300 रुपए की ई-सिगरेट,भारत में 3 हजार में बिक रही:चीन से प्लेन और समुद्र के रास्ते तस्करी, इलेक्ट्रॉनिक आइटम बताकर लाते हैं, पार्ट-2

300 रुपए की ई-सिगरेट,भारत में 3 हजार में बिक रही:चीन से प्लेन और समुद्र के रास्ते तस्करी, इलेक्ट्रॉनिक आइटम बताकर लाते हैं, पार्ट-2

दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज के पहले पार्ट में आपने पढ़ा कि कैसे देश भर में पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद ई-सिगरेट (वेप) राजस्थान के शहरों में बिक रही है। नाबालिग बच्चे और कॉलेज स्टूडेंट्स इसके जाल में फंसते जा रहे हैं। पहले पार्ट के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह खड़ा होता है कि जब भारत में इस पर पूरी तरह कानूनी प्रतिबंध (बैन) है, तो फिर यह ई-सिगरेट हमारे देश और राजस्थान के शहरों की पान की दुकानों तक पहुंच कैसे रही है? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने जब इसके इंटरनेशनल सप्लाई चेन को खंगाला, तो कड़ियां सीधे चीन से जाकर जुड़ीं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि भारत में बिकने वाली लगभग हर अवैध ई-सिगरेट की खेप चीनसे आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि चीन में भी ई-सिगरेट बनाना और बेचना दोनों ही पूरी तरह गैरकानूनी है। ई-सिगरेट के बढ़ते खतरे को देखते हुए चीन की सरकार ने पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर रेड (छापेमारी) डाली है। वहां अब तक अवैध रूप से वेप बनाने वाली 300 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद कराई जा चुकी हैं। लेकिन इस कड़े एक्शन के बाद भी यह धंधा रुका नहीं। शातिर तस्करों और मैन्युफैक्चरर्स ने अब चीन में दूसरी वैध कंपनियों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स या प्लास्टिक खिलौने बनाने वाली फर्म) की आड़ में चोरी-छिपे ई-सिगरेट का प्रॉडक्शन शुरू कर दिया है। ई-सिगरेट चीन में तीन डॉलर (करीब 300 रुपए) में मिलती है। वह भारत में 2 से 3 हजार रुपए में बेची जा रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… प्लेन और समुद्र के रास्ते पहुंच रही ई-सिगरेट प्लेन : इलेक्ट्रॉनिक आइटम बताकर लाते हैं ई-सिगरेट के पैकेट काफी छोटे होते हैं। पैसेंजर को 30 किलो तक का बैग ले जाने की परमिशन होती है। ऐसे में एजेंट सीधे चीन से बैग में ई-सिगरेट के पैकेट बनाकर रखकर ले आते हैं। हर पैसेंजर के बैग की एयरपोर्ट पर चेकिंग नहीं हो पाती है। इसका एजेंट फायदा उठाते है। हालांकि कई बार एयरपोर्ट पर पकड़े जाने पर पूरा माल जब्त हो जाता है। दोबारा उस एजेंट पर एयरपोर्ट पर आने-जाने पर सख्ती से नजर रखी जाती है। हवाई जहाज से ई-सिगरेट लाना काफी महंगा पड़ता है। पूरा माल इलेक्ट्राॅनिक आइटम बता कर लाते हैं। करीब 400 रुपए में ई-सिगरेट की क्वालिटी चेक होने के बाद पैकेट बनाया जाता है। पैकेट दो हजार रुपए प्रति किलो के रेट में लाया जाता है। एक पैकेट में 6 पीस होते हैं। हर पीस की बात करें तो एजेंट 400 रुपए एक्स्ट्रा लेते हैं। इसमें अगर डोर टू डोर डिलीवरी की डील होती है तो सौ रुपए प्रति पीस और लेते हैं। सारी जिम्मेदारी एजेंट की होती है। अगर चेकिंग हो जाती है तो कस्टम में पूरा माल फंस जाता है। ऐसे में रिस्क ज्यादा रहता है। समुद्र के रास्ते : सप्लाई सस्ती पड़ती है कंटेनर में पैक करके ई-सिगरेट समुद्र के रास्ते पाेर्ट तक पहुंचती है। कंटेनर में बहुत सारे इलेक्ट्राॅनिक आइटम होते हैं। सभी आइटम की चेकिंग भी संभव नहीं होती। समुद्र के रास्ते सप्लाई सस्ती पड़ती है, जो ई-सिगरेट 300 रुपए की होती है, वह क्वालिटी चेक और एजेंट की प्रति पीस फीस मिलाकर 450 से 500 रुपए हो जाती है। ये एजेंट बड़ी डील में ही बात करते हैं। कंटनेर में माल लोड करवा कर समुद्र के रास्ते पैक करवा कर पोर्ट तक ले आते हैं। यहां पर सेटिंग करके आगे दिल्ली जैसे बड़े शहरों में डिलीवरी कर दी जाती है। इसमें दो तरीके से डील होती है। पहली तो पोर्ट से माल बाहर निकालने के बाद आपकी जिम्मेदारी होती है कि आप माल अपनी जगह तक कैसे ले जाते हैं और दूसरी वे खुद डोर टू डोर डिलीवरी की जिम्मेदारी लेते है। इसमें अधिक चार्ज देना पड़ता है लेकिन पूरी तरह से सेफ रहते हैं। (नाम न छापने की शर्त पर एक कस्टम अधिकारी ने बताया) ट्रेन के कंटेनर से भी पहुंचता है माल पोर्ट से माल उतरने के बाद कंटेनर में ट्रेन के जरिए भी दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, मुंबई जैसी जगहों पर भेजा जाता है। यहां से अलग-अलग शहरों में डीलरों के पास पहुंच जाता है। पूरी डील और माल भेजने की व्यवस्था सीएचए (कस्टम हेल्प एजेंट) की होती है। चीन में खुद सीएचए का अपना वेयरहाउस होता है। बस अपना कोई भी माल उनके वेयरहाउस तक भेजना होता है। उसके बाद से वे सारी डील खुद करते हैं। भास्कर ने एक डीलर अखिलेश से बात की। अखिलेश सीएचए के संपर्क में रहते हैं। पर्स, बेल्ट व अन्य इलेक्ट्राॅनिक चीजें कम कीमतों पर चीन से मंगाते हैं। बोले- अभी ई-सिगरेट नहीं आ रही। बहुत सख्ती है। पोर्ट से 120 करोड़ का माल कंटेनर से जब्त हुआ है। कई बड़े एजेंटों का नुकसान हुआ है, हर कोई डरा हुआ है। अखिलेश ने बताया चीन में शैनजिंग और गुवाडोंगे प्रोवेंस को वेप कैपिटल कहा जाता है। यहां वेप बनाने की सबसे ज्यादा अवैध फैक्ट्रियां हैं। चीन सरकार सख्त है, क्योंकि सेना के कुछ अधिकारियों और जवानों की वेप की वजह से मौत हो गई थी। वेप बनाने वाली 300 से ज्यादा कंपनियों पर रेड डाली। इसके बाद दूसरे इलेक्ट्रानिक प्रोडक्ट बनाने की आड़ में वेप की मैन्युफेक्चरिंग शुरू हो गई। चीन के लोग अब मिडिलजवान ईस्ट और रशिया में फैक्ट्री डाल रहे हैं। कुछ समय बाद वहां से प्रोडक्शन शुरू हो सकता है। चीन की फैक्ट्रियों से करना होता है कॉन्टैक्ट एजेंट ने बताया कि ई-सिगरेट के लिए चीन की फैक्ट्रियों में संपर्क करना पड़ता है। वहां पर एल्फबार, एल्फफकीर, होजोल सहित कई बड़े अवैध ब्रांड हैं। 10 हजार से लेकर 20 करोड़ तक चाहे जितना माल मिल जाएगा। माल के लिए कैश पेमेंट करना होता है, वो भी चीन की करेंसी में। पेमेंट हाेने के बाद फैक्ट्री की ओर से आपके ट्रांसपोर्टर तक सेफ तरीके से माल पहुंचाया दिया जाता है। इसके बाद आपकी जिम्मेदारी है कि माल कैसे लेकर जाएंगे। अगर कस्टम एजेंट से मिलकर बात करते हैं तो वहां इंस्पेक्शन टीम से क्वालिटी चेक का सर्टिफिकेट लेना होता है। उसका अलग चार्ज होता है। एक कंटेनर माल का 10 हजार आरएमबी में डील होती है मतलब की करीब एक लाख 40 हजार भारतीय रुपए। सर्टिफिकेट मिलने के बाद एजेंट की पूरी जिम्मेदारी होती है। हर दिन ई-सिगरेट की रेट्स की पीडीएफ शेयर होती है। नई रेट्स के हिसाब से ऑर्डर फिक्स किए जाते हैं। ई-सिगरेट के अलग-अलग फ्लेवर के हिसाब से भी रेट तय हैं। साथ ही ज्यादा ऑर्डर बुक करने पर रेट कम हो जाती है। यह भी पढ़िए… 2000 सिगरेट जितनी खतरनाक ई-सिगरेट, राजस्थान में बिक रही:7 साल पहले बैन, IPL क्रिकेटर पी रहे, दुकानदार बोले- चाहे जितनी मिलेगी, पार्ट-1 राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग हाल ही में जयपुर में मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट (वेप) पीते हुए पकड़े गए थे। लोकसभा के अंदर भी स्पीकर ओम बिरला ने एक सांसद को ई-सिगरेट पीते टोका था। बैन होने के बावजूद ई-सिगरेट के लगातार मामले सामने आने के बाद भास्कर टीम ने जयपुर और जोधपुर में इन्वेस्टिगेशन किया तो पान की दुकानों और थड़ियों पर ई-सिगरेट बिकती मिली। (पढ़िए पूरी रिपोर्ट)

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