जौनपुर के मड़ियाहूं स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में पांच दिवसीय मानस सम्मेलन का विसर्जन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर वाराणसी से आए मानस कोविद डॉ. मदन मोहन मिश्र ने सत्कर्म को तुरंत करने और संघर्ष को टालने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष टालने से समझौता हो सकता है, जिससे समाज में अपराधों को रोका जा सकता है। डॉ. मिश्र ने किष्किंधा कांड का जिक्र करते हुए बताया कि महात्मा जीवात्मा को परमात्मा तक पहुंचाते हैं। उन्होंने सुग्रीव का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपनी आंखों पर नहीं, बल्कि संत हनुमान की आंखों पर भरोसा किया। डॉ. मिश्र ने बाली द्वारा अपने पुत्र अंगद को प्रभु श्रीराम के हाथों में सौंपने का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि विकार आने पर चरण छूट सकते हैं, लेकिन जब आप अपने हाथ से पकड़ लेंगे तो छूटने का भय नहीं रहेगा। प्रतापगढ़ से पधारे मानस प्रवक्ता पंडित आशुतोष द्विवेदी ने विभीषण के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विभीषण ने अपनी चोट या चोट देने वाले रावण के बारे में सोचने के बजाय, दुखों का निवारण करने वाले श्रीराम के चरणों का चिंतन किया। पंडित द्विवेदी ने जोर दिया कि जब हम अपने कर्मों को परमात्मा के चरणों में समर्पित करते हैं, तो परमात्मा स्वयं हमारे सिर का सारा भार उठा लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्संग दुर्गुणों को समाप्त कर सद्गुणों की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम का मंच संचालन पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव ने किया। आयोजक रमेश निगम ने सभी का आभार व्यक्त किया। डी.एन. पाण्डेय और साहब सिंह ने आरती की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।


