हिलसा में किसान टमाटर फेंकने को मजबूर:कहा- नहीं मिल रहा पूरा दाम, बाजार में 5 से 7 रूपए में बिक रहा

हिलसा में किसान टमाटर फेंकने को मजबूर:कहा- नहीं मिल रहा पूरा दाम, बाजार में 5 से 7 रूपए में बिक रहा

हिलसा प्रखंड के हसनपुर गांव में टमाटर की बंपर पैदावार किसानों के लिए राहत के बजाय संकट का कारण बन गई है। बाजार में टमाटर की भारी आवक के चलते कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि कई किसान टमाटर सड़क किनारे फेंकने को मजबूर हो गए हैं। 40 एकड़ में हुई है टमाटर की खेती हसनपुर गांव में करीब 40 एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती की गई है। गांव के बड़ी संख्या में किसान इसी फसल पर निर्भर हैं। इस बार उत्पादन बेहतर हुआ, लेकिन बाजार में मांग की तुलना में अधिक आवक होने से कीमतें लगातार गिर रही हैं। 700 रुपए प्रति क्विंटल तक सिमटा भाव किसानों के अनुसार वर्तमान में टमाटर का बाजार भाव करीब 700 रुपये प्रति क्विंटल है, यानी उन्हें मात्र 7 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा है। वहीं खेत से सीधे बिक्री करने पर कीमत 5 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जा रही है। इतनी कम कीमत पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ढुलाई खर्च निकालना भी हो रहा मुश्किल बुधवार शाम हसनपुर निवासी किसान मदन मोहन शरण, सूरज कुमार, अमूल कुमार, रामेश्वर प्रसाद, संजय प्रसाद, राजीव कुमार, गुड्डू प्रसाद और रंजीत कुमार ने बताया कि मौजूदा कीमतों पर खेत से बाजार तक टमाटर पहुंचाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। कई बार बिक्री से मिलने वाली राशि परिवहन खर्च से भी कम पड़ रही है। उत्पादन लागत भी नहीं हो रही वसूल किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कीटनाशक दवाओं पर भारी निवेश किया गया है। इसके बावजूद उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। मौजूदा दर पर टमाटर बेचना पूरी तरह घाटे का सौदा साबित हो रहा है, क्योंकि उत्पादन लागत तक नहीं निकल पा रही है। खरीदार नहीं मिलने से सड़क पर फेंक रहे टमाटर किसानों ने बताया कि मंडियों में भी पर्याप्त खरीदार नहीं मिल रहे हैं। उपज अधिक होने और मांग कम रहने के कारण टमाटर की खपत नहीं हो पा रही है। ऐसे में कई किसान अपनी फसल सड़क किनारे फेंकने को मजबूर हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। हिलसा प्रखंड के हसनपुर गांव में टमाटर की बंपर पैदावार किसानों के लिए राहत के बजाय संकट का कारण बन गई है। बाजार में टमाटर की भारी आवक के चलते कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि कई किसान टमाटर सड़क किनारे फेंकने को मजबूर हो गए हैं। 40 एकड़ में हुई है टमाटर की खेती हसनपुर गांव में करीब 40 एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती की गई है। गांव के बड़ी संख्या में किसान इसी फसल पर निर्भर हैं। इस बार उत्पादन बेहतर हुआ, लेकिन बाजार में मांग की तुलना में अधिक आवक होने से कीमतें लगातार गिर रही हैं। 700 रुपए प्रति क्विंटल तक सिमटा भाव किसानों के अनुसार वर्तमान में टमाटर का बाजार भाव करीब 700 रुपये प्रति क्विंटल है, यानी उन्हें मात्र 7 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा है। वहीं खेत से सीधे बिक्री करने पर कीमत 5 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जा रही है। इतनी कम कीमत पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ढुलाई खर्च निकालना भी हो रहा मुश्किल बुधवार शाम हसनपुर निवासी किसान मदन मोहन शरण, सूरज कुमार, अमूल कुमार, रामेश्वर प्रसाद, संजय प्रसाद, राजीव कुमार, गुड्डू प्रसाद और रंजीत कुमार ने बताया कि मौजूदा कीमतों पर खेत से बाजार तक टमाटर पहुंचाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। कई बार बिक्री से मिलने वाली राशि परिवहन खर्च से भी कम पड़ रही है। उत्पादन लागत भी नहीं हो रही वसूल किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कीटनाशक दवाओं पर भारी निवेश किया गया है। इसके बावजूद उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। मौजूदा दर पर टमाटर बेचना पूरी तरह घाटे का सौदा साबित हो रहा है, क्योंकि उत्पादन लागत तक नहीं निकल पा रही है। खरीदार नहीं मिलने से सड़क पर फेंक रहे टमाटर किसानों ने बताया कि मंडियों में भी पर्याप्त खरीदार नहीं मिल रहे हैं। उपज अधिक होने और मांग कम रहने के कारण टमाटर की खपत नहीं हो पा रही है। ऐसे में कई किसान अपनी फसल सड़क किनारे फेंकने को मजबूर हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।  

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