92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ED का शिकंजा:पूर्व इंजीनियर समेत तीन गिरफ्तार; कागजों पर बने ड्रेनेज-सीवरेज प्रोजेक्ट, करोड़ों की राशि ठिकाने लगाने का आरोप; 43 संपत्तियां अटैच

92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ED का शिकंजा:पूर्व इंजीनियर समेत तीन गिरफ्तार; कागजों पर बने ड्रेनेज-सीवरेज प्रोजेक्ट, करोड़ों की राशि ठिकाने लगाने का आरोप; 43 संपत्तियां अटैच

इंदौर नगर निगम के चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड और निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा शामिल हैं। तीनों को मंगलवार को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की ईडी रिमांड पर सौंप दिया गया। ED की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी प्रमाण सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी कर अर्जित राशि से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी गईं। इसी के तहत 43 संपत्तियों को अटैच किया गया है। फर्जी बिलों के जरिए निकाली गई करोड़ों की राशि जांच में सामने आया है कि ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर ऐसे कामों के भुगतान मंजूर कराए, जो या तो धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर वास्तविक कार्य की तुलना में कई गुना अधिक दर्शाए गए। ED के अनुसार कई प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर जांच के दौरान संबंधित कार्यों का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच के प्रमुख बिंदु
– करीब 92 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के साक्ष्य मिले।
– पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार।
– स्पेशल कोर्ट ने तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर की।
– मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की 43 संपत्तियां अटैच।
– फर्जी निर्माण कार्यों और जाली बिलों के माध्यम से राशि निकाले जाने का आरोप।
– अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की भूमिका जांच के दायरे में। घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद ED की कार्रवाई के बाद नगर निगम के /यह चर्चित घोटाले में फिर चर्चाओं में है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से रुपयों के लेन-देन, संपत्तियों की खरीद और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

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