अलविदा पहलाज निहलानी! 76 वर्ष की उम्र में दिग्गज फिल्म निर्माता का निधन, गोविंदा को दिया था पहला ब्रेक

अलविदा पहलाज निहलानी! 76 वर्ष की उम्र में दिग्गज फिल्म निर्माता का निधन, गोविंदा को दिया था पहला ब्रेक
भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अनुभवी फिल्म निर्माता, डिस्ट्रीब्यूटर और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का गुरुवार को मुंबई में निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निहलानी पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और मुंबई के नानावती अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड और सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। निहलानी हिंदी सिनेमा के कमर्शियल फ़िल्म जगत में एक जाना-माना नाम थे। चार दशकों से ज़्यादा लंबे अपने करियर में, वे कई मुख्यधारा की फ़िल्मों से जुड़े रहे, जिनमें ‘हथकड़ी’, ‘इल्ज़ाम’, ‘शोला और शबनम’, ‘आँखें’, ‘दिल तेरा दीवाना’, ‘तलाश’, ‘जूली 2’ और ‘रंगीला राजा’ शामिल हैं।
 

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उनकी 1986 की फ़िल्म ‘इल्ज़ाम’ से गोविंदा ने डेब्यू किया था, जबकि ‘आग ही आग’ से चंकी पांडे को पहचान मिली। निहलानी शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेंद्र, गोविंदा, चंकी पांडे और दिव्या भारती जैसे अभिनेताओं वाली फ़िल्मों से भी जुड़े रहे। जनवरी 2015 में, निहलानी को CBFC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। वे अगस्त 2017 तक इस पद पर रहे, जिसके बाद प्रसून जोशी ने उनकी जगह ली।
 

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सर्टिफ़िकेशन संस्था में उनका कार्यकाल काफ़ी विवादों में रहा। उनके कार्यकाल के दौरान ‘उड़ता पंजाब’, ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ और ‘इंदु सरकार’ जैसी कई फ़िल्मों को सर्टिफ़िकेशन में देरी, कट लगाने के सुझाव या सार्वजनिक बहस का सामना करना पड़ा।
निहलानी अक्सर सर्टिफ़िकेशन नियमों और कंटेंट, संस्कृति तथा सार्वजनिक प्रदर्शन से जुड़ी चिंताओं का हवाला देकर CBFC के फ़ैसलों का बचाव करते थे। हालाँकि, उनके कार्यकाल को फ़िल्म निर्माताओं और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की कड़ी आलोचना का भी सामना करना पड़ा, जिनका तर्क था कि बोर्ड सर्टिफ़िकेशन से हटकर सेंसरशिप की ओर बढ़ रहा है।
CBFC में अपने कार्यकाल से पहले, निहलानी कई वर्षों तक ‘एसोसिएशन ऑफ़ मोशन पिक्चर्स एंड टीवी प्रोग्राम प्रोड्यूसर्स’ के अध्यक्ष भी रहे थे। CBFC छोड़ने के बाद भी, निहलानी फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखते थे और अक्सर 1980 और 1990 के दशक के अभिनेताओं तथा फ़िल्म निर्माताओं के साथ अपने काम के बारे में बात करते थे।

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