झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान शुरू हो गई है। विधानसभा के संख्या बल के हिसाब से एक सीट पर झामुमो की जीत लगभग तय है। जबकि दूसरी सीट पर अब तक कांग्रेस अपना स्वाभाविक दावा मान कर चल रही थी। लेकिन, अब भाकपा-माले ने इस दूसरी सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विधानसभा में महज दो विधायक होने के बावजूद भाकपा-माले ने गठबंधन में अपनी वफादारी और अहम भूमिका का हवाला देते हुए अपने वरिष्ठ नेता और तीन बार के पूर्व विधायक विनोद सिंह को राज्यसभा भेजने की मांग की है। हम मजबूत सिपाही, हमें मिले मौका चेन्नई में पार्टी की केंद्रीय कमेटी की बैठक में हिस्सा लेने गए भाकपा-माले के प्रदेश सचिव मनोज भक्त ने कहा कि एक सीट पर झामुमो अपना प्रत्याशी उतारे और दूसरी सीट भाकपा-माले को दे। उन्होंने कहा कि भाकपा माले महागठबंधन का एक मजबूत सिपाही है। हर मोर्चे पर साथ खड़ी रही है। विनोद सिंह के नाम पर झामुमो, कांग्रेस और राजद को एकमत होकर समर्थन देना चाहिए। इसी में झारखंड का हित है। आधिकारिक निर्णय पर उन्होंने कहा कि चेन्नई से रांची लौटने के बाद पार्टी की बैठक होगी। फिलहाल उनके लिए सभी विकल्प खुले हैं। यहां भावनाएं नहीं, संख्या बल देखा जाता है भाकपा-माले का यह प्रस्ताव महागठबंधन के अन्य दलों के गले नहीं उतर रहा है। झामुमो और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने अनौपचारिक रूप से इसे अव्यावहारिक करार दिया है। उनका साफ कहना है कि राज्यसभा चुनाव जैसे अहम मौकों पर भावनाएं नहीं, बल्कि विधायकों का संख्या बल काम आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या माले बिगाड़ सकती है गठबंधन का खेल? भले ही माले के पास सिर्फ 2 विधायक हैं, लेकिन अगर उन्होंने वोटिंग से दूरी बनाई, तो महागठबंधन के दूसरे प्रत्याशी की राह मुश्किल हो सकती है। ऐसे समझें चुनावी गणित एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 28 विधायकों के वोट की जरूरत है। महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं (28+28=56), यानी दो सीटों के लिए एकदम सटीक आंकड़ा। अगर माले के दोनों 2. विधायक अनुपस्थित रहे, तो यह आंकड़ा घटकर 54 रह जाएगा और दूसरी सीट पर जीत के लिए क्रॉस वोटिंग या दूसरी वरीयता के वोटों पर निर्भर रहना पड़ेगा। भाकपा माले के वर्तमान में दो विधायक हैं। निरसा विधानसभा से अरूप चटर्जी और सिंदरी विधानसभा से चंद्रदेव महतो। ———————————————————– इसे भी पढ़ें.… राज्यसभा चुनाव; JMM-कांग्रेस के बीच मंथन:कांग्रेसी बोले- सीएम हाउस की पसंद का हो उम्मीदवार, सीएम ने दो दिन का समय मांगा झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई हैं। इंडिया गठबंधन ने अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है। महागठबंधन दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। इसी सिलसिले में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीएम हाउस में मुलाकात की। बैठक में प्रदेश सह प्रभारी सिरी बेला प्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी मौजूद रहे। करीब दो घंटे चली इस अहम बैठक में सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान कांग्रेस ने साफ तौर पर एक सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर दी, जिससे गठबंधन के भीतर समीकरणों को लेकर हलचल बढ़ गई है। यहां पढ़ें पूरी खबर… झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान शुरू हो गई है। विधानसभा के संख्या बल के हिसाब से एक सीट पर झामुमो की जीत लगभग तय है। जबकि दूसरी सीट पर अब तक कांग्रेस अपना स्वाभाविक दावा मान कर चल रही थी। लेकिन, अब भाकपा-माले ने इस दूसरी सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विधानसभा में महज दो विधायक होने के बावजूद भाकपा-माले ने गठबंधन में अपनी वफादारी और अहम भूमिका का हवाला देते हुए अपने वरिष्ठ नेता और तीन बार के पूर्व विधायक विनोद सिंह को राज्यसभा भेजने की मांग की है। हम मजबूत सिपाही, हमें मिले मौका चेन्नई में पार्टी की केंद्रीय कमेटी की बैठक में हिस्सा लेने गए भाकपा-माले के प्रदेश सचिव मनोज भक्त ने कहा कि एक सीट पर झामुमो अपना प्रत्याशी उतारे और दूसरी सीट भाकपा-माले को दे। उन्होंने कहा कि भाकपा माले महागठबंधन का एक मजबूत सिपाही है। हर मोर्चे पर साथ खड़ी रही है। विनोद सिंह के नाम पर झामुमो, कांग्रेस और राजद को एकमत होकर समर्थन देना चाहिए। इसी में झारखंड का हित है। आधिकारिक निर्णय पर उन्होंने कहा कि चेन्नई से रांची लौटने के बाद पार्टी की बैठक होगी। फिलहाल उनके लिए सभी विकल्प खुले हैं। यहां भावनाएं नहीं, संख्या बल देखा जाता है भाकपा-माले का यह प्रस्ताव महागठबंधन के अन्य दलों के गले नहीं उतर रहा है। झामुमो और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने अनौपचारिक रूप से इसे अव्यावहारिक करार दिया है। उनका साफ कहना है कि राज्यसभा चुनाव जैसे अहम मौकों पर भावनाएं नहीं, बल्कि विधायकों का संख्या बल काम आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या माले बिगाड़ सकती है गठबंधन का खेल? भले ही माले के पास सिर्फ 2 विधायक हैं, लेकिन अगर उन्होंने वोटिंग से दूरी बनाई, तो महागठबंधन के दूसरे प्रत्याशी की राह मुश्किल हो सकती है। ऐसे समझें चुनावी गणित एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 28 विधायकों के वोट की जरूरत है। महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं (28+28=56), यानी दो सीटों के लिए एकदम सटीक आंकड़ा। अगर माले के दोनों 2. विधायक अनुपस्थित रहे, तो यह आंकड़ा घटकर 54 रह जाएगा और दूसरी सीट पर जीत के लिए क्रॉस वोटिंग या दूसरी वरीयता के वोटों पर निर्भर रहना पड़ेगा। भाकपा माले के वर्तमान में दो विधायक हैं। निरसा विधानसभा से अरूप चटर्जी और सिंदरी विधानसभा से चंद्रदेव महतो। ———————————————————– इसे भी पढ़ें.… राज्यसभा चुनाव; JMM-कांग्रेस के बीच मंथन:कांग्रेसी बोले- सीएम हाउस की पसंद का हो उम्मीदवार, सीएम ने दो दिन का समय मांगा झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई हैं। इंडिया गठबंधन ने अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है। महागठबंधन दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। इसी सिलसिले में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीएम हाउस में मुलाकात की। बैठक में प्रदेश सह प्रभारी सिरी बेला प्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी मौजूद रहे। करीब दो घंटे चली इस अहम बैठक में सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान कांग्रेस ने साफ तौर पर एक सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर दी, जिससे गठबंधन के भीतर समीकरणों को लेकर हलचल बढ़ गई है। यहां पढ़ें पूरी खबर…


