Choking: खाना खाते समय कई बार निवाला गले में अटक जाता है या बच्चे खेलते समय कोई छोटी चीज मुंह में डाल लेते हैं। इसे चोकिंग कहा जाता है। चोकिंग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है और गंभीर स्थिति में व्यक्ति कुछ ही समय में बेहोश हो सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि चोकिंग होने पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
चोकिंग के लक्षण क्या हैं
अमेरिकन रेड क्रॉस (American Red Cross) के अनुसार चोकिंग होने पर व्यक्ति घबराया हुआ दिखाई दे सकता है और अपने गले को हाथ से पकड़ सकता है। वह कमजोर तरीके से खांस सकता है या बिल्कुल खांस नहीं पाएगा। सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आ सकती है या बिल्कुल आवाज नहीं आ सकती। इसके साथ ही अगर सांस की नली पूरी तरह बंद हो जाए तो व्यक्ति बोल, रो या खांस नहीं पाता। इसके अलावा शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने पर त्वचा का रंग लाल से फीका या नीला पड़ सकता है।
1 साल से छोटे बच्चों के गले में चीज अटक जाए तो क्या करें?
ब्रिटिश रेड क्रॉस (British Red Cross) के अनुसार चोकिंग में 1 साल से छोटे बच्चे के लिए फर्स्ट एड का तरीका बड़े बच्चे और वयस्क से अलग होता है। अगर शिशु जोर से खांस या रो पा रहा है तो उसे खांसने या रोने दें और लगातार निगरानी रखें। अगर शिशु खांस, रो या सांस नहीं ले पा रहा है तो तुरंत मदद करें। इसके लिए सबसे पहले शिशु को अपनी बांह या जांघ पर पेट के बल इस तरह रखें कि उसका सिर शरीर से नीचे रहे और सिर तथा गर्दन को अच्छी तरह सहारा दें। इसके बाद पीठ पर दोनों कंधों के बीच हथेली से पांच बार जोर से थपथपाकर बैक ब्लो (Back Blow) दिए जाते हैं। अगर इससे रुकावट नहीं निकलती तो शिशु को पलटकर छाती पर चेस्ट थ्रस्ट दिए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर बैक ब्लो और चेस्ट थ्रस्ट का क्रम दोहराया जाता है और आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाई जाती है। ध्यान दें, 1 साल से छोटे शिशु में एब्डॉमिनल थ्रस्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
1 साल से लेकर टीनेजर बच्चे के लिए क्या करें
ब्रिटिश रेड क्रॉस (British Red Cross) के अनुसार अगर बच्चा जोर से खांस पा रहा है तो उसे खांसने के लिए कहें और अकेला न छोड़ें। अगर बच्चा बोल, रो या खांस नहीं पा रहा है तो तुरंत फर्स्ट एड शुरू करें। इसके लिए बच्चे को थोड़ा आगे की ओर झुकाएं और कंधों के बीच हथेली के निचले हिस्से से 5 बैक ब्लो दें। अगर इससे रुकावट दूर नहीं होती तो बच्चे के पीछे खड़े होकर 5 एब्डॉमिनल थ्रस्ट दें। इसके बाद जरूरत पड़ने पर 5 बैक ब्लो और 5 एब्डॉमिनल थ्रस्ट का क्रम दोहराएं। अगर बच्चा बेहोश हो जाए तो उसे सुरक्षित तरीके से जमीन पर लिटाकर अगर आपको आता है तो सीपीआर देने के साथ ही आपातकालीन मदद लें।
वयस्क के गले में चीज अटक जाए तो क्या करें
अमेरिकन रेड क्रॉस (American Red Cross) के अनुसार अगर व्यक्ति जोर से खांस पा रहा है तो उसे खांसते रहने के लिए कहें और उसकी निगरानी करें। अगर वह बोल, खांस या सांस नहीं ले पा रहा है तो तुरंत मदद करें। इसके लिए व्यक्ति को थोड़ा आगे झुकाकर कंधों के बीच 5 बैक ब्लो दें। अगर रुकावट दूर नहीं होती तो उसके पीछे खड़े होकर नाभि के ऊपर हाथ रखकर 5 एब्डॉमिनल थ्रस्ट दें। जरूरत पड़ने पर 5 बैक ब्लो और 5 एब्डॉमिनल थ्रस्ट का क्रम दोहराते रहें। व्यक्ति के बेहोश होने पर उसे जमीन पर लिटाकर सीपीआर दें। अमेरिकन रेड क्रॉस (American Red Cross) के अनुसार सीपीआर के दौरान मुंह खोलकर दिखाई देने वाली वस्तु को ही निकालना चाहिए। बिना देखे उंगली डालकर वस्तु निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
अगर व्यक्ति अकेले चोक हो जाए तो क्या करें
अमेरिकन रेड क्रॉस (American Red Cross) के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अकेले चोक हो जाए और बोल या सांस न ले पा रहा हो तो तुरंत आपातकालीन सहायता के लिए कॉल करना चाहिए। इसके बाद वह खुद को एब्डॉमिनल थ्रस्ट देने की कोशिश कर सकता है। इसके साथ ही अगर मुंह में वस्तु दिखाई नहीं दे रही है तो उंगली डालकर उसे निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे वस्तु और अंदर जा सकती है।
बार बार अटकती है तो नजरअंदाज न करें
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार हर बार खाना खाते समय खांसी या चोकिंग होना केवल सामान्य चोकिंग नहीं हो सकता। निगलने में परेशानी को डिस्फेजिया कहा जाता है। इसमें खाना या पानी निगलते समय खांसी या चोकिंग, खाना गले या छाती में अटका हुआ महसूस होना और खाने या पीने के बाद गीली या घरघराहट जैसी आवाज शामिल हो सकती है।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
नेशनल हेल्थ सर्विस के अनुसार अगर आपको, बच्चे को या किसी बुजुर्ग व्यक्ति को बार बार खाना या पानी निगलने में परेशानी होती है, खाते समय खांसी या चोकिंग होती है, खाना गले या छाती में अटका हुआ महसूस होता है, खाने के बाद आवाज गीली या घरघराहट जैसी हो जाती है या खाने के बाद सांस लेने में परेशानी होती है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

