नालंदा में बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधा है। सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा देश की ‘आधी आबादी’ के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा है, जिस पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। देश की लगभग 70 करोड़ महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन विपक्ष के अड़ियल रवैये के कारण इस मार्ग में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। केंद्र सरकार ने महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए विशेष सत्र बुलाकर ऐतिहासिक महिला आरक्षण संशोधन बिल पेश किया था, परंतु विपक्ष के विरोध के कारण इसे पूर्ण रूप से पारित कराने में कठिनाइयां आईं। विपक्षी दल नहीं चाहते कि महिलाएं राजनीति के मुख्य पटल पर आकर सशक्त भूमिका निभाएं। इस व्यवहार से देश की महिलाओं में भारी आक्रोश है, जिसे ‘जन आक्रोश मार्च’ के जरिए सड़कों पर प्रदर्शित किया जा रहा है। अगर इस बिल को लागू करने में देरी हुई और यह 2029 के बजाय 2034 तक खिंच गया, तो यह नारी शक्ति के साथ बड़ा अन्याय होगा। कार्यकर्ता जागरूकता अभियान चला रहे हैं महागठन की नीतियों पर प्रहार करते अनामिका पासवान ने कहा कि विपक्ष के लोग केवल जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर समाज को भ्रमित करने और बरगलाने का काम कर रहे हैं। भाजपा महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महिलाओं को जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं। प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजेश्वर प्रसाद सिंह, जिला उपाध्यक्ष तेजस्विता राधा, साबो देवी, अरविंद पटेल, डॉ. आशुतोष कुमार, जिला मंत्री रंजू कुमारी, अमरेश कुमार, अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष मणिकांत पासवान और आईटी सेल जिला संयोजक अमित शान सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। नालंदा में बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधा है। सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा देश की ‘आधी आबादी’ के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा है, जिस पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। देश की लगभग 70 करोड़ महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन विपक्ष के अड़ियल रवैये के कारण इस मार्ग में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। केंद्र सरकार ने महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए विशेष सत्र बुलाकर ऐतिहासिक महिला आरक्षण संशोधन बिल पेश किया था, परंतु विपक्ष के विरोध के कारण इसे पूर्ण रूप से पारित कराने में कठिनाइयां आईं। विपक्षी दल नहीं चाहते कि महिलाएं राजनीति के मुख्य पटल पर आकर सशक्त भूमिका निभाएं। इस व्यवहार से देश की महिलाओं में भारी आक्रोश है, जिसे ‘जन आक्रोश मार्च’ के जरिए सड़कों पर प्रदर्शित किया जा रहा है। अगर इस बिल को लागू करने में देरी हुई और यह 2029 के बजाय 2034 तक खिंच गया, तो यह नारी शक्ति के साथ बड़ा अन्याय होगा। कार्यकर्ता जागरूकता अभियान चला रहे हैं महागठन की नीतियों पर प्रहार करते अनामिका पासवान ने कहा कि विपक्ष के लोग केवल जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर समाज को भ्रमित करने और बरगलाने का काम कर रहे हैं। भाजपा महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महिलाओं को जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं। प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजेश्वर प्रसाद सिंह, जिला उपाध्यक्ष तेजस्विता राधा, साबो देवी, अरविंद पटेल, डॉ. आशुतोष कुमार, जिला मंत्री रंजू कुमारी, अमरेश कुमार, अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष मणिकांत पासवान और आईटी सेल जिला संयोजक अमित शान सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।


