एमटीएफ बेगूसराय की ओर से उत्क्रमित मध्य विद्यालय महमदपुर में आयोजित पांच दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आज समापन हो गया। कार्यशाला के दौरान बच्चों को नाटक में संवाद बोलने की कला का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही बॉडी लैंग्वेज को बेहतर बनाने के लिए अंग संचालन का भी बच्चों ने अभ्यास किया। समापन के अवसर पर बच्चों ने मोबाइल की दुनिया नाटक का मंचन किया। नाटक के माध्यम से बच्चों को मैसेज दिया गया कि इसका उपयोग कब और कितना करना है। नाटक में सात और आठ क्लास की छात्रा दिव्या कुमारी, दुर्गा कुमारी, सोनाली कुमारी, सोनाक्षी कुमारी, करूणा कुमारी और शिवानी कुमारी ने भूमिका का निर्वाह किया। जबकि शिवानी, अनीका राज, करूणा और अंजली ने झिझिया और जट-जटिन नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया। निर्देशक और नाट्य प्रशिक्षक परवेज़ यूसुफ ने बताया कि गुरु-शिष्य परंपरा के तहत बच्चों में नाट्य कला सिखाने, उन्हें व्यवहार कुशल बनाने ौर उनके सर्वांगीण विकास के लिए नाट्य कला बहुत ही कारगर उपाय है। उन्होंने कहा कि आज का समय उपदेश का नहीं है, उन्हें खेल-खेल में व्यावहारिक शिक्षा देनी चाहिए। नाट्य कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक बौद्धिक (मानसिक) खेल भी है। जिसमें अपनी सोच, समझ, कल्पना और संवेदनाओं का उपयोग किया जाता है। बच्चों में उत्साह दिख रहा शिक्षक प्रवीण कुमार ने प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नाट्य कार्यशाला से हमारे विद्यालय के बच्चों को काफी लाभ मिला है, बच्चों में उत्साह दिख रहा है। विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय सिंह ने कहा कि बच्चों में अनुशासन और आत्मविश्वास के लिए कला शिक्षा आवश्यक है। एमटीएफ बेगूसराय की ओर से उत्क्रमित मध्य विद्यालय महमदपुर में आयोजित पांच दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आज समापन हो गया। कार्यशाला के दौरान बच्चों को नाटक में संवाद बोलने की कला का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही बॉडी लैंग्वेज को बेहतर बनाने के लिए अंग संचालन का भी बच्चों ने अभ्यास किया। समापन के अवसर पर बच्चों ने मोबाइल की दुनिया नाटक का मंचन किया। नाटक के माध्यम से बच्चों को मैसेज दिया गया कि इसका उपयोग कब और कितना करना है। नाटक में सात और आठ क्लास की छात्रा दिव्या कुमारी, दुर्गा कुमारी, सोनाली कुमारी, सोनाक्षी कुमारी, करूणा कुमारी और शिवानी कुमारी ने भूमिका का निर्वाह किया। जबकि शिवानी, अनीका राज, करूणा और अंजली ने झिझिया और जट-जटिन नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया। निर्देशक और नाट्य प्रशिक्षक परवेज़ यूसुफ ने बताया कि गुरु-शिष्य परंपरा के तहत बच्चों में नाट्य कला सिखाने, उन्हें व्यवहार कुशल बनाने ौर उनके सर्वांगीण विकास के लिए नाट्य कला बहुत ही कारगर उपाय है। उन्होंने कहा कि आज का समय उपदेश का नहीं है, उन्हें खेल-खेल में व्यावहारिक शिक्षा देनी चाहिए। नाट्य कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक बौद्धिक (मानसिक) खेल भी है। जिसमें अपनी सोच, समझ, कल्पना और संवेदनाओं का उपयोग किया जाता है। बच्चों में उत्साह दिख रहा शिक्षक प्रवीण कुमार ने प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नाट्य कार्यशाला से हमारे विद्यालय के बच्चों को काफी लाभ मिला है, बच्चों में उत्साह दिख रहा है। विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय सिंह ने कहा कि बच्चों में अनुशासन और आत्मविश्वास के लिए कला शिक्षा आवश्यक है।


