बेतिया में किसानों-मजदूरों का आक्रोश मार्च:महंगाई-बेरोजगारी और पेपर लीक पर सरकार घिरी, गेहूं खरीद से लेकर 200 दिन रोजगार की मांग

बेतिया में किसानों-मजदूरों का आक्रोश मार्च:महंगाई-बेरोजगारी और पेपर लीक पर सरकार घिरी, गेहूं खरीद से लेकर 200 दिन रोजगार की मांग

पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया में बिहार राज्य किसान सभा, बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। यह मार्च बलिराम भवन से शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, नौजवान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में झंडे-बैनर लिए सरकार विरोधी नारे लगाते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जिला समाहरणालय गेट पहुंचे। यहां एक सभा का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और किसानों की दयनीय स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। गेहूं की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की
किसानों ने कृषि ऋण माफी, फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और गेहूं की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की। उनका तर्क था कि उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सभा में युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। मजदूरों ने मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों का विरोध करते हुए साल में 200 दिन काम और सम्मानजनक मजदूरी देने की मांग रखी। इसके अतिरिक्त, रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग की गई। सरकार की जनविरोधी नीतियों पर चिंता व्यक्त की
प्रदर्शन के दौरान बेतिया राज की भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक देने, कृषि भूमि अधिग्रहण पर बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा देने और सभी प्रखंड मुख्यालयों में डिग्री कॉलेज खोलने जैसी मांगें भी उठाई गईं। इसके साथ ही, नरकटियागंज से पाटलिपुत्र तक नई ट्रेनें चलाने की भी मांग की गई। वक्ताओं ने बढ़ते अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की जनविरोधी नीतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने नफरत की राजनीति बंद कर जनहित में कार्य करने की अपील की। पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया में बिहार राज्य किसान सभा, बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। यह मार्च बलिराम भवन से शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, नौजवान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में झंडे-बैनर लिए सरकार विरोधी नारे लगाते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जिला समाहरणालय गेट पहुंचे। यहां एक सभा का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और किसानों की दयनीय स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। गेहूं की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की
किसानों ने कृषि ऋण माफी, फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और गेहूं की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की। उनका तर्क था कि उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सभा में युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। मजदूरों ने मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों का विरोध करते हुए साल में 200 दिन काम और सम्मानजनक मजदूरी देने की मांग रखी। इसके अतिरिक्त, रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग की गई। सरकार की जनविरोधी नीतियों पर चिंता व्यक्त की
प्रदर्शन के दौरान बेतिया राज की भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक देने, कृषि भूमि अधिग्रहण पर बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा देने और सभी प्रखंड मुख्यालयों में डिग्री कॉलेज खोलने जैसी मांगें भी उठाई गईं। इसके साथ ही, नरकटियागंज से पाटलिपुत्र तक नई ट्रेनें चलाने की भी मांग की गई। वक्ताओं ने बढ़ते अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की जनविरोधी नीतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने नफरत की राजनीति बंद कर जनहित में कार्य करने की अपील की।  

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