Rohit Sharma on captaincy lessons: मुंबई इंडियंस के ESA डे इवेंट में रोहित शर्मा ने भारतीय क्रिकेट को वर्ल्ड क्रिकेट का पावरहाउस बनाने का बड़ा दावा किया। इसके साथ ही उन्होंने कप्तानी के अनुभव, बदलते क्रिकेट और युवाओं पर दबाव न बनाने को लेकर खुलकर बात की।
Rohit Sharma bold statement on Indian cricket: अपने इंटरनेशनल करियर के लगभग 20 साल पूरे करने के बाद, पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का मानना है कि भारतीय क्रिकेट टीम बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रही है। चाहे वो टीम के नतीजे हों या खिलाड़ियों की सोच, दोनों में कमाल का बदलाव आया है। मुंबई इंडियंस (MI) के ‘ESA डे’ इवेंट में बात करते हुए रोहित ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वह भारत को वर्ल्ड क्रिकेट का पावरहाउस (सबसे मजबूत ताकत) बनते देखना चाहते हैं और टीम पहले से ही उस मुकाम के बेहद करीब है।
रोहित शर्मा ने कहा कि पिछले तीन सालों में भारतीय क्रिकेट ने जो हासिल किया है, वो देखना बेहद शानदार रहा है। चाहे 2024 का वर्ल्ड कप हो, वीमेन्स वर्ल्ड कप, अंडर-19 वर्ल्ड कप, आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी या फिर टी20 वर्ल्ड कप, हर जगह भारत का दबदबा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम इंडिया की यह जीत का सिलसिला आगे भी ऐसे ही जारी रहेगा।
क्रिकेट का बदलता रूप और निडर खिलाड़ी
रोहित ने खेल में आए बड़े बदलावों पर भी बात की। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, ‘जब हमने शुरुआत की थी, तब टी20 में 130-140 का स्कोर अच्छा माना जाता था। लेकिन आज के समय में कोई भी स्कोर सुरक्षित नहीं लगता।’ रोहित के मुताबिक, आज के दौर के खिलाड़ी बेहद निडर और खुले दिमाग के हो गए हैं। वे मैदान पर रक्षात्मक होने के बजाय आगे बढ़कर शॉट खेलने से नहीं डरते, जो क्रिकेट के भविष्य के लिए एक बेहतरीन संकेत है।
‘युवाओं पर दबाव न डालें’
अगली पीढ़ी के क्रिकेटर्स को लेकर रोहित ने एक जरूरी सलाह दी। उन्होंने कहा कि 6 से 18 साल तक के बच्चों पर शुरुआत से ही उम्मीदों का भारी दबाव नहीं डालना चाहिए। बच्चों को सिर्फ खेल का मजा लेना चाहिए और अपने दोस्तों के साथ खुलकर खेलना चाहिए। रोहित ने कहा, ‘मेरी शुरुआत भी ऐसे ही हुई थी। कोई भी आपको कुछ करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।’
कप्तानी ने सिखाए जिंदगी के बड़े सबक
39 साल के इस दिग्गज ओपनर ने माना कि करियर के उतार-चढ़ाव ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है।
खेल में कभी भी सफर आसान नहीं होता। जब वो टीम इंडिया और मुंबई इंडियंस के कप्तान थे, तो उन्हें खुद से ज्यादा पूरी टीम के प्रदर्शन की चिंता करनी पड़ती थी। रोहित ने कहा, ‘अगर आप खुद सेंचुरी बना लें, लेकिन बाकी टीम फ्लॉप हो जाए और मैच हार जाएं, तो उस शतक से कभी सुकून नहीं मिलता। कप्तानी ने मुझे खुद से ऊपर उठकर टीम के लक्ष्य को अहमियत देना सिखाया।’
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