाकर मुझे पूरा विश्वास हुआ। इसके बाद ही मैंने अपने दस्तावेज उनके साथ साझा किए। भास्कर की इस प्रामाणिकता ने मेरा दिल जीत लिया। आज वाशिंग मशीन पाकर मुझे और मेरे पूरे परिवार को बेहद खुशी और गर्व महसूस हो रहा है। राजीव कुमार के परिवार में उनकी पत्नी रीना देवी (गृहणी) और तीन बच्चे (दो लड़के और एक लड़की) हैं। उनका पूरा परिवार शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ा हुआ है। राजीव ने गर्व से बताया कि उनका बड़ा बेटा बेंगलुरु में इंजीनियर है, जबकि छोटा बेटा और बेटी दोनों बेगूसराय के इंजीनियरिंग कॉलेज में ही पढ़ाई कर रहे हैं। घर में केवल वह अकेले नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और बच्चे भी दैनिक भास्कर एप के नियमित पाठक हैं और देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रहते हैं। बेगूसराय शहर के राजीव कुमार ने दैनिक भास्कर एप के ‘जीतो 3 करोड़, चुनाव क्विज’ में बंपर प्राइज के रूप में वॉशिंग मशीन जीता है। राजीव बेगूसराय जिला मुख्यालय के कपस्या मोहल्ले के रहने वाले हैं। क्विज में पूछे गए सवालों के सही जवाब देने वालों में से लकी ड्रा के जरिए चुने गए विजेताओं में शामिल राजीव को बेगूसराय दैनिक भास्कर ऑफिस में ये पुरस्कार सौंपा गया। शुरुआत में फोन आने पर साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए राजीव कुमार को इस पर विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन दैनिक भास्कर ऐप की प्रामाणिकता और टीम की ओर से किए गए प्रयासों के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कोरोना काल से नियमित रूप से पढ़ने लगे दैनिक भास्कर डिजिटल विजेता राजीव कुमार पेशे से व्यवसायी हैं और बेगूसराय में अपना व्यवसाय चलाते हैं। उन्होंने अपनी डिजिटल समाचार यात्रा के संबंध में बताते हुए कहा कि मैं कोरोना काल 2020 से लगातार दैनिक भास्कर ऐप पर खबरें देख और पढ़ रहा हूं। जब कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन लगा और घरों में अखबारों का आना बंद हो गया। तब एक दिन फेसबुक पर दैनिक भास्कर ऐप का विज्ञापन दिखाई दिया। मैंने तुरंत लिंक पर जाकर ऐप डाउनलोड कर लिया। उसके बाद से आज तक एक भी दिन ऐसा नहीं गया, जब मैंने भास्कर ऐप न खोला हो। अब यह मेरे दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। न सिर्फ अपने मोबाइल में, बल्कि घर के सभी मोबाइल में दैनिक भास्कर ऐप डाउनलोड कर रखा हूं। सभी लोग अपने पसंद के अनुसार ऐप खोलकर संबंधित विषय पढ़ता हूं। दैनिक भास्कर एप क्यों है अन्य न्यूज ऐप से अलग राजीव कुमार ने दैनिक भास्कर में क्या खास लगता है के जबाव में बहुत ही तार्किक और स्पष्ट जवाब दिए। उन्होंने भास्कर एप की तीन सबसे बड़ी खूबियां गिनाई। राजीव ने बताया कि भास्कर एप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई फालतू विज्ञापन नहीं आता। साल का मात्र 149 रुपए का मामूली शुल्क है, लेकिन इसके बदले में जो अनुभव मिलता है, वह लाजवाब है। बिना किसी विज्ञापन के खबरें देखने से हमारा समय बर्बाद नहीं होता। अन्य एप में सिर्फ लिखित खबरें होती हैं, उनमें वीडियो या खबरें सुनने (Audio News) का विकल्प नहीं होता। दैनिक भास्कर एप में खबरें सुनने और वीडियो फॉर्मेट में देखने की बेहतरीन सुविधा है। यदि कभी मेरे पास चश्मा नहीं भी होता है तो मैं आसानी से खबरें सुन लेता हूं। इससे समाचार जानना बेहद आसान हो गया है। यह शानदार अनुभव होता है। एप के लेआउट की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें डिस्ट्रिक्ट वाइज (जिला स्तर पर) पार्टीशन रहता है, जिससे स्थानीय खबरें तुरंत मिल जाती हैं। सुबह में मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ और शाम को इवनिंग न्यूज के जरिए महज 10 मिनट में पूरे दिन भर की बड़ी खबरों से अपडेट हुआ जा सकता है। किसी भी अन्य न्यूज एप से पहले और सबसे सटीक पूरी खबर दैनिक भास्कर में मिल जाता है। जब पटना से आया फोन तो लगा साइबर फ्रॉड है इस पुरस्कार को जीतने और उसके बाद की प्रक्रिया का अनुभव साझा करते हुए राजीव कुमार ने एक बेहद दिलचस्प वाक्या बताया। उन्होंने कहा कि मैं रोज सुबह मॉर्निंग ब्रीफ देखने के लिए ऐप खोलता हूं। उस दिन ऐप पर बिहार क्विज (इलेक्शन क्विज) का विकल्प आया। उसमें चुनाव से संबंधित तीन बेहद सामान्य और ज्ञानवर्धक सवाल पूछे गए थे। ये सवाल अक्सर वही होते हैं, जो एक-दो दिन पहले भास्कर के खबर के रूप में चल चुके होते हैं। मैंने उनके सही जवाब दे दिए, मैं अक्सर खेलता था, लेकिन उस दिन मेरा भाग्य चमक गया। क्विज जीतने के बाद जब मुझे पटना कार्यालय से फोन आया कि आप वॉशिंग मशीन जीत चुके हैं, तो आज के दौर के साइबर अपराधों को देखते हुए मुझे लगा कि यह कोई साइबर फ्रॉड है। मैंने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया। साइबर ठगों के डर से मैं उन्हें अपना आधार कार्ड या पैन कार्ड देने को बिल्कुल तैयार नहीं था। मुझे लगा कि कोई मुझे ठगने की कोशिश कर रहा है। भास्कर एप की खबर ने जीता भरोसा राजीव कुमार के इस डर को दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने बेहद संवेदनशीलता और पेशेवर तरीके से दूर किया। राजीव कुमार ने बताया कि भास्कर टीम के प्रतिनिधि ने मेरे वॉट्सऐप प्रोफाइल से मेरी फोटो ली और उस पर एक समाचार फॉर्मेट तैयार किया। जब वह न्यूज़ बनाकर दैनिक भास्कर एप पर लाइव चलाई गई और मैंने खुद को एप पर विजेता के रूप में देखा, तब जाकर मुझे पूरा विश्वास हुआ। इसके बाद ही मैंने अपने दस्तावेज उनके साथ साझा किए। भास्कर की इस प्रामाणिकता ने मेरा दिल जीत लिया। आज वाशिंग मशीन पाकर मुझे और मेरे पूरे परिवार को बेहद खुशी और गर्व महसूस हो रहा है। राजीव कुमार के परिवार में उनकी पत्नी रीना देवी (गृहणी) और तीन बच्चे (दो लड़के और एक लड़की) हैं। उनका पूरा परिवार शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ा हुआ है। राजीव ने गर्व से बताया कि उनका बड़ा बेटा बेंगलुरु में इंजीनियर है, जबकि छोटा बेटा और बेटी दोनों बेगूसराय के इंजीनियरिंग कॉलेज में ही पढ़ाई कर रहे हैं। घर में केवल वह अकेले नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और बच्चे भी दैनिक भास्कर एप के नियमित पाठक हैं और देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रहते हैं।  

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