सुल्तानपुर के कादीपुर तहसील में धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग महिला की मानसिक स्थिति का कथित तौर पर फायदा उठाकर उनकी संपत्ति का फर्जी वसीयतनामा तैयार कर हड़पने का आरोप है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश पर कोतवाली नगर में तीन नामजद अभियुक्तों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला कादीपुर थाना क्षेत्र के रायबीगो गांव से संबंधित है। वादी सतीश सिंह, जो स्वर्गीय वीरेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र हैं, ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। उन्होंने बताया कि उनके ताऊ महेंद्र प्रताप सिंह संतानहीन थे। उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी नगीना सिंह के नाम मकान और अन्य संपत्ति का नामांतरण हुआ था। पति के निधन के बाद नगीना सिंह की मानसिक स्थिति काफी खराब हो गई थी और वह अपना भला-बुरा समझने में असमर्थ थीं। आरोप है कि नगीना सिंह के चचेरे भाई सचिन सिंह ने अपने सहयोगियों जितेंद्र कश्यप और अशोक कुमार पाण्डेय के साथ मिलकर साजिश रची। 20 जून 2023 को सचिन सिंह, नगीना सिंह को इलाज के बहाने सुल्तानपुर ले गया। वहां, आरोपियों ने कथित तौर पर सांठ-गांठ कर एक फर्जी और कूट रचित वसीयतनामा तैयार करवाकर उसे पंजीकृत करवा लिया। उस समय नगीना सिंह वसीयत लिखने या उसकी शर्तों को समझने की स्थिति में नहीं थीं। वादी के अनुसार, नगीना सिंह का परिवार के प्रति हमेशा लगाव रहा था। उन्होंने बैंक लॉकर में अपनी वारिस के तौर पर वादी की पत्नी सुषमा का नाम दर्ज कराया था, जहां उनके वास्तविक हस्ताक्षर मौजूद हैं। जब वादी को इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई और उन्होंने फरवरी 2025 में सचिन सिंह से पूछताछ की, तो सचिन सिंह मारपीट और फौजदारी पर उतारू हो गया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस संबंध में कादीपुर थाने और कोतवाली नगर में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी को तत्काल मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए। न्यायालय के इसी आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस ने मामला पंजीकृत किया है।


