गंगा दशहरा: पटना के घाटों पर रहेगी भीड़:हस्त नक्षत्र, वज्र योग और रवियोग का बन रहा संयोग, मान्यता-स्नान और दान करने से मिलता पुण्य

गंगा दशहरा: पटना के घाटों पर रहेगी भीड़:हस्त नक्षत्र, वज्र योग और रवियोग का बन रहा संयोग, मान्यता-स्नान और दान करने से मिलता पुण्य

आज गंगा दशहरा मनाई जाएगी। गंगा दशहरा पर उत्तरफाल्गुनी और हस्त नक्षत्र के साथ वज्र योग और रवियोग का संयोग बन रहा है। ग्रह- गोचरों के उत्तम संयोग होने से इस पर्व की महत्ता और बढ़ गयी है। वराह पुराण के अनुसार, इसी दिन धरती पर वृष लग्न और हस्त नक्षत्र में मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा पृथ्वी पर शुध्दता और संपन्नता लेकर आयी थी। प्रभु श्रीराम ने रामेश्वरम में इसी दिन शिवलिंग की स्थापना की थी। कुंडली में चंद्र दोष वाले जातकों को इस दिन शिव की पूजा-अर्चना करना उत्तम रहेगा। गंगा में स्नान से महापातकों से मिलेगी मुक्ति ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने स्कन्द पुराण के हवाले से बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को संवत्सरमुखी की संज्ञा दी गई है। इसमें स्नान और दान बहुत ही पुण्यप्रद माना गया है। स्मृति ग्रंथ के मुताबिक गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान और दान करने से दस महापातकों के बराबर के पापों से मुक्ति मिलती है। भविष्य पुराण के मुताबिक गंगा दशहरा के दिन स्नान, पूजा के बाद “ॐ नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः” का दस बार जप करने से कर्ज तथा कलंक के दोष से मुक्ति और अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है। 10 दीपों को दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है ज्योतिषी झा ने वराह और शिव पुराण का हवाला देते हुए बताया कि गंगा दशहरा के दिन सत्तू, पंखा, ऋतुफल, सुपाड़ी, गुड़, जल युक्त घड़ा के दान से आरोग्यता, समृद्धि और वंश वृद्धि का वरदान मिलता है। इस दिन स्नान के बाद दस दीपों को दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा ध्यान व स्नान से काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल, कपट, परनिंदा जैसे पापों से मुक्ति होती है। इस मंत्र से करें मां गंगा की आराधना नमो भगवते दशपापहराये गंगाये नारायण्ये रेवत्ये I शिवाये दक्षाये अमृताये विश्वरुपिण्ये नंदिन्ये ते नमो नम: II अर्थात – हे भगवती, दसपाप हरने वाली गंगा, नारायणी, रेवती, शिव, दक्षा, अमृता, विश्वरूपिणी, नंदनी को मेरा नमन। गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त शाही स्नान- सुबह 05:01 बजे से 06:21 बजे तक सामान्य स्नान- प्रातः 05:01 बजे से पूरे दिन गुली काल मुहूर्त: दोपहर 11:47 बजे से 01:28 बजे तक चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 08:24 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:20 बजे से 12:14 बजे तक आज गंगा दशहरा मनाई जाएगी। गंगा दशहरा पर उत्तरफाल्गुनी और हस्त नक्षत्र के साथ वज्र योग और रवियोग का संयोग बन रहा है। ग्रह- गोचरों के उत्तम संयोग होने से इस पर्व की महत्ता और बढ़ गयी है। वराह पुराण के अनुसार, इसी दिन धरती पर वृष लग्न और हस्त नक्षत्र में मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा पृथ्वी पर शुध्दता और संपन्नता लेकर आयी थी। प्रभु श्रीराम ने रामेश्वरम में इसी दिन शिवलिंग की स्थापना की थी। कुंडली में चंद्र दोष वाले जातकों को इस दिन शिव की पूजा-अर्चना करना उत्तम रहेगा। गंगा में स्नान से महापातकों से मिलेगी मुक्ति ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने स्कन्द पुराण के हवाले से बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को संवत्सरमुखी की संज्ञा दी गई है। इसमें स्नान और दान बहुत ही पुण्यप्रद माना गया है। स्मृति ग्रंथ के मुताबिक गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान और दान करने से दस महापातकों के बराबर के पापों से मुक्ति मिलती है। भविष्य पुराण के मुताबिक गंगा दशहरा के दिन स्नान, पूजा के बाद “ॐ नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः” का दस बार जप करने से कर्ज तथा कलंक के दोष से मुक्ति और अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है। 10 दीपों को दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है ज्योतिषी झा ने वराह और शिव पुराण का हवाला देते हुए बताया कि गंगा दशहरा के दिन सत्तू, पंखा, ऋतुफल, सुपाड़ी, गुड़, जल युक्त घड़ा के दान से आरोग्यता, समृद्धि और वंश वृद्धि का वरदान मिलता है। इस दिन स्नान के बाद दस दीपों को दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा ध्यान व स्नान से काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल, कपट, परनिंदा जैसे पापों से मुक्ति होती है। इस मंत्र से करें मां गंगा की आराधना नमो भगवते दशपापहराये गंगाये नारायण्ये रेवत्ये I शिवाये दक्षाये अमृताये विश्वरुपिण्ये नंदिन्ये ते नमो नम: II अर्थात – हे भगवती, दसपाप हरने वाली गंगा, नारायणी, रेवती, शिव, दक्षा, अमृता, विश्वरूपिणी, नंदनी को मेरा नमन। गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त शाही स्नान- सुबह 05:01 बजे से 06:21 बजे तक सामान्य स्नान- प्रातः 05:01 बजे से पूरे दिन गुली काल मुहूर्त: दोपहर 11:47 बजे से 01:28 बजे तक चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 08:24 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:20 बजे से 12:14 बजे तक  

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