मोतिहारी में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सदर अस्पताल गेट के पास स्थित “अपना अल्ट्रासाउंड” सेंटर को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रभारी सिविल सर्जन के निर्देश पर डॉ. सुनील कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। लाइसेंस का रिन्यूअल नहीं कराया जांच टीम को पता चला कि इस अल्ट्रासाउंड सेंटर का लाइसेंस वर्ष 2024 तक ही वैध था। इसके बाद न तो लाइसेंस का नवीनीकरण कराया गया और न ही विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बावजूद सेंटर लगातार संचालित हो रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस डॉक्टर के नाम पर यह सेंटर चल रहा था, उनका करीब दो वर्ष पूर्व ही निधन हो चुका था। इसके बावजूद उनके नाम का उपयोग कर सेंटर चलाया जा रहा था। नियमों का उल्लंघन और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ नियमों का उल्लंघन और सुरक्षा से खिलवाड़ छापेमारी के दौरान टीम ने मौके पर एक महिला का अल्ट्रासाउंड करते हुए भी पकड़ा। इससे स्पष्ट हो गया कि बिना वैध अनुमति के मरीजों की जांच की जा रही थी, जो नियमों का उल्लंघन और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह अवैध सेंटर सिविल सर्जन कार्यालय से महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित था और पिछले दो वर्षों से संचालित हो रहा था, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी छापेमारी का नेतृत्व कर रहे डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि सेंटर का संचालन अवैध तरीके से हो रहा था। लाइसेंसधारी डॉक्टर की मृत्यु के बाद भी नियमों की अनदेखी करते हुए सेवाएं दी जा रही थीं। उन्होंने बताया कि तत्काल कार्रवाई करते हुए सेंटर को सील कर दिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इस कार्रवाई के बाद जिले में संचालित अन्य अल्ट्रासाउंड और जांच केंद्रों को कड़ी चेतावनी दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वे नियमों का पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा अवैध रूप से संचालित संस्थानों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मोतिहारी में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सदर अस्पताल गेट के पास स्थित “अपना अल्ट्रासाउंड” सेंटर को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रभारी सिविल सर्जन के निर्देश पर डॉ. सुनील कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। लाइसेंस का रिन्यूअल नहीं कराया जांच टीम को पता चला कि इस अल्ट्रासाउंड सेंटर का लाइसेंस वर्ष 2024 तक ही वैध था। इसके बाद न तो लाइसेंस का नवीनीकरण कराया गया और न ही विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बावजूद सेंटर लगातार संचालित हो रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस डॉक्टर के नाम पर यह सेंटर चल रहा था, उनका करीब दो वर्ष पूर्व ही निधन हो चुका था। इसके बावजूद उनके नाम का उपयोग कर सेंटर चलाया जा रहा था। नियमों का उल्लंघन और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ नियमों का उल्लंघन और सुरक्षा से खिलवाड़ छापेमारी के दौरान टीम ने मौके पर एक महिला का अल्ट्रासाउंड करते हुए भी पकड़ा। इससे स्पष्ट हो गया कि बिना वैध अनुमति के मरीजों की जांच की जा रही थी, जो नियमों का उल्लंघन और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह अवैध सेंटर सिविल सर्जन कार्यालय से महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित था और पिछले दो वर्षों से संचालित हो रहा था, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी छापेमारी का नेतृत्व कर रहे डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि सेंटर का संचालन अवैध तरीके से हो रहा था। लाइसेंसधारी डॉक्टर की मृत्यु के बाद भी नियमों की अनदेखी करते हुए सेवाएं दी जा रही थीं। उन्होंने बताया कि तत्काल कार्रवाई करते हुए सेंटर को सील कर दिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इस कार्रवाई के बाद जिले में संचालित अन्य अल्ट्रासाउंड और जांच केंद्रों को कड़ी चेतावनी दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वे नियमों का पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा अवैध रूप से संचालित संस्थानों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


