चुनाव से पहले विजय को साथ लाने की हर कोशिश, अब TVK को सपोर्ट देने से क्यों पीछे हट रही AIADMK-BJP? 3 वजह

चुनाव से पहले विजय को साथ लाने की हर कोशिश, अब TVK को सपोर्ट देने से क्यों पीछे हट रही AIADMK-BJP? 3 वजह

तमिलनाडु में कांग्रेस, सीपीआई-सीपीआई(एम) और आखिरकार वीसीके का समर्थन मिलने से विजय के लिए नई सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है।

विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के पास 108 सीटें हैं। अब अन्य पार्टियों का समर्थन मिलने के बाद विजय के पास कुल आंकड़ा 119 तक पहुंच गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भाजपा-एआईएडीएमके ने तमिलनाडु चुनाव से पहले विजय को अपने साथ लाने के लिए हर तरह से कोशिश की, उसका अब टीवीके से मोह भंग क्यों हो गया?

‘किसी भी हालत में समर्थन नहीं देंगे’

कुछ ही दिनों पहले विजय के साथ गठबंधन को लेकर एआईएडीएमके के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी केपी मुनुसामी का बयान सामने आया था, वो अब भी चर्चा में है।

केपी मुनुसामी ने गठबंधन को लेकर साफ कहा- किसी भी हालत में AIADMK विजय की पार्टी TVK को समर्थन नहीं देगी। एडप्पादी के पलानीस्वामी की अगुवाई वाली पार्टी ने आंतरिक बैठक के बाद यह फैसला लिया।

खैर, भाजपा-एआईएडीएमके विजय को समर्थन देने से क्यों बच रहीं हैं, इसकी तीन खास वजह हैं, आइये उन पर एक नजर डालें।

क्या हैं वजह?

भाजपा के साथ चुनावी गठबंधन और वैचारिक विरोध- AIADMK ने भाजपा के साथ एनडीए में चुनाव लड़ा। विजय की टीवीके ने भाजपा को खुलकर अपना वैचारिक विरोधी बताया। साथ ही विजय ने पूरे चुनाव में सेकुलर और द्रविड़ एजेंडे पर जोर दिया। टीवीके के साथ गठबंधन करने से एआईएडीएमके का अपना वोट बैंक और भाजपा का समर्थन दोनों प्रभावित हो सकते थे। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी टीवीके को समर्थन की शर्त रखी कि कोई कम्युनल (सांप्रदायिक) ताकत शामिल न हो।

आंतरिक कलह और पार्टी फूट का खतरा- सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा है कि कुछ एआईएडीएमके विधायकों (लगभग 35) ने टीवीके को समर्थन देने की मांग की। इस संबंध में सीवी शनमुगम जैसे नेताओं के घर भी पहुंचे। लेकिन ईपीएस और हाई कमांड ने इससे साफ इनकार कर दिया। इस वजह से पार्टी में फूट का खतरा भी बढ़ने की संभावना है। यह भी एक वजह रही कि अपनी साख बचाने के लिए ईपीएस ने यह कदम उठाया।

आगे की रणनीति और वोट बैंक संरक्षण- विजय ने DMK और AIADMK दोनों के वोट काटे। AIADMK को अब लगता है कि टीवीके को समर्थन देने से उसका पारंपरिक आधार और आगे कमजोर होगा। भाजपा भी तमिलनाडु में अपनी पैठ बनाए रखना चाहती है, इसलिए AIADMK को TVK से दूर रखने पर जोर है।

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