FDI नियमों में ढील के बाद चीन की आंशिक हिस्सेदारी वाले 4,895 करोड़ रुपये के 29 प्रस्ताव आए

FDI नियमों में ढील के बाद चीन की आंशिक हिस्सेदारी वाले 4,895 करोड़ रुपये के 29 प्रस्ताव आए

चीन की 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को मई में स्वचालित मार्ग से भारत में निवेश की अनुमति दिए जाने के बाद से अब तक करीब 4,895.65 करोड़ रुपये के 29 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्ताव सामने आए हैं। शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि 20 अगस्त, 2026 तक संशोधित व्यवस्था के तहत 29 एफडीआई निवेश की सूचना मिली है, जिनमें प्रस्तावित निवेश 4,895.65 करोड़ रुपये का है।

मई से पहले ऐसी कंपनियों में भारत के साथ जमीन सीमा साझा करने वाले किसी देश के व्यक्ति या कंपनी की मामूली हिस्सेदारी होने पर भी भारत में निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी। संबंधित पक्षों की मांग के बाद सरकार ने मई में एफडीआई संबंधी नियमों में बदलाव किया था। संशोधित व्यवस्था के तहत 10 प्रतिशत तक चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां उन क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग से निवेश कर सकती हैं, जहां क्षेत्रवार शर्तों के अधीन इस मार्ग से एफडीआई की अनुमति है।

हालांकि, यह छूट चीन, हांगकांग या भारत के साथ जमीन सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों पर लागू नहीं है। भारत के साथ जमीन सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमा और अफगानिस्तान शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत नियमों में बदलाव की अधिसूचना एक मई, 2026 को जारी की थी।

मंत्रालय ने बयान में कहा कि ये 29 निवेश प्रस्ताव सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा, सूचना एवं संचार, विनिर्माण, दवा, डेटा सेंटर और परिवहन सेवाओं समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं। निवेशकों या संबंधित इकाइयों का आधार मॉरीशस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और केमैन आइलैंड्स समेत विभिन्न क्षेत्रों में है। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित व्यवस्था से ऐसे मामलों में पहले से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत खत्म होने से भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह सुगम और तेज हुआ है।

इससे निवेशकों को अधिक निश्चितता मिली है, लेनदेन में लगने वाला समय कम हुआ है और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा मिला है। मंत्रालय ने कहा कि 2026 के प्रेस नोट 2 और इसके बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2019 में एक मई को अधिसूचित संशोधन के तहत लाभकारी स्वामित्व की जांच अब निवेशक इकाई के स्तर पर की जाती है। संबंधित जानकारी सरकार को देने के बाद निवेशक इकाई किसी अन्य मंजूरी के बिना स्वचालित मार्ग से निवेश कर सकती है।

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