हरियाणा 645 करोड़ IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाला:बलवंत सुसाइड नोट में खुलासा; दीवान-ऋषि ने निकाले 25 करोड़, चेक नंबर-21 बना CBI का जांच केंद्र

हरियाणा 645 करोड़ IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाला:बलवंत सुसाइड नोट में खुलासा; दीवान-ऋषि ने निकाले 25 करोड़, चेक नंबर-21 बना CBI का जांच केंद्र

हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के 25 करोड़ रुपए के कथित घोटाले से जुड़े मामले में दिवंगत कर्मचारी बलवंत सिंह के सुसाइड नोट ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। सिविल सचिवालय की आठवीं मंजिल से 4 मई को कूदकर आत्महत्या करने वाले बलवंत सिंह ने अपने अंतिम पत्र में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने कोर्ट में दलील दी है कि बलवंत सिंह का सुसाइड नोट एक मृत्यु पूर्व बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) के रूप में स्वीकार किए जाने योग्य है, क्योंकि इसे ऐसे व्यक्ति ने लिखा था जिसे अपनी आसन्न मृत्यु का पूर्ण आभास था। एजेंसी का कहना है कि नोट में दर्ज आरोप और घटनाक्रम जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। यहां पढ़िए सुसाइड नोट में क्या 3 बड़े खुलासे… 1. दीवान ने ऋषि को सौंपा चेक: सुसाइड नोट के अनुसार, बलवंत सिंह ने आरोप लगाया कि अमित दीवान ने एक चेक अपने कब्जे में लेकर उसे ऋषि नामक व्यक्ति को सौंप दिया था। इसी चेक का बाद में इस्तेमाल एचपीजीसीएल के खाते से 25 करोड़ रुपए की कथित अनधिकृत निकासी के लिए किया गया। 2. चेक नंबर-21 के जरिए निकाले पैसे: बलवंत सिंह ने लिखा कि जैसे ही उन्हें चेक नंबर-21 के जरिए रकम निकाले जाने की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल अमित दीवान को इसकी सूचना दी। उनके अनुसार, दीवान ने बार-बार यह आश्वासन दिया कि निकाली गई राशि जल्द ही वापस जमा करा दी जाएगी। हालांकि, जब पैसा वापस नहीं आया तो उन्होंने मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। 3. निलंबित करने की दी गई धमकी: सुसाइड नोट में यह भी दावा किया गया है कि जब उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर आधिकारिक नोटिस जारी करने का प्रस्ताव रखा तो उन्हें निलंबित करने की धमकी दी गई। बलवंत सिंह ने लिखा कि उन्हें लगातार भरोसा दिलाया जाता रहा कि पैसा वापस कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पंचकूला कोर्ट ने खारिज की जमानत वहीं, मामले में आरोपी अमित दीवान को राहत नहीं मिली है। पंचकूला की अदालत ने बुधवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों और 25 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की जांच और तेज होने की संभावना है। सीबीआई ने सुसाइड नोट को मृत्यु पूर्व बयान मानने की दलील दी है। पंचकूला अदालत ने अमित दीवान की जमानत याचिका खारिज कर दी। यहां पढ़िए CBI जांच में क्या निकला… लुधियाना में HPGCL पेंशन फंड खाता खोला गया CBI जांच के अनुसार, एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट खाता 2 जून, 2025 को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की लुधियाना शाखा में खोला गया था, जिसे बाद में पंचकुला के सेक्टर 8 स्थित शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया। बचत खाता खोलने का प्रस्ताव 21 मई, 2025 को संभागीय लेखाकार जयबीर सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया था। खाते में था बलवंत का मोबाइल नंबर जांचकर्ताओं ने पाया कि खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर लेखा अधिकारी बलवंत सिंह का था। खाता खोलते समय एक चेकबुक जारी की गई थी, जबकि पंचकुला में खाता स्थानांतरित होने के बाद एक और चेकबुक जारी की गई। मूल 25 चेक लीफ में से, दिसंबर 2025 में नई चेकबुक जारी होने से पहले केवल पहले 10 लीफ का ही उपयोग किया गया था। सीबीआई ने खुलासा किया है कि 29 दिसंबर, 2025 को एचपीजीसीएल खाते से चेक नंबर 21 के माध्यम से स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स को 25 करोड़ रुपए का अनधिकृत हस्तांतरण किया गया था।

पुरानी चेक बुक से निकाला गया 21 नंबर चेक

जांच के दौरान, पुरानी चेक बुक से चेक नंबर 21 गायब पाया गया। चेक बुक संभागीय लेखाकार जयबीर सिंह की हिरासत में थी और पंचकुला स्थित एक अलमारी में रखी हुई थी। अलमारी की चाबी जयबीर सिंह और बलवंत सिंह के पास थी। पंचकुला अदालत में सीबीआई द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, बलवंत सिंह ने दिसंबर 2025 में जयबीर सिंह से पुरानी चेक बुक लाने को कहा था, क्योंकि इसे वित्त निदेशक अमित दीवान को दिखाना था, जो कार्यालय की तीसरी मंजिल पर रिभव ऋषि के साथ बैठे थे। बलवंत ने अमित दीवान की कॉल रिकार्ड की जांच में यह भी पता चला है कि बलवंत सिंह द्वारा 21 फरवरी, 2026 को अमित दीवान को की गई व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्ड की गई थी। बलवंत सिंह द्वारा कॉल को स्पीकर मोड पर रखने के बाद यह बातचीत जयबीर सिंह के फोन पर रिकॉर्ड हो गई थी। बलवंत सिंह को आशंका थी कि दीवान बाद में ऋषि को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का चेक देने में अपनी भूमिका से मुकर सकता है। रिकॉर्ड की गई बातचीत में, बलवंत ने दीवान से बार-बार चेक वापस करने का अनुरोध किया। ऑडियो फाइल को बाद में एक पेन ड्राइव में सुरक्षित कर लिया गया और सीबीआई को सौंप दिया गया। जांचकर्ता इसे दीवान के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सबूत मानते हैं।

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