Hanuman Ansh से चमके शोभिनव सत्या, 10 साल के इंतजार के बाद मिली बड़ी पहचान

Hanuman Ansh से चमके शोभिनव सत्या, 10 साल के इंतजार के बाद मिली बड़ी पहचान

‘हनुमान अंश’ इस साल की चर्चित और सफल फिल्मों में अपनी जगह बना रही है। फिल्म में आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा की भूमिका निभाने वाले 31 वर्षीय अभिनेता शोभिनव सत्या भी इन दिनों खूब चर्चा में हैं। खास बात यह है कि बड़ी पहचान मिलने के बाद भी शोभिनव अपनी निजी जिंदगी को लोगों की नजरों से दूर रखना पसंद करते हैं।

एक इंटरव्यू में शोभिनव ने बताया कि लोग उनके बारे में बहुत कम जानते हैं और वह आगे भी अपनी निजी जिंदगी को इसी तरह सीमित रखना चाहते हैं। बचपन से ही उनका स्वभाव शांत और संकोची रहा है। वह सामाजिक माध्यमों से भी काफी दूरी बनाकर रखते थे।

फिल्म के प्रचार से पहले उनके खाते पर केवल दो-तीन तस्वीरें थीं और उन्हें करीब 200 लोग ही देखते थे। अब उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है और करीब 2.25 लाख लोग उन्हें देखने लगे हैं।

काम से पहचान बनाना चाहते हैं शोभिनव

शोभिनव को घंटों मोबाइल चलाना पसंद नहीं है। वह मानते हैं कि किसी कलाकार की पहचान उसके काम से होनी चाहिए, उसकी निजी जिंदगी से नहीं।

इस सोच के लिए वह दिवंगत अभिनेता अमरीश पुरी को अपना आदर्श मानते हैं। शोभिनव को यह बात बेहद पसंद है कि अमरीश पुरी ने अपने निजी जीवन को पर्दे के बाहर चर्चा का विषय नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी पूरी पहचान और प्रभाव अपने अभिनय के लिए बचाकर रखा।

शोभिनव भी इसी रास्ते पर चलना चाहते हैं। उनका मानना है कि इंसान को अपनी जिंदगी उसी तरह जीनी चाहिए, जिस तरह भगवान राम उसे रखते हैं। वह भगवान हनुमान की सीख को भी अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं।

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10 साल पहले शुरू हुआ था अभिनेता बनने का सफर

‘हनुमान अंश’ में शोभिनव सत्या का मुख्य भूमिका तक पहुंचना किसी संयोग से कम नहीं है। फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी हैं। शोभिनव शुरुआत में इस फिल्म से सहायक निर्देशक के तौर पर जुड़े थे।

इसी दौरान मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता की तबीयत अचानक खराब हो गई। ऐसे समय में शोभिनव को उनकी जगह भूमिका निभाने का मौका मिला और यहीं से उनके लिए सब कुछ बदल गया। हालांकि, शोभिनव का अभिनेता बनने का सफर वास्तव में करीब 10 साल पहले शुरू हो चुका था।

पहली बार भी संयोग से मिली थी अभिनय की भूमिका

पुणे स्थित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान में पढ़ाई के दौरान शोभिनव विवेक केलकर की छात्र फिल्म ‘ढाई कालो’ में सहायक निर्देशक के तौर पर काम कर रहे थे।

फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाला अभिनेता किसी वजह से वहां नहीं पहुंच पाया। इसके बाद शोभिनव को उसकी जगह भूमिका निभानी पड़ी। यही उनके लिए अभिनय की दुनिया में पहला बड़ा अनुभव बना।

शोभिनव इसे भगवान हनुमान का संकेत मानते हैं। उनके अनुसार, उस समय उन्हें सिर्फ एक छोटी-सी झलक मिली थी, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि हनुमान जी ने उनके सामने पूरी तस्वीर रख दी थी।

छोटी-मोटी भूमिकाओं के लिए नहीं किया समझौता

शोभिनव को हमेशा से लगता था कि उन्हें अभिनय के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना है। हालांकि, उस समय उन्हें यह साफ नहीं था कि उनका सपना किस तरह पूरा होगा।

पिछले 10 सालों में उन्होंने खुद से किया एक वादा निभाया। उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी छोटी-मोटी भूमिका के लिए काम नहीं करेंगे और सही मौके का इंतजार करेंगे।

आज उनके दोस्त कहते हैं कि उन्होंने जो सपना देखा था, उसे हासिल कर लिया है। लेकिन शोभिनव के लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने लंबे समय तक इंतजार किया और जल्दबाजी में कोई भी भूमिका स्वीकार नहीं की।

सीतापुर से लखनऊ और फिर पुणे तक का सफर

शोभिनव सत्या का जन्म सीतापुर के खैराबाद में हुआ। सातवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद उनके पिता की नौकरी के कारण परिवार लखनऊ आ गया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के ब्राइटलैंड इंटर कॉलेज से पढ़ाई की।

उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने फैजाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

इसी दौरान उन्होंने लखनऊ के ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स से अभिनय का प्रशिक्षण लिया। बाद में पुणे स्थित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान से भी छोटा प्रशिक्षण लिया।

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फिल्म देखकर परिवार की आंखों में आ गए आंसू

‘हनुमान अंश’ में शोभिनव का अभिनय उनके परिवार के लिए भी बेहद खास रहा। उनके पिता शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी मां शिक्षिका रही हैं। उनकी एक छोटी बहन भी है।

जब परिवार ने फिल्म देखी तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। हालांकि, बाद में एक साक्षात्कार के दौरान परिवार ने शोभिनव की मजाकिया अंदाज में खूब खिंचाई भी की। उन्होंने हंसते हुए कहा कि ये आंसू बाबा के लिए थे, शोभिनव के लिए नहीं।

10 साल के इंतजार का मिला फल

आज ‘हनुमान अंश’ शोभिनव सत्या के लिए सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं है, बल्कि यह उनके 10 साल के इंतजार और मेहनत का नतीजा भी है।

जिस अभिनेता ने छोटी-मोटी भूमिकाओं से समझौता नहीं किया और सही मौके का इंतजार किया, उसे आखिरकार ऐसा किरदार मिला जिसने उसे बड़ी पहचान दिला दी।

फिल्म ने शोभिनव को अचानक सुर्खियों में जरूर ला दिया है, लेकिन उनकी सोच अब भी वही है। वह अपनी निजी जिंदगी को चर्चा से दूर रखकर सिर्फ अपने काम और अभिनय के जरिए पहचान बनाना चाहते हैं।

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