हाईकोर्ट की युगल पीठ ने अवैध उत्खनन से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर सुनवाई शुरू की है । मामला इस बात पर केंद्रित है कि यदि किसी घटना का कारण (कॉज ऑफ एक्शन) ‘नियम 2022’ के लागू होने से पहले का है, तो क्या अपील दायर करने के लिए जुर्माने की 10 प्रतिशत राशि जमा करना अनिवार्य होगा? जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ में स्मिता नीखरा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई हुई । याचिकाकर्ता ने वर्ष 2022 और 2025 में जारी किए गए उन आदेशों को चुनौती दी है, जो खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन से संबंधित थे । शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने आपत्ति जताई कि याचिकाकर्ता को सीधे हाई कोर्ट आने के बजाय ‘नियम 2022’ के नियम-27 के तहत अपील करनी चाहिए। कोर्ट अब इस बिंदु पर विचार करेगा कि क्या अपील करना एक ‘प्रक्रियात्मक अधिकार’ है या ‘मौलिक अधिकार’ । साथ ही, क्या 2022 के नियमों के लागू होने से पहले के मामलों में भी जुर्माना जमा करने की शर्त लागू होगी? सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला याचिकाकर्ता के अधिवक्ता महेश गोयल ने तर्क दिया कि संबंधित आदेश मनमाने हैं । उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुकुंद देव बनाम महादु और ईसीजीसी लिमिटेड जैसे फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि चूंकि मामला पुराने नियमों के समय का है, इसलिए नए नियमों की कठोर शर्तें (जुर्माना जमा करना) लागू नहीं होनी चाहिए।
6.43 करोड़ का लगाया था जुर्माना
ग्वालियर के खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन मामले में 20 गुना पेनल्टी लगाई थी। 6 करोड़ 43 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना हुआ। इस जुर्माने के खिलाफ अपील की जानी है। अपील से पहले 10 फीसदी राशि भरना होती है। राशि भरना जरूरी है या नहीं। इस पर फैसला किया जाना है।


