Gen Z Tanmaxxing Trend: आजकल के युवाओं यानी जेन-जी (Gen Z) में सुंदर और चमकती त्वचा पाने का एक अलग ही भूत सवार है। अपनी स्किन को अच्छा दिखाने के चक्कर में ये युवा सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड का शिकार हो रहे हैं, जिसे टैनमैक्सिंग (Tanmaxxing) कहा जा रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में स्किन एक्सपर्ट्स ने इस ट्रेंड पर कहा है कि यह शौक स्किन केंसर को बुलावा दे रहा है।
क्या है टैनमैक्सिंग ट्रेंड ?
टैनमैक्सिंग वाले युवा अपनी त्वचा पर एक खास तरह की चमक और सांवलापन (टैन लुक) चाहते हैं। इसके लिए वे पार्लर में जाकर टैनिंग बेड्स का इस्तेमाल करते हैं, जहां से निकलने वाली किरणें त्वचा को सांवला बना देती हैं यही है टैनमैक्सिंग ट्रेंड। डॉक्टरों का कहना है कि इस ट्रेंड को बहुत ज्यादा नॉर्मल या आम बात बनाकर दिखाया जा रहा है।
प्लूटोनियम जितना हानिकारक है ये शौक
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के प्रेसिडेंट मुराद आलम के अनुसार, सुरक्षित टैनिंग जैसी कोई चीज होती ही नहीं है। आप जब भी अपनी स्किन को टैन करते हैं, तो आपकी त्वचा का डीएनए (DNA) डैमेज हो रहा होता है। इस तरह इनडोर टैनिंग करना सेहत के लिए एस्बेस्टस और प्लूटोनियम जैसे कैंसर पैदा करने वाले तत्व के बराबर है। कम उम्र में टैनिंग बेड्स का ज्यादा इस्तेमाल करने से मेलेनोमा (Melanoma) नाम के स्किन कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के आंकड़ें निम्न हैं,
- 18 से 29 साल के युवाओं में से केवल 25% लोग ही ऐसे हैं जिन्हें स्किन कैंसर होने का थोड़ा बहुत डर है।
- करीब 20% युवाओं का मानना है कि कैंसर से बचने से ज्यादा जरूरी उनके लिए शरीर पर टैन लुक लाना है।
- इस लापरवाही की सबसे बड़ी वजह सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियां (Misinformation) हैं।
क्या कहते है विशेषज्ञ?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) डॉ. ब्रुक जेफी ने खुद अपनी किशोरावस्था के दिनों में एक टैनिंग सैलून में काम किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर युवाओं को आगाह करते हुए कहा है कि टैनिंग बेड ((Tanning Bed) से निकलने वाली किरणें कैंसर पैदा करने वाले वाले तत्वों के बराबर हैं।
डॉक्टरों का साफ कहना है कि अगर कोई इंसान 35 साल की उम्र से पहले इन टैनिंग बेड्स का इस्तेमाल शुरू कर देता है, तो उसमें सबसे स्किन कैंसर यानी मेलेनोमा होने का खतरा 75 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इसलिए सुंदर दिखने के चक्कर में इतनी कम उम्र में ऐसा जोखिम लेना सीधे-सीधे मौत को गले लगाने जैसा है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


