मधेपुर प्रखंड के बलथी चौक से जोगिया पथ पर तिलयुगा नदी पर बने पुल का पूर्वी छोर भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल पर एक बड़ा रेन कट बन गया है, जिससे आवागमन जोखिम भरा हो गया है। यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यह पुल बकुआ भरगामा, जौगिया, सुंदरी सहित दर्जनभर गांवों को प्रखंड मुख्यालय और बाजार से जोड़ता है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग, स्कूली बच्चे और विभिन्न वाहन इस पुल से गुजरते हैं। बारिश के बाद पुल के पूर्वी छोर पर मिट्टी कटने से लगभग तीन फीट गहरा गड्ढा बन गया है। इससे बाइक और ऑटो सवारों के संतुलन बिगड़ने और गिरने की घटनाएं हो रही हैं, खासकर रात के समय खतरा अधिक रहता है। स्थानीय ग्रामीण मोहम्मद शकील ने बताया कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले बरसात के मौसम में इसका संपर्क पूरी तरह टूट सकता है, जिससे दर्जनों गांवों का आवागमन बाधित हो जाएगा। ग्रामीण मोहम्मद ओसामा और गुड्डू ने कहा कि यह रेन कट लगातार बारिश के कारण बना है, और पुल के नीचे से मिट्टी बह जाने से इसकी संरचना कमजोर हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल की इस खराब हालत के बारे में विभाग को कई बार सूचित किया गया है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके का मुआयना करने नहीं आया। पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश में पुल क्षतिग्रस्त होता है, लेकिन स्थायी समाधान के बजाय केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी जाती है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पुल की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बरसात से पहले पुल को दुरुस्त नहीं किया गया, तो क्षेत्र के हजारों लोगों को भारी परेशानी होगी। मरीजों को अस्पताल पहुंचाना और बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मधेपुर प्रखंड के बलथी चौक से जोगिया पथ पर तिलयुगा नदी पर बने पुल का पूर्वी छोर भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल पर एक बड़ा रेन कट बन गया है, जिससे आवागमन जोखिम भरा हो गया है। यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यह पुल बकुआ भरगामा, जौगिया, सुंदरी सहित दर्जनभर गांवों को प्रखंड मुख्यालय और बाजार से जोड़ता है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग, स्कूली बच्चे और विभिन्न वाहन इस पुल से गुजरते हैं। बारिश के बाद पुल के पूर्वी छोर पर मिट्टी कटने से लगभग तीन फीट गहरा गड्ढा बन गया है। इससे बाइक और ऑटो सवारों के संतुलन बिगड़ने और गिरने की घटनाएं हो रही हैं, खासकर रात के समय खतरा अधिक रहता है। स्थानीय ग्रामीण मोहम्मद शकील ने बताया कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले बरसात के मौसम में इसका संपर्क पूरी तरह टूट सकता है, जिससे दर्जनों गांवों का आवागमन बाधित हो जाएगा। ग्रामीण मोहम्मद ओसामा और गुड्डू ने कहा कि यह रेन कट लगातार बारिश के कारण बना है, और पुल के नीचे से मिट्टी बह जाने से इसकी संरचना कमजोर हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल की इस खराब हालत के बारे में विभाग को कई बार सूचित किया गया है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके का मुआयना करने नहीं आया। पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश में पुल क्षतिग्रस्त होता है, लेकिन स्थायी समाधान के बजाय केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी जाती है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पुल की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बरसात से पहले पुल को दुरुस्त नहीं किया गया, तो क्षेत्र के हजारों लोगों को भारी परेशानी होगी। मरीजों को अस्पताल पहुंचाना और बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


