Apple Pay in India: भारत में पेमेंट का तरीका बदलने आ रहा एप्पल, Face ID और NFC से मिलेगी हाई-टेक सुरक्षा

Apple Pay in India: भारत में पेमेंट का तरीका बदलने आ रहा एप्पल, Face ID और NFC से मिलेगी हाई-टेक सुरक्षा
भारत में डिजिटल पेमेंट की दुनिया में एप्पल पे की एंट्री को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक एप्पल की भुगतान सेवा अक्टूबर 2026 के आसपास भारत में शुरू हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो आईफोन यूजर्स को भुगतान के लिए एक नया विकल्प मिलेगा। हालांकि भारत में पहले से ही यूपीआई का इतना मजबूत नेटवर्क है कि एप्पल पे के लिए यहां अपनी अलग जगह बनाना आसान नहीं होगा।
बता दें कि एप्पल पे एप्पल की डिजिटल भुगतान सेवा है, जो मुख्य रूप से एनएफसी यानी नजदीकी संपर्क तकनीक के जरिए काम करती है। इसके तहत यूजर अपने एप्पल उपकरण को भुगतान मशीन के पास ले जाकर भुगतान कर सकता है। दुकानों, हवाई अड्डों और दूसरी जगहों पर उपलब्ध संपर्क रहित भुगतान मशीनों के जरिए यह सुविधा काम करती है।
एप्पल पे में यूजर के बैंक कार्ड की जानकारी को सीधे दुकानदार के साथ साझा करने के बजाय उपकरण आधारित सुरक्षित पहचान का इस्तेमाल किया जाता है। भुगतान को फेस आईडी या टच आईडी जैसी जैविक पहचान के जरिए मंजूरी दी जा सकती है। यही वजह है कि गोपनीयता और सुरक्षा एप्पल पे की प्रमुख विशेषताओं में गिनी जाती हैं।
वहीं भारत का यूपीआई एक अलग व्यवस्था पर आधारित है। इसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम संचालित करता है और इसके जरिए अलग-अलग बैंकों के खातों को भुगतान सेवाओं से जोड़ा जाता है। उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर, बैंक खाते या क्यूआर कोड के जरिए सीधे भुगतान कर सकता है। यूपीआई का इस्तेमाल एंड्रॉयड और आईफोन दोनों तरह के उपकरणों के साथ-साथ कुछ साधारण मोबाइल फोन में भी किया जा सकता है।
गौरतलब है कि यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत उसका व्यापक नेटवर्क है। देशभर में दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों तक क्यूआर कोड के जरिए भुगतान स्वीकार किया जाता है। इसके लिए आम तौर पर इंटरनेट की जरूरत होती है। दूसरी ओर, एप्पल पे में कुछ दुकानों पर संपर्क रहित भुगतान इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी किया जा सकता है।
दोनों सेवाओं में सुरक्षा का तरीका भी अलग है। एप्पल पे में वास्तविक कार्ड नंबर को दुकानदार के साथ साझा नहीं किया जाता। वहीं यूपीआई भुगतान में उपयोगकर्ता को बैंक खाते से जुड़ी पहचान और चार या छह अंकों के गुप्त अंक के जरिए भुगतान की पुष्टि करनी होती है। यूपीआई से किया गया भुगतान तुरंत बैंक खाते से जुड़ा होने के कारण उसे वापस लेना कई मामलों में मुश्किल हो सकता है।
अब सवाल यह है कि एप्पल पे भारत आने में इतना समय क्यों लगा। मौजूद जानकारी के अनुसार, एप्पल पे के लिए एप्पल उपकरणों का इस्तेमाल जरूरी है। कंपनी ने संभवतः भारत में आईफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या और बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सेवा शुरू करने का फैसला किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में आईफोन की बिक्री बढ़ी है और आने वाले समय में नए आईफोन 18 प्रो श्रृंखला से भी मांग बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि भारत का मोबाइल बाजार अभी भी बड़े पैमाने पर एंड्रॉयड उपकरणों पर निर्भर है। करोड़ों लोग इन्हीं उपकरणों से भुगतान, यात्रा बुकिंग और दूसरी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में एप्पल पे का शुरुआती दायरा मुख्य रूप से आईफोन और दूसरे एप्पल उपकरण इस्तेमाल करने वाले लोगों तक सीमित रह सकता है।
एक अहम सवाल यह भी है कि क्या एप्पल पे भारत में एंड्रॉयड फोन पर उपलब्ध होगा। मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए इसकी संभावना बेहद कम मानी जा रही है, क्योंकि एप्पल पे लंबे समय से अपने उपकरणों और सेवाओं के साथ एकीकृत प्रणाली के रूप में काम करता है।
फिलहाल भारत में एप्पल पे की आधिकारिक शुरुआत और इसकी पूरी सुविधाओं की तस्वीर साफ नहीं है। अगर सेवा अक्टूबर में आती है, तो भारतीय उपयोगकर्ताओं के सामने यूपीआई के साथ एक और भुगतान विकल्प होगा। हालांकि भारत में यूपीआई की गहरी पहुंच और आसान क्यूआर भुगतान व्यवस्था को देखते हुए एप्पल पे की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह भारतीय उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की भुगतान आदतों में कितनी जगह बना पाता है।

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