पुणे शहर की बढ़ती ट्रैफिक समस्या से राहत दिलाने के लिए अब एक बेहद महत्वाकांक्षी और हाईटेक परियोजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। कात्रज से येरवडा के बीच प्रस्तावित भूमिगत सड़क परियोजना का खाका अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में जमीन के ऊपर बनने वाले डबल डेकर फ्लाईओवर की तरह ही जमीन के नीचे ‘डबल डेकर ट्विन टनल’ तैयार की जाएगी।
करीब 54 किमी लंबे इस भूमिगत सड़क नेटवर्क पर लगभग 36,415 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना के लिए करीब 54 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की जरुरत पड़ सकती है। यह प्रोजेक्ट पुणे की ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है।
सरकार को सौंपा गया पूरा ब्लूप्रिंट
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विस्तृत ब्लूप्रिंट में मौजूदा ट्रैफिक, भविष्य में बढ़ने वाले वाहनों का दबाव, सुरंगों के विकल्प, आर्थिक व्यवहार्यता और फंडिंग जैसे पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया गया है। पूरी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी गई है।
45 जगहों पर हुआ सर्वे
इस प्रोजेक्ट के लिए सलाहकार कंपनी ने पुणे के 45 अलग-अलग स्थानों पर 24 घंटे वाहनों की गिनती, टर्निंग मूवमेंट, यात्रा की शुरुआत और अंत वाले प्रमुख पॉइंट्स जैसे कई तकनीकी सर्वे किए। इसके आधार पर ट्रैफिक मॉडलिंग तैयार की गई।
अध्ययन में वैभव टॉकीज-हडपसर, हॅरिस ब्रिज, शनिवारवाड़ा, गणेशखिंड रोड और खराड़ी बायपास जैसे इलाकों में भारी ट्रैफिक दबाव सामने आया है। रिपोर्ट में कुल सात संभावित टनल रूट्स पर विचार किया गया है।
75 मिनट का सफर सिर्फ 16 मिनट में
रिपोर्ट के मुताबिक, इस टनल नेटवर्क के शुरू होने के बाद पुणे की सड़कों पर ट्रैफिक में 15 से 22 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। सबसे बड़ा फायदा यात्रा समय में दिखाई देगा। अभी येरवडा से हिंजवडी तक पहुंचने में करीब 75 मिनट लगते हैं, लेकिन टनल बनने के बाद यह सफर सिर्फ 16 मिनट में पूरा हो सकेगा। वहीं जगताप डेयरी से कोथरूड तक का सफर 65 मिनट से घटकर केवल 7 मिनट रह जाएगा।
एक ही सुरंग में दोनों दिशाओं का ट्रैफिक
परियोजना में 17.6 मीटर व्यास वाले डबल डेकर टनल का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें एक ही सुरंग के भीतर दोनों दिशाओं में ट्रैफिक चल सकेगा। इससे जमीन अधिग्रहण कम करना संभव होगा और पर्यावरण पर असर भी सीमित रहेगा। टनल के भीतर आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए विशेष एस्केप रूट भी बनाए जाएंगे।
अगर यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो पुणे देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां भविष्य की स्मार्ट और हाईटेक अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट व्यवस्था देखने को मिलेगी।


