छत्तीसगढ़ सीमा से लगे अनूपपुर जिले में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। पिछले 113 दिनों से तीन हाथियों का एक समूह जिले में विचरण कर रहा है, जबकि एक अकेला हाथी 16 दिनों से सक्रिय है। सोमवार सुबह मरवाही-अनूपपुर सीमा पर एक और दंतैल हाथी के पहुंचने से क्षेत्र में खतरा बढ़ गया है। हाथी दिनभर जंगलों में रहते हैं और शाम होते ही रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ते हैं। जैतहरी और अनूपपुर वन परिक्षेत्र के दर्जनों गांवों में हाथियों ने कई मकानों को क्षतिग्रस्त किया है। उन्होंने बाड़ियों में लगी धान, केला, कटहल और महुआ की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। घर के आंगन में हाथी के घुसने से परिवार डरे खांडा बांध के पास एक रात मोहन सिंह के घर के आंगन में हाथी घुस गया और धान खाने लगा। घर के अंदर मौजूद महिला और बच्चे दहशत में आ गए। गश्त कर रही वन विभाग की टीम और विजय सोनवानी ने ग्रामीणों की मदद से पटाखे फोड़कर हाथी को भगाया और परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। वन परिक्षेत्राधिकारी जैतहरी विवेक मिश्रा ने बताया कि तीन हाथियों का समूह 113 दिनों से जिले में है और वर्तमान में धनगवां के जंगल में सक्रिय है। इन हाथियों ने कुकुरगोड़ा और पड़रिया पंचायत के कई घरों को निशाना बनाया है। उन्होंने चोलना बीट में वन विभाग के 40 से अधिक आरसीसी पोल और 100 मीटर फेंसिंग तार को भी क्षतिग्रस्त किया है। देखिए तस्वीरें… 16 दिन से जंगल में एक हाथी का डेरा जिला मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर पोंड़ी और खांडा के जंगलों में एक अकेला हाथी पिछले 16 दिनों से डेरा डाले हुए है। इसी बीच, सोमवार सुबह छत्तीसगढ़ के कटघोड़ा वन मंडल से होता हुआ एक नया दंतैल हाथी मरवाही के माडाकोट पहाड़ पर पहुंच गया है, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि अगले 24 से 48 घंटों में यह हाथी भी अनूपपुर जिले की सीमा में प्रवेश कर सकता है। वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को रात में घरों से बाहर न निकलने और हाथियों के करीब न जाने की सख्त हिदायत दी है। गश्ती दल लगातार हाथियों की लोकेशन पर नजर बनाए हुए है।


