Dr. Suri Srimathi Oldest Gynaecologist: आज के समय में जहां लोग 30-35 की उम्र में ही थककर रिटायरमेंट की बातें करने लगते हैं, ऐसे में हैदराबाद की रहने वाली 92 साल की डॉ. सूरी श्रीमति आज भी लोगों को प्रेरित कर रही हैं। भारत की सबसे एक्टिव गायनोकोलॉजिस्ट यानी स्त्री रोग विशेषज्ञ में से एक, डॉ. सूरी का सफर सिर्फ एक डॉक्टर की कहानी नहीं है, बल्कि यह हिम्मत और सेवा का एक ऐसा सबूत है जो बताता है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। आइए, जानते हैं उनके इस शानदार सफर और अनुभवों के बारे में।
डॉक्टर बनने के लिए करना पड़ा संघर्ष (Early Struggle and Career)
1950 के दशक में जब डॉ. सूरी ने डॉक्टरी की पढ़ाई शुरू की थी, तब महिलाओं की शिक्षा को लेकर माहौल आज जैसा नहीं था। उस समय लड़कियों के लिए मेडिकल की पढ़ाई करना लोगों को अजीब लगता था। क्योंकि पढ़ाई के दौरान डॉ. सूरी को डेड बॉडीज (cadavers) पर काम करना पड़ता था, जो उस दौर में बहुत बड़ी बात थी। लेकिन उन्होंने लोगों की परवाह नहीं की और अपना सपना पूरा किया।
इलाज के तरीकों में बदलाव (Evolution of Healthcare)
गायनोकोलॉजिस्ट के तौर पर डॉ. सूरी को काम करते हुए 6 दशक से ज्यादा हो गए हैं। उन्होंने मेडिकल की दुनिया को बहुत बदलते हुए देखा है। जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब सोनोग्राफी जैसी कोई तकनीक नहीं होती थी, डॉक्टर सिर्फ अपने तजुर्बे और मरीज की हालत देखकर इलाज करते थे।
काम के प्रति समर्पण (Dedication and Daily Routine)
92 की उम्र में भी डॉ. सूरी रोज सुबह 5:30 बजे उठकर योग करती हैं। सुबह 8:30 बजे तक वह अपने काम में जुट जाती हैं। सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद, उन्होंने अपने ही घर में एक क्लीनिक खोल लिया ताकि आसपास की गर्भवती महिलाओं को भटकना न पड़े। आज के समय में 2 लाख से भी ज्यादा बच्चों की डिलीवरी करा चुकीं डॉ. सूरी के लिए डॉक्टर और मरीज का रिश्ता 9 महीने का एक गहरा भरोसा होता है।


