पीलीभीत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। यहां के जिला महिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में पिछले 24 घंटों के भीतर चार नवजातों की मौत हो गई। मृत शिशुओं में से कुछ जन्मजात विकृति से पीड़ित थे, जबकि कुछ का वजन सामान्य से बहुत कम था या उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। इस घटना से स्वास्थ्य प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, बरेली निवासी प्रियंका के सात दिन के नवजात को गंभीर ट्रेकियो-इसोफेजियल एनोमली थी। डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि बच्चे की भोजन और श्वास नली आपस में जुड़ी हुई थी, जिससे दूध फेफड़ों में जा रहा था। बच्चे को लखनऊ रेफर किया गया था, लेकिन परिजनों की आर्थिक तंगी के कारण वे उसे ले जा नहीं सके, जिसके बाद बच्चे की मौत हो गई। सोमवती और सुमन देवी के नवजातों का जन्म महिला अस्पताल में हुआ था। सोमवती का बच्चा कम वजन के कारण मृत पैदा हुआ, जबकि सुमन के बच्चे की श्वास नली में अवरोध था। एसएनसीयू ले जाते समय सुमन के बच्चे ने दम तोड़ दिया। ललौरीखेड़ा पीएचसी से रेफर होकर आए रीना के नवजात की भी मौत हो गई। जन्म के बाद बच्चा रोया नहीं था, जिससे उसके मस्तिष्क और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाई। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने बताया कि चारों मामले अत्यंत गंभीर थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो नवजात एसएनसीयू में भर्ती थे और दो अन्य महिला अस्पताल में पैदा हुए थे। डॉक्टरों के हर संभव प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका, क्योंकि उनमें से अधिकांश ‘हाई रिस्क’ श्रेणी के मामले थे। यह घटना जिले में प्रसव पूर्व देखभाल (Antenatal Care) और रेफरल सिस्टम की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है।


