राजसमंद कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के दौरान तकनीकी खामियों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऑनलाइन मैसेज के आधार पर किसान मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें कम तौल या फसल विवरण में गड़बड़ी की जानकारी मिल रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान और अतिरिक्त किराया उठाना पड़ रहा है। किराए का नुकसान उठाना पड़ रहा
किसानों का आरोप है कि रजिस्ट्रेशन और मैसेज में जितनी मात्रा दिखाई जाती है, मंडी में उससे कम गेहूं खरीदा जा रहा है। कई किसानों को मजबूरी में अपना माल वापस ले जाना पड़ रहा है। किसान जगदीश ने बताया कि उन्हें 60 क्विंटल गेहूं खरीद का मैसेज मिला था। इसी भरोसे वे मंडी पहुंचे, लेकिन वहां केवल 23 क्विंटल तौलने की बात कही गई। अब बाकी गेहूं वापस ले जाने में 5 से 6 हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। मोही निवासी लक्ष्मी लाल तेली ने बताया कि उन्हें 38 क्विंटल गेहूं खरीद का मैसेज मिला था, लेकिन मंडी पहुंचने पर पता चला कि गिरदावरी रिपोर्ट में गेहूं की जगह सरसों दर्ज है। ऐसे में वे परेशान हैं कि अब समस्या का समाधान कैसे होगा। 24 हजार क्विंटल खरीद का लक्ष्य
मंडी के हैंडलिंग एजेंट नीरज अग्रवाल ने बताया कि 16 मार्च से खरीद शुरू हुई है। अब तक करीब 3 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है, जबकि 24 हजार क्विंटल का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कुंवारिया क्षेत्र के किसानों को गिरदावरी और खाता संख्या में त्रुटियों के कारण परेशानी आ रही है। सरकार के निर्देशानुसार 50 फीसदी तक बिना चमक वाले गेहूं की भी खरीद की जा रही है। 2735 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 31 मई तक खरीद जारी रहेगी। एसडीएम ब्रजेश गुप्ता ने कहा कि गिरदावरी और खसरा संख्या से जुड़ी त्रुटियों को लेकर अधिकारियों से बात की गई है। जल्द ही समाधान निकाला जाएगा। गेहूं के बजाय राई का मैसेज मिलने वाले किसानों की समस्या भी प्राथमिकता से सुलझाई जाएगी।


