ड्रग तस्करी व ड्रोन नेटवर्क पर हाई कोर्ट सख्त:चंडीगढ़-पंजाब, हरियाणा और NCB को निर्देष, हर 3 महीने में रिपोर्ट दे

ड्रग तस्करी व ड्रोन नेटवर्क पर हाई कोर्ट सख्त:चंडीगढ़-पंजाब, हरियाणा और NCB को निर्देष, हर 3 महीने में रिपोर्ट दे

पंजाब में बढ़ती ड्रग तस्करी, सीमा पार से ड्रोन के जरिए हो रही स्मगलिंग और हथियारों की सप्लाई को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के डीजीपी समेत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को आदेश दिया है कि वे हर तीन महीने में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि ड्रग तस्करी के मामलों, बरामद नशे, उसे नष्ट करने की कार्रवाई और नशा मुक्ति अभियान की जानकारी नियमित तौर पर दी जाए। यदि रिपोर्ट में किसी तरह की लापरवाही या गंभीर स्थिति सामने आती है तो मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह आदेश उस जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया, जिसे अदालत ने स्वयं संज्ञान लेते हुए शुरू किया था। हाई कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान दरअसल, एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने खुद इस मामले का संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा पंजाब में बढ़ती ड्रग तस्करी और पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे नशीले पदार्थों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। समाचार रिपोर्ट में बताया गया था कि बीएसएफ ने पंजाब पुलिस को 75 ऐसे लोगों की सूची सौंपी थी, जो कथित तौर पर ड्रग तस्करी में शामिल पाए गए थे। इसके अलावा वर्ष 2023 के दौरान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए भारत भेजे जा रहे करीब 755 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के साथ हथियारों की तस्करी भी जुड़ी हुई थी। कई राइफल और पिस्तौल भी जब्त की गई थीं। सरकारों और NCB ने अदालत में दी स्टेटस रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब, हरियाणा और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य सरकारों और जांच एजेंसियों द्वारा ड्रग तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। साथ ही जब्त किए गए मादक पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। अदालत ने रिपोर्टों का अवलोकन करने के बाद कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी लगातार निगरानी और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। हर 3 महीने में देनी होगी पूरी जानकारी खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के डीजीपी तथा एनसीबी के महानिदेशक यह जानकारी नियमित रूप से देंगे कि कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हुए, उनका निस्तारण कैसे किया गया और नशा मुक्ति के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने यह जिम्मेदारी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से तय की है ताकि भविष्य में इन रिपोर्टों की न्यायिक समीक्षा की जा सके।

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