Hidden Obesity: वजन सामान्य है, फिर भी हो सकता है छिपा मोटापा, एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन की रिसर्च

Hidden Obesity: वजन सामान्य है, फिर भी हो सकता है छिपा मोटापा, एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन की रिसर्च

Hidden Obesity Symptoms: आजकल हम सब फिट रहने के लिए बार-बार वजन तोलते रहते हैं। अगर वजन सही आता है, तो हम चैन की सांस लेते हैं कि चलो हम बिल्कुल फिट हैं। लेकिन हाल ही में एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन की एक नई रिसर्च के अनुसार, हर 4 में से 1 इंसान, जिसका वजन और बीएमआई (BMI) देखने में बिल्कुल सही है, वो असल में अंदर से मोटापे का शिकार हो सकता है। इसे आप छिपा हुआ मोटापा कह सकते हैं। आइए समझते हैं कि ये क्या है और हमें बीएमआई पर पूरा भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए।

क्या है यह छुपा हुआ मोटापा?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, जो इंसान बाहर से देखने में दुबला-पतला या फिट लगता है, जरूरी नहीं कि वह अंदर से भी पूरी तरह तंदुरुस्त हो। हमारे शरीर में दो चीजें होती हैं, एक तो मांसपेशियां (मसल्स) और दूसरी चर्बी (फैट)। अब मान लीजिए किसी का वजन तो बिल्कुल सही है, लेकिन उसके शरीर में काम की मांसपेशियां कम हैं और फालतू चर्बी बहुत ज्यादा भरी हुई है, तो इसी को छिपा हुआ मोटापा कहते हैं। यानी बाहर से सब ठीक, पर अंदर से इसका शिकार होना, इसमें चौकानें वाली बात ये है कि ऐसे लोगों की बीएमआई बिलकुल नार्मल होती है।

बीएमआई (BMI) पर पूरा भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए?

हम सब फिटनेस चेक करने के लिए बीएमआई (BMI) का सहारा लेते हैं, जो सिर्फ हमारी लंबाई और वजन का हिसाब-किताब लगाता है। लेकिन ये रिसर्च कहती है कि बीएमआई पूरी बात नहीं बताता। यह आपके शरीर का कुल वजन तो बता देता है, लेकिन यह नहीं पहचान पाता कि उस वजन में कितनी चर्बी है और कितनी मांसपेशियां। यही वजह है कि वजन की मशीन पर फिट दिखने वाले लोग भी धोखे में रह जाते हैं।

इस छिपे हुए मोटापे से क्या दिक्कत हो सकती है?

भले ही आपका पेट बाहर न निकला हो और आप बिल्कुल पतले दिखते हों, लेकिन अगर शरीर के अंदर फालतू चर्बी जमा है, तो यह बहुत नुकसानदायक हो सकता है। रिसर्च के मुताबिक, ऐसे पतले दिखने वाले लोगों को भी आगे चलकर वही बीमारियां होने का डर रहता है, जो एक मोटे इंसान को होता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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