होर्मुज स्ट्रेट बना भारत के लिए बड़ा खतरा, समुद्री केबल्स कटी तो देश का इंटरनेट होगा ठप, जानिए पूरा मामला

होर्मुज स्ट्रेट बना भारत के लिए बड़ा खतरा, समुद्री केबल्स कटी तो देश का इंटरनेट होगा ठप, जानिए पूरा मामला

Iran–Israel War: दुनिया के नक्शे पर छोटा दिखने वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भारत के लिए बड़ा डिजिटल खतरा बनता जा रहा है। होर्मुज में बढ़ता तनाव अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया को भी प्रभावित कर सकता है। दुनिया का करीब 99% इंटरनेट डेटा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। ये केबल्स एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ती हैं। अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है तो सेवाएं ठप पड़ जाएंगी जिसका ऑनलाइन कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।

भारत के लिए यह रास्ता कितना अहम है

भारत के लिए यह इलाका बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से गुजरने वाले कई बड़े नेटवर्क सीधे देश को जोड़ते हैं।

  • FALCON submarine cable system- जो मुंबई से गल्फ देशों को जोड़ता है
  • Asia-Africa-Europe 1 cable- जो एशिया को यूरोप से जोड़ता है
  • Gulf Bridge International cable- यह केबल नेटवर्क भारत को यूएई, सऊदी अरब, कतर और कुवैत से जोड़ता है।
  • FALCON- नेटवर्क भारत के डेटा ट्रैफिक, बैंकिंग और आईटी सेक्टर के लिए बेहद अहम है।

अगर केबल टूटा तो क्या होगा

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने जोखिम बढ़ा दिया है। अभी तक केबल पर सीधा हमला नहीं हुआ है, लेकिन सैन्य गतिविधियों के कारण खतरा बढ़ गया है। ज्यादातर केबल नुकसान मछली पकड़ने या जहाज के एंकर गिरने से होता है। लेकिन जब युद्ध जैसी स्थिति हो, तो ऐसे हादसे और बढ़ जाते हैं। अगर ये केबल्स डैमेज होती हैं तो असर कई स्तर पर दिखेगा

  • इंटरनेट स्पीड धीमी या पूरी तरह बंद
  • ऑनलाइन पेमेंट और बैंकिंग सेवाओं में देरी
  • ई-कॉमर्स और आईटी सेक्टर को नुकसान
  • शेयर बाजार और फाइनेंशियल सिस्टम पर असर

मरम्मत भी आसान नहीं

समस्या सिर्फ केबल टूटने की नहीं है, बल्कि उसे ठीक करना और मुश्किल हो सकता है। मरम्मत जहाजों को सुरक्षा खतरा, बीमा और परमिशन में देरी वहीं समुद्री इलाके में काम करना मुश्किल होता है। इस वजह से इंटरनेट बाधित होने पर उसे सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। कई लोग सोचते हैं कि सैटेलाइट इंटरनेट इसका विकल्प हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। स्टारलिंक (Starlink) जैसे सिस्टम अभी इतने बड़े स्तर पर डेटा ट्रैफिक संभालने में सक्षम नहीं हैं और लागत भी ज्यादा है।

एल्यूमिनियम सेक्टर पर असर

इस युद्ध का असर सिर्फ इंटरनेट तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत का एल्यूमिनियम उद्योग भी दबाव में आ गया है।एल्यूमिनियम की कमी का असर सीधे ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा स्क्रैप आयात से पूरा करता है, जिसमें मिडिल ईस्ट की करीब 30% हिस्सेदारी है। मौजूदा हालात में उत्पादन 20 से 40% तक घट गया है, स्क्रैप की कीमतें करीब 30% बढ़ गई हैं और कई फैक्ट्रियों में कच्चे माल की कमी देखने को मिल रही है।

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