प्रयागराज में भारतीय सेना की नॉर्दर्न और सेंट्रल कमांड की ओर से आयोजित नॉर्थ टेक सिंपोजियम में भविष्य की युद्ध तकनीकों और आधुनिक सैन्य उपकरणों का दम देखने को मिला। देश की कई डिफेंस कंपनियों ने ऐसे अत्याधुनिक हथियार, ड्रोन, सुरक्षा सिस्टम और सैन्य वाहन प्रदर्शित किए, जो आने वाले समय में भारतीय सेना के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकते हैं।
सिंपोजियम में यह साफ नजर आया कि आधुनिक युद्ध अब केवल मैन्युअल ताकत का नहीं, बल्कि एडवांस तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट सर्विलांस और हाईटेक हथियारों का होगा। प्रदर्शनी में मॉडर्न सर्विलांस सिस्टम, एडवांस ड्रोन, एंटी ड्रोन सिस्टम, रोबोटिक्स, सिम्युलेटर, स्पेशल व्हीकल, नाइट विजन डिवाइस (NVDs), इंडिविजुअल प्रोटेक्शन सिस्टम और स्पेशल ऑपरेशन से जुड़े उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
50 किलो वजन ले जाने वाला स्वदेशी लॉजिस्टिक ड्रोन
भारत इलेक्ट्रिकल्स की ओर से प्रदर्शित लॉजिस्टिक ड्रोन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। यह ड्रोन 50 किलो तक सामान ले जाने में सक्षम है। इसकी उड़ान क्षमता 10 किलोमीटर तक है और यह 5000 मीटर की ऊंचाई तक ऑपरेट कर सकता है।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि 50 किलोग्राम लॉजिस्टिक क्षमता वाला यह देश का पहला स्वदेशी निर्मित ड्रोन है। युद्ध जैसी परिस्थितियों में यह सेना तक हथियार, मेडिकल सप्लाई और जरूरी सामग्री पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है।
मल्टी ऑपरेशन कॉम्बैट व्हीकल ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी में बिलराइस कंपनी की ओर से मल्टी मिशन कॉम्बैट व्हीकल भी पेश किया गया। इसकी खासियत यह है कि इसमें लॉजिस्टिक्स के साथ कई आधुनिक सैन्य समाधान एक साथ उपलब्ध हैं।
कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक इस वाहन में एंटी ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई और एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम लगाया गया है। यह अलग-अलग सैन्य अभियानों में मल्टी ऑपरेशन सॉल्यूशन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
हार्ड किल फीचर वाला एंटी ड्रोन सिस्टम
जेन टेक्नोलॉजी की ओर से हार्ड किल फीचर से लैस अत्याधुनिक एंटी ड्रोन सिस्टम भी प्रदर्शित किया गया। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि यह देश का पहला स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम है, जिसमें हार्ड किल तकनीक दी गई है।
अब तक इस्तेमाल होने वाले अधिकतर एंटी ड्रोन सिस्टम केवल सॉफ्ट किल फीचर पर आधारित थे। वे घुसपैठ करने वाले ड्रोन का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने की कोशिश करते थे और जरूरत पड़ने पर अलग से मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता था।
नई हार्ड किल तकनीक वाला यह सिस्टम घुसपैठिए ड्रोन को सिर्फ डिटेक्ट ही नहीं करता, बल्कि उसे सीधे टारगेट कर नष्ट भी कर सकता है। इससे सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा और मजबूत होने की उम्मीद है।
आईईडी ब्लास्ट से सुरक्षा देने वाला सैन्य वाहन
टाटा मोटर्स की ओर से एक अत्याधुनिक स्पेशल यूटिलिटी मिलिट्राइज्ड व्हीकल भी प्रदर्शित किया गया। यह वाहन आईईडी ब्लास्ट और बैलिस्टिक हमलों के दौरान सैनिकों को सुरक्षा देने में सक्षम है।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि यह वाहन हाई ग्रेड ब्लास्ट के साथ-साथ AK-56 और AK-47 जैसे स्मॉल आर्म्स से होने वाले हमलों का भी सामना कर सकता है। इसकी मजबूत सुरक्षा प्रणाली भीतर बैठे सैनिकों को सुरक्षित रखने में मदद करती है।
यह सैन्य वाहन जमीन पर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता है, जबकि पानी में भी करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से ऑपरेट कर सकता है। व्हीकल में मॉडर्न कम्युनिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस तकनीक और रूफ माउंटेड वेपन सिस्टम लगाया गया है। इस पर मशीन गन भी फिट की जा सकती है।
छोटी लेकिन बेहद घातक लाइट मशीन गन
प्रदर्शनी में ट्रिपल एस डिफेंस की ओर से अत्याधुनिक स्मॉल आर्म्स और लाइट मशीन गन भी प्रदर्शित की गईं। आकार में छोटी लेकिन क्षमता में बेहद ताकतवर इन हथियारों को लेकर कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया कि ये कुछ ही सेकेंड में दुश्मन को मार गिराने में सक्षम हैं।
कंपनी के अनुसार इन आधुनिक हथियारों को तेज कार्रवाई और क्लोज कॉम्बैट ऑपरेशन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
ट्रिपल एस डिफेंस के स्टॉल पर थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीजी टेक्निकल सर्विसेज नवीन अरोड़ा भी पहुंचे। उन्होंने हथियारों की विशेषताओं और तकनीकी क्षमता के बारे में जानकारी ली।
एक्सट्रीम कंडीशंस में जवानों की मदद करेगा रोबोटिक सूट
प्रदर्शनी में एक अत्याधुनिक रोबोटिक सूट भी आकर्षण का केंद्र बना। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक यह सूट सैनिकों को एक्सट्रीम परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करने और ऑपरेशन चलाने में मदद करेगा।
यह रोबोटिक सूट सैनिकों की मांसपेशियों की गतिविधि को सेंसर के जरिए पहचानता है और मोटर चालित एक्ट्यूएटर्स की मदद से उनकी ताकत बढ़ाने का काम करता है। यह एक कृत्रिम मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम की तरह कार्य करता है।
सूट की मदद से सैनिक 500 पाउंड तक भारी वजन आसानी से उठा सकते हैं। यह तकनीक भारी भार को सैनिक की पीठ से जमीन की ओर ट्रांसफर कर देती है, जिससे शरीर पर तनाव और थकान कम होती है और सैनिकों की गतिशीलता बढ़ती है।
एडवांस एज सैन्य वाहनों और यूएवी तकनीक का प्रदर्शन
सिंपोजियम में पोलारिस इंडिया की ओर से एक्सक्लूसिव मिलिट्री व्हीकल्स का प्रदर्शन किया गया। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की ओर से आधुनिक अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) और अन्य रक्षा उपकरण प्रदर्शित किए गए। इसके अलावा कई अन्य कंपनियों ने भी अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों और उपकरणों का प्रदर्शन किया। इन तकनीकों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भारत का डिफेंस सिस्टम आने वाले समय में दुनिया के सबसे आधुनिक रक्षा तंत्र वाले देशों में शामिल हो सकता है। रोबोटिक डॉग ने खींचा सबका ध्यान प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा ध्यान एआई आधारित रोबोटिक डॉग ने खींचा। चार पैरों वाला यह रोबोटिक इनोवेशन लॉजिस्टिक्स के साथ-साथ सर्विलांस का भी सॉल्यूशन है। इसे बनाने वाली कंपनी के अफसरों ने दावा किया कि खासतौर से टफ टिरेन या टेरिटरी में यह सैन्य टुकड़ियों के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है। यह 360 डिग्री के हाई डेफिनेशन एवं नाइट विजन फीचर वाले कैमरों से लैस एक ऐसा आविष्कार है जो कई किमी दूर तक और अंधेरे में भी सर्विलांस सिस्टम साल्यूशन प्रोवाइड कर सकता है। 20 मिनट में तैयार होगा बेली ब्रिज
प्रदर्शनी में ब्रिस्क ऑलिव कंपनी की ओर से बेली ब्रिज का प्रदर्शन किया गया। इसे शॉर्ट स्पैन ब्रिज भी कहते हैं। अभी सेना के पास 5, 10 व 15 मीटर के शॉर्ट स्पैन ब्रिज हैं लेकिन यह ब्रिज 50 मीटर लंबा है। कंपनी के एक्सपर्ट्स ने बताया कि हाई मोबैलिटी वाहनों पर आसानी से कैरी किए जा सकने वाले यह ब्रिज एल्युमिनियम अलॉय के बने होते हैं। युद्ध के समय या रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान क्षतिग्रस्त ब्रिज या रास्ते पर आसानी से कुछ ही समय के भीतर इसे बिछाकर सैनिकों के मूवमेंट को आसान बनाया जा सकता है।
आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक पर फोकस
नॉर्थ टेक सिंपोजियम में प्रदर्शित आधुनिक सैन्य तकनीकों ने यह संकेत दिया कि भारत तेजी से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अफसरों ने बताया कि स्वदेशी तकनीक से तैयार ये आधुनिक उपकरण भविष्य में भारतीय सेना को और अधिक मजबूत, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाएंगे।


