How was CJP Born |कॉकरोच जनता पार्टी वाले अभिजीत दीपके की पूरी कुंडली | Teh Tak Part 1

How was CJP Born |कॉकरोच जनता पार्टी वाले अभिजीत दीपके की पूरी कुंडली | Teh Tak Part 1

इस धरती पर एक जीव ऐसा भी है, जिसके बारे में यह माना जाता है कि परमाणु युद्ध होने पर भी इन पर असर नहीं होगा। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है, ये तो नहीं पता लेकिन

हां ये जरूर है कि जब व्यवस्था की सफाई करने के बजाय सिस्टम खुद सड़ने लगता है, तब अंधेरी रातों में, सुनसान राहों पर एक ‘मसीहा’ निकलता है। जिसे लोग शहंशाह नहीं, बल्कि ‘कॉकरोच’ कहते हैं! यह एक ऐसा सर्वव्यापी मसीहा है जो कहीं भी प्रकट हो सकता है। आपके चमचमाते किचन में, भारतीय रेल के डिब्बों में, या फिर सरकारी दफ्तर के उस सीलन भरे कमरे में जहां धूल खाती फाइलें सदियों से सो रही हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक इस महान जीव का जिक्र क्यों? तो जनाब,  राजनीति के गलियारे से एक ब्रेकिंग न्यूज़ आई। देश की राजनीति में इस वक्त एक ऐसी पार्टी की एंट्री हुई जिसने बिना चुनाव लड़े, बिना रैलियां निकाले और बिना पोस्टर्स लगाए सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। नाम है कॉकरोच जनता पार्टी यानी कि सीजेपी। सीजेपी का नाम इस समय इंटरनेट पर टॉक ऑफ द टाउन बना हुआ है। सुनने में यह किसी मीम या मजाक जैसा आपको लग सकता है लेकिन इंटरनेट पर इसकी लोकप्रियता  मजाक से आगे निकलती दिखाई दी। लॉन्च होने के महज कुछ दिनों के भीतर इस पार्टी से हजारों लोग जुड़ गए। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इसके सदस्य खुद को सेकुलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक और लेजी बताते हैं और यही लाइन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। शुरुआती दिनों में कोई इसे युवाओं की हताशा का नया प्रतीक बता रहा था तो कोई इसे मौजूदा राजनीति पर सबसे बड़ा व्यंग मान रहा। लेकिन सवाल सबसे बड़ा यहां पर यह है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ इंटरनेट का मजाक है या फिर सिस्टम से नाराज युवाओं की नई डिजिटल आवाज। दरअसल इस पूरी कहानी की शुरुआत एक विवादित टिप्पणी से हुई जिसमें बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्ट को लेकर कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। पार्टी के नाम कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर भी चर्चा है।  यह नाम हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी पर आधारित है। जिसमें उन्होंने यह कहा था कि कुछ युवा कॉकरोच जैसे होते हैं जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और वह सोशल मीडिया, मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। हालांकि बाद में सीजीआई ने सफाई भी दी थी और कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। जिस दिन सीजीआई सूर्यकांत ने कॉकरोच वाली टिप्पणी की उसी दिन यानी 16 मई को अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया एक्स पर लोगों से कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्टर करने की अपील की। साफ कर दें कि इस पार्टी का मकसद चुनाव लड़ना नहीं है। यह व्यंग करने वाला एक पॉलिटिकल आउटफिट है। पार्टी में शामिल होने की दिलचस्प शर्तें बताएं। उससे पहले बता दें कि कॉकरोच वाली जो टिप्पणी सीजीआई सूर्यकांत ने की थी, उस पर बाद में उन्होंने साफ किया कि उनकी मौखिक टिप्पणी फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल करके कानून और मीडिया जैसे पेशों में एंट्री करने वाले लोगों के लिए थी ना कि बेरोजगार युवाओं के लिए। 

क्या थी सीजेआई की कॉकरोच वाली टिप्पणी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कीड़ों और परजीवियों का उदाहरण देते हुए कहा कि बेरोजगार युवा सोशल मीडिया और सूचना के अधिकार (आरटीआई) का इस्तेमाल करके हर किसी पर हमला करते हैं। ये टिप्पणियां तब आईं जब मुख्य न्यायाधीश कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ एक ऐसे वकील को फटकार लगा रही थी जो वरिष्ठ अधिवक्ता का पदनाम मांग रहा था।  समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पीठ ने याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील संजय दुबे  से कहा कि पूरी दुनिया वरिष्ठ अधिवक्ता बनने के योग्य हो सकती है, लेकिन कम से कम आप तो इसके हकदार नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा फेसबुक पर इस्तेमाल की गई भाषा का भी उल्लेख किया। तभी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने समाज के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कई युवा हैं, जो तिलचट्टों की तरह हैं, जिन्हें न तो रोजगार मिलता है और न ही पेशे में कोई स्थान। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता बन जाते हैं, और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं। 

बाद में अपने बयान पर दी सफाई 

हालांकि बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने विवादास्पद “तिलचट्टे” वाले बयान पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनके मौखिक कथनों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और उन्हें देश के युवाओं की आलोचना के रूप में पेश किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि मुझे यह पढ़कर बहुत दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान मेरे मौखिक कथनों को गलत तरीके से उद्धृत किया है। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी जिन्होंने फर्जी और फर्जी डिग्रियों की मदद से वकालत जैसे पेशे में प्रवेश किया है। ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं, इसलिए वे परजीवी की तरह हैं। यह कहना पूरी तरह निराधार है कि मैंने हमारे देश के युवाओं की आलोचना की है।

किसने बनाई सीजेपी

कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की मास्टर डिग्री कर रहे हैं। वह 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में भी वालंटियर रह चुके हैं। द हिंदू अखबार से बात करते हुए अभिजीत ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी माननीय मुख्य न्यायाधीश के उस बयान के खिलाफ युवाओं की असहमति है जिसमें उन्होंने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी करार दिया था। भारत जैसे लोकतंत्र में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। जहां संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षक माने जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई युवाओं की आलोचना कर उनका अपमान करते हैं। वो आगे कहते हैं कि अगर युवाओं को अपनी आवाज पहुंचाने के लिए कॉकरोच बनना पड़े तो हम इस पहचान को अपनाते हैं। इसीलिए हमने अपना नाम रखा है कॉकरोच जनता पार्टी। हमने आपको पहले ही बताया कि एक सिटेरिकल पॉलिटिकल पार्टी है। 

व्यंग्य के पीछे छिपा ठोस नीतिगत घोषणापत्र

मजाकिया अंदाज और व्यंग्य के पीछे इस आंदोलन ने शासन से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को एक औपचारिक मांग-पत्र (चार्टर) में तब्दील कर दिया:

पेपर लीक और परीक्षाओं की विश्वसनीयता: NEET जैसी केंद्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधलियों और गड़बड़ियों के खिलाफ सीधा विरोध प्रदर्शन।

न्यायपालिका व लोकतंत्र में हितों का टकराव: सेवानिवृत्त जजों को रिटायरमेंट के तुरंत बाद मिलने वाले राजनीतिक पदों (जैसे मनोनीत राज्यसभा सीट) पर रोक लगाने की मांग।

दलबदल पर कड़ा प्रहार: अपनी पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में जाने वाले जन-प्रतिनिधियों (सांसदों/विधायकों) पर लंबे समय तक किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव।

चुनावी पारदर्शिता और मीडिया सुधार: मतदाता सूचियों के प्रबंधन में कड़ी जवाबदेही तय करने और कॉरपोरेट मीडिया के पक्षपातपूर्ण रवैये पर सवाल उठाना।

इसे भी पढ़ें: CJP Protests Timeline | NEET से लेकर जंतर-मंतर तक: CJP के आंदोलन की इनसाइड स्टोरी | Teh Tak Part 2

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *