सिटी की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिस पेट्रोलिंग को अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से रांची पुलिस को करीब तीन महीने पहले 103 पेट्रोलिंग बाइकें मिली थीं। लेकिन विडंबना यह है कि इन बाइकों का अब तक नियमित उपयोग शुरू नहीं हो सका है। रांची के न्यू पुलिस लाइन में खड़ी ये बाइकें धूल फांक रही हैं। 12 मार्च को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रांची पुलिस के हवाले किया था। रांची को पहले 73 और बाद में 30 बाइकें मिलीं। इस तरह कुल 103 अपाचे मोटरसाइकिलें गश्ती के लिए उपलब्ध कराई गईं। लेकिन अब तक इनका स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं हो पाया है। नंबर के इंतजार में बाइकें खड़ी हैं, जबकि इसी दौरान खरीदे गए नए बोलेरो वाहन गश्ती में लगा दिए गए हैं। बिना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के वाहन चलाना दंडनीय अपराध किसी भी नए वाहन का रजिस्ट्रेशन वाहन मालिक या डीलर कराता है। स्थायी नंबर जारी होने से पहले अस्थायी नंबर दिया जाता है, जिसकी वैधता 30 दिनों की होती है। इस दौरान स्थायी नंबर लेना अनिवार्य होता है। बिना वैध रजिस्ट्रेशन के वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। मोटरसाइकिल गश्त पुलिसिंग का एक अहम हिस्सा है। इस मामले में विभाग को सक्रियता दिखानी चाहिए। एसएन दत्त (एडवोकेट, भास्कर एक्सपर्ट): “बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन सड़क पर उतारना नियमों के खिलाफ है। चूंकि मोटरसाइकिल गश्त पुलिसिंग का एक अहम हिस्सा है, इसलिए विभाग को इस प्रक्रिया में तेजी दिखानी चाहिए।” वाहनों की संख्या अधिक, इसलिए रजिस्ट्रेशन में देरी: सार्जेंट मेजर सार्जेंट मेजर-2 अनीश मोमित कुजूर ने बताया कि धीरे-धीरे रजिस्ट्रेशन नंबर मिल रहे हैं। रजिस्ट्रेशन और नंबर जारी कराने की जिम्मेदारी डीलर की होती है। वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। बाइकों में वीआईपी लाइट, वायरलेस सेट, एमडीटी टैब, सायरन और वाइजर लगाए गए हैं। जीपीएस लगाने का काम जारी है। भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर क्यों थमी हैं रफ्तार? रजिस्ट्रेशन ने रोकी राह: बाइकों के उपयोग में देरी की मुख्य वजह स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर का नहीं मिलना है। विभाग और डीलर के बीच समन्वय की धीमी गति से भी काम अटका है। अधूरा मॉडिफिकेशन: बाइकों में जीपीएस लगाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। जनता पर क्या पड़ रहा असर: 103 पेट्रोलिंग बाइकें उपयोग में नहीं आने का सीधा असर शहर की पुलिसिंग पर पड़ रहा है। मोटरसाइकिल की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि वह संकरी गलियों व भीड़ वाले इलाकों में भी आसानी से पहुंच सकती है, जहां बड़ी गाड़ियां नहीं जा पातीं। सीधी बात: राकेश सिंह, ट्रैफिक एसपी सवाल: पुलिस रेस्पॉन्स बढ़ाने के लिए बाइक खरीदी गई, पर इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा? जवाब: बाइक का उपयोग हो रहा है। फ्लैग मार्च और अन्य जरूरी गतिविधियों में इन्हें निकाला जाता है। सवाल: नई बाइकें पुलिस लाइन में क्यों खड़ी हैं? जवाब: इनमें कुछ मॉडिफिकेशन का काम चल रहा था। जीपीएस समेत कई उपकरण लगाए गए हैं। सवाल: क्या सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर आ गया है, कब तक गश्त में लगाई जाएंगी? जवाब: नहीं, अभी सभी बाइक का नंबर नहीं आया है। अस्थायी नंबर छह महीने तक वैध रहता है। जल्द ही स्थायी नंबर मिल जाएंगे। इसके बाद गश्ती ड्यूटी के जवानों को सौंप दी जाएगी। सिटी की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिस पेट्रोलिंग को अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से रांची पुलिस को करीब तीन महीने पहले 103 पेट्रोलिंग बाइकें मिली थीं। लेकिन विडंबना यह है कि इन बाइकों का अब तक नियमित उपयोग शुरू नहीं हो सका है। रांची के न्यू पुलिस लाइन में खड़ी ये बाइकें धूल फांक रही हैं। 12 मार्च को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रांची पुलिस के हवाले किया था। रांची को पहले 73 और बाद में 30 बाइकें मिलीं। इस तरह कुल 103 अपाचे मोटरसाइकिलें गश्ती के लिए उपलब्ध कराई गईं। लेकिन अब तक इनका स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं हो पाया है। नंबर के इंतजार में बाइकें खड़ी हैं, जबकि इसी दौरान खरीदे गए नए बोलेरो वाहन गश्ती में लगा दिए गए हैं। बिना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के वाहन चलाना दंडनीय अपराध किसी भी नए वाहन का रजिस्ट्रेशन वाहन मालिक या डीलर कराता है। स्थायी नंबर जारी होने से पहले अस्थायी नंबर दिया जाता है, जिसकी वैधता 30 दिनों की होती है। इस दौरान स्थायी नंबर लेना अनिवार्य होता है। बिना वैध रजिस्ट्रेशन के वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। मोटरसाइकिल गश्त पुलिसिंग का एक अहम हिस्सा है। इस मामले में विभाग को सक्रियता दिखानी चाहिए। एसएन दत्त (एडवोकेट, भास्कर एक्सपर्ट): “बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन सड़क पर उतारना नियमों के खिलाफ है। चूंकि मोटरसाइकिल गश्त पुलिसिंग का एक अहम हिस्सा है, इसलिए विभाग को इस प्रक्रिया में तेजी दिखानी चाहिए।” वाहनों की संख्या अधिक, इसलिए रजिस्ट्रेशन में देरी: सार्जेंट मेजर सार्जेंट मेजर-2 अनीश मोमित कुजूर ने बताया कि धीरे-धीरे रजिस्ट्रेशन नंबर मिल रहे हैं। रजिस्ट्रेशन और नंबर जारी कराने की जिम्मेदारी डीलर की होती है। वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। बाइकों में वीआईपी लाइट, वायरलेस सेट, एमडीटी टैब, सायरन और वाइजर लगाए गए हैं। जीपीएस लगाने का काम जारी है। भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर क्यों थमी हैं रफ्तार? रजिस्ट्रेशन ने रोकी राह: बाइकों के उपयोग में देरी की मुख्य वजह स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर का नहीं मिलना है। विभाग और डीलर के बीच समन्वय की धीमी गति से भी काम अटका है। अधूरा मॉडिफिकेशन: बाइकों में जीपीएस लगाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। जनता पर क्या पड़ रहा असर: 103 पेट्रोलिंग बाइकें उपयोग में नहीं आने का सीधा असर शहर की पुलिसिंग पर पड़ रहा है। मोटरसाइकिल की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि वह संकरी गलियों व भीड़ वाले इलाकों में भी आसानी से पहुंच सकती है, जहां बड़ी गाड़ियां नहीं जा पातीं। सीधी बात: राकेश सिंह, ट्रैफिक एसपी सवाल: पुलिस रेस्पॉन्स बढ़ाने के लिए बाइक खरीदी गई, पर इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा? जवाब: बाइक का उपयोग हो रहा है। फ्लैग मार्च और अन्य जरूरी गतिविधियों में इन्हें निकाला जाता है। सवाल: नई बाइकें पुलिस लाइन में क्यों खड़ी हैं? जवाब: इनमें कुछ मॉडिफिकेशन का काम चल रहा था। जीपीएस समेत कई उपकरण लगाए गए हैं। सवाल: क्या सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर आ गया है, कब तक गश्त में लगाई जाएंगी? जवाब: नहीं, अभी सभी बाइक का नंबर नहीं आया है। अस्थायी नंबर छह महीने तक वैध रहता है। जल्द ही स्थायी नंबर मिल जाएंगे। इसके बाद गश्ती ड्यूटी के जवानों को सौंप दी जाएगी।


