Electricity Consumers News: बिजली उपभोक्ताओं को बहुत बड़ी राहत, अब जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगा पाएंगी विद्युत कंपनियां

Electricity Consumers News: बिजली उपभोक्ताओं को बहुत बड़ी राहत, अब जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगा पाएंगी विद्युत कंपनियां

Electricity Smart Meter News: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत (Electricity Consumers Relief) मिली है। यूपी में अब बिजली कंपनियां जबरन स्मार्ट मीटर (Smart Meter) नहीं लगा पाएंगी। इस संबंध में स्पष्ट आदेश आ गया है। सरकारी आदेश में कहा गया है कि पोस्टपेड या प्रीपेड विद्युत मीटर के चयन का अधिकार बिजली उपभोक्ताओं के पास रहेगा।

अपनी मर्जी से स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकेंगी कंपनियां

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पोस्टपेड या प्रीपेड विद्युत मीटर लगाने का अधिकार केवल उपभोक्ताओं का होगा। बिजली कंपनियां अपनी मर्जी से जबरन कोई भी स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकेंगी। यह स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने 16 अप्रैल 2026 को लोक महत्व की याचिका दायर कर नए कनेक्शन और पुराने मीटर बदलने के मामलों में स्पष्ट नीति बनाने की मांग की थी। आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।

आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सहित सभी बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिया है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता स्वेच्छा से पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर का विकल्प चुन सकें। इस आदेश से लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

पहले कई क्षेत्रों में बिजली कंपनियां जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा रही थीं, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक परेशानी और तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। स्मार्ट मीटर ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और चोरी रोकने में उपयोगी हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की सुविधा और पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उपभोक्ताओं के साथ न्याय हुआ

विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के आदेश का स्वागत किया है। वधेश कुमार वर्मा ने कहा- नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं के साथ न्याय किया है। अब कोई भी कंपनी उपभोक्ता की इच्छा के विरुद्ध मीटर नहीं थोप सकेगी।

यह फैसला बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है। उम्मीद है कि इस आदेश से अन्य राज्यों में भी उपभोक्ता-अनुकूल नीतियां बनेंगी। बिजली कंपनियों को अब उपभोक्ताओं की लिखित सहमति के बाद ही मीटर लगाए जाएंगे। इस फैसले से पारदर्शिता बढ़ेगी और बिजली वितरण व्यवस्था में उपभोक्ता विश्वास मजबूत होगा।

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