Formula 1 की अफ्रीका में 33 साल बाद वापसी, Rwanda में होगा African Grand Prix

Formula 1 की अफ्रीका में 33 साल बाद वापसी, Rwanda में होगा African Grand Prix

दुनिया की सबसे बड़ी कार रेसिंग प्रतियोगिताओं में शामिल फॉर्मूला-1 की अफ्रीका में वापसी का रास्ता साफ हो गया है। करीब 33 साल के लंबे इंतजार के बाद अब रवांडा में इस प्रतियोगिता की रेस आयोजित की जाएगी। मंगलवार को हुए ऐलान के मुताबिक, रवांडा और फॉर्मूला-1 के बीच 10 साल का समझौता हुआ है। इसके तहत 2030 के दशक की शुरुआत से अफ्रीकी ग्रांड प्रीक्स को प्रतियोगिता के कैलेंडर में शामिल करने की तैयारी है। हालांकि, रेस शुरू होने से पहले नए ट्रैक और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण पूरा करना होगा।इस रेस का नाम अफ्रीकन ग्रांड प्रीक्स, प्रेजेंटेड बाय विजिट रवांडा रखा जाएगा। इसका आयोजन राजधानी किगाली से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण में बुगेसरा इलाके में किया जाएगा। यहां एक नया रेसिंग ट्रैक बनाया जाएगा, जिसके पास ही नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी तैयार किया जा रहा है। बता दें कि फॉर्मूला-1 ने आखिरी बार 1993 में दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग के पास स्थित कयालामी सर्किट पर रेस आयोजित की थी। इसके बाद से अफ्रीका प्रतियोगिता के आधिकारिक कैलेंडर से बाहर रहा है।फॉर्मूला-1 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टेफानो डोमेनिकाली ने रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे और अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल महासंघ के प्रमुख मोहम्मद बेन सुलेयम के साथ आयोजित कार्यक्रम में इसे अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि अगले दशक में रवांडा के शामिल होने से फॉर्मूला-1 दुनिया के सभी आबादी वाले महाद्वीपों तक पहुंच जाएगा। उनके मुताबिक, अफ्रीका में वापसी के लिए लंबे समय से सही साझेदार और स्थायी योजना की तलाश की जा रही थी।नए रेसिंग ट्रैक को ऑस्ट्रिया के पूर्व रेसर एलेक्स वुर्ज तैयार कर रहे हैं। इसके डिजाइन में फॉर्मूला-1 के ट्रैक बनाने के अनुभव वाले जर्मन वास्तुकार हरमन टिल्के की टीम भी शामिल है। इस ट्रैक को तेज रफ्तार और घुमावदार रास्तों के साथ तैयार करने की योजना है। इसमें ऊंचाई में कई बदलाव होंगे, जिससे रेस और रोमांचक बन सकती है। आयोजकों के मुताबिक, यहां दर्शकों को कारों के करीब से मुकाबला देखने का मौका मिलेगा।रवांडा विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीन-गाय अफ्रीका ने बताया कि ट्रैक में करीब 100,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। इसका इस्तेमाल सिर्फ रेसिंग के लिए नहीं, बल्कि पूरे साल संगीत कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और अन्य बड़े आयोजनों के लिए भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रवांडा का लक्ष्य केवल एक रेस आयोजित करना नहीं, बल्कि अफ्रीका में फॉर्मूला-1 की स्थायी वापसी सुनिश्चित करना है। इस परियोजना में निजी क्षेत्र की भूमिका अहम होगी, जबकि सरकार इसके कामकाज में तालमेल बनाएगी।गौरतलब है कि रवांडा ने 2 साल पहले ही फॉर्मूला-1 की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। इस समझौते को देश में पर्यटन, निवेश और रोजगार बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति पॉल कागामे ने कहा कि यह 10 साल की साझेदारी रवांडा के भविष्य में निवेश है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार, नए कौशल सीखने के अवसर और कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। उनके मुताबिक, इसका फायदा पूरे क्षेत्र को मिलेगा।इस वापसी का समर्थन 7 बार के विश्व चैंपियन लुईस हैमिल्टन भी करते रहे हैं। अब 41 साल के हैमिल्टन फेरारी टीम के लिए रेस करते हैं। उन्होंने सिंगापुर में हाल ही में कहा था कि अफ्रीका में ग्रांड प्रीक्स आयोजित करना जरूरी है और यह उनके लिए खास महत्व रखता है। फॉर्मूला-1 के मुताबिक, अफ्रीका में उसके 100 मिलियन से ज्यादा प्रशंसक हैं और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है।दक्षिण अफ्रीका भी केपटाउन या कयालामी में रेस आयोजित करने की संभावनाएं तलाश रहा है। वहां के खेल मंत्री गेइटन मैकेंजी ने कहा है कि रवांडा को मेजबानी मिलने के बावजूद दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 55 देशों वाले अफ्रीका में केवल एक ही देश को रेस मिलने की सोच सही नहीं है। फिलहाल फॉर्मूला-1 के कैलेंडर में 24 रेस होती हैं, इसलिए किसी नए आयोजन को शामिल करना आसान नहीं होगा।रवांडा ने 1994 के नरसंहार के बाद देश के पुनर्निर्माण और निवेश को बढ़ावा देने में प्रगति की है। हालांकि, राष्ट्रपति कागामे की सरकार पर आलोचकों के खिलाफ सख्ती और पड़ोसी कांगो में एम23 विद्रोही समूह का समर्थन करने के आरोप भी लगते रहे हैं। दूसरी ओर, विजिट रवांडा अभियान के जरिए देश ने खेलों में अपनी पहचान मजबूत की है। वहां 2025 की विश्व सड़क साइकिलिंग चैंपियनशिप भी आयोजित हुई थी। अब फॉर्मूला-1 की मेजबानी रवांडा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है। 

दुनिया की सबसे बड़ी कार रेसिंग प्रतियोगिताओं में शामिल फॉर्मूला-1 की अफ्रीका में वापसी का रास्ता साफ हो गया है। करीब 33 साल के लंबे इंतजार के बाद अब रवांडा में इस प्रतियोगिता की रेस आयोजित की जाएगी। मंगलवार को हुए ऐलान के मुताबिक, रवांडा और फॉर्मूला-1 के बीच 10 साल का समझौता हुआ है। इसके तहत 2030 के दशक की शुरुआत से अफ्रीकी ग्रांड प्रीक्स को प्रतियोगिता के कैलेंडर में शामिल करने की तैयारी है। हालांकि, रेस शुरू होने से पहले नए ट्रैक और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण पूरा करना होगा।

इस रेस का नाम अफ्रीकन ग्रांड प्रीक्स, प्रेजेंटेड बाय विजिट रवांडा रखा जाएगा। इसका आयोजन राजधानी किगाली से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण में बुगेसरा इलाके में किया जाएगा। यहां एक नया रेसिंग ट्रैक बनाया जाएगा, जिसके पास ही नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी तैयार किया जा रहा है। बता दें कि फॉर्मूला-1 ने आखिरी बार 1993 में दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग के पास स्थित कयालामी सर्किट पर रेस आयोजित की थी। इसके बाद से अफ्रीका प्रतियोगिता के आधिकारिक कैलेंडर से बाहर रहा है।

फॉर्मूला-1 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टेफानो डोमेनिकाली ने रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे और अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल महासंघ के प्रमुख मोहम्मद बेन सुलेयम के साथ आयोजित कार्यक्रम में इसे अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि अगले दशक में रवांडा के शामिल होने से फॉर्मूला-1 दुनिया के सभी आबादी वाले महाद्वीपों तक पहुंच जाएगा। उनके मुताबिक, अफ्रीका में वापसी के लिए लंबे समय से सही साझेदार और स्थायी योजना की तलाश की जा रही थी।

नए रेसिंग ट्रैक को ऑस्ट्रिया के पूर्व रेसर एलेक्स वुर्ज तैयार कर रहे हैं। इसके डिजाइन में फॉर्मूला-1 के ट्रैक बनाने के अनुभव वाले जर्मन वास्तुकार हरमन टिल्के की टीम भी शामिल है। इस ट्रैक को तेज रफ्तार और घुमावदार रास्तों के साथ तैयार करने की योजना है। इसमें ऊंचाई में कई बदलाव होंगे, जिससे रेस और रोमांचक बन सकती है। आयोजकों के मुताबिक, यहां दर्शकों को कारों के करीब से मुकाबला देखने का मौका मिलेगा।

रवांडा विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीन-गाय अफ्रीका ने बताया कि ट्रैक में करीब 100,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। इसका इस्तेमाल सिर्फ रेसिंग के लिए नहीं, बल्कि पूरे साल संगीत कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और अन्य बड़े आयोजनों के लिए भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रवांडा का लक्ष्य केवल एक रेस आयोजित करना नहीं, बल्कि अफ्रीका में फॉर्मूला-1 की स्थायी वापसी सुनिश्चित करना है। इस परियोजना में निजी क्षेत्र की भूमिका अहम होगी, जबकि सरकार इसके कामकाज में तालमेल बनाएगी।

गौरतलब है कि रवांडा ने 2 साल पहले ही फॉर्मूला-1 की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। इस समझौते को देश में पर्यटन, निवेश और रोजगार बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति पॉल कागामे ने कहा कि यह 10 साल की साझेदारी रवांडा के भविष्य में निवेश है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार, नए कौशल सीखने के अवसर और कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। उनके मुताबिक, इसका फायदा पूरे क्षेत्र को मिलेगा।

इस वापसी का समर्थन 7 बार के विश्व चैंपियन लुईस हैमिल्टन भी करते रहे हैं। अब 41 साल के हैमिल्टन फेरारी टीम के लिए रेस करते हैं। उन्होंने सिंगापुर में हाल ही में कहा था कि अफ्रीका में ग्रांड प्रीक्स आयोजित करना जरूरी है और यह उनके लिए खास महत्व रखता है। फॉर्मूला-1 के मुताबिक, अफ्रीका में उसके 100 मिलियन से ज्यादा प्रशंसक हैं और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है।

दक्षिण अफ्रीका भी केपटाउन या कयालामी में रेस आयोजित करने की संभावनाएं तलाश रहा है। वहां के खेल मंत्री गेइटन मैकेंजी ने कहा है कि रवांडा को मेजबानी मिलने के बावजूद दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 55 देशों वाले अफ्रीका में केवल एक ही देश को रेस मिलने की सोच सही नहीं है। फिलहाल फॉर्मूला-1 के कैलेंडर में 24 रेस होती हैं, इसलिए किसी नए आयोजन को शामिल करना आसान नहीं होगा।

रवांडा ने 1994 के नरसंहार के बाद देश के पुनर्निर्माण और निवेश को बढ़ावा देने में प्रगति की है। हालांकि, राष्ट्रपति कागामे की सरकार पर आलोचकों के खिलाफ सख्ती और पड़ोसी कांगो में एम23 विद्रोही समूह का समर्थन करने के आरोप भी लगते रहे हैं। दूसरी ओर, विजिट रवांडा अभियान के जरिए देश ने खेलों में अपनी पहचान मजबूत की है। वहां 2025 की विश्व सड़क साइकिलिंग चैंपियनशिप भी आयोजित हुई थी। अब फॉर्मूला-1 की मेजबानी रवांडा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है।

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