झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। इस चुनाव में पांच लोगों ने नामांकन पत्र खरीदा है। जेएमएम की ओर से बैजनाथ राम तो कांग्रेस की ओर से प्रणव झा के नाम हैं। जब तक इन दोनों के नाम थे तब तक सबकुछ ठीक लग रहा था। लेकिन इस चुनावी रणभूमि में परिमल नाथवानी और साईं विजय रेड्डी के बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद से झारखंड में राज्यसभा चुनाव उलझता नजर आ रहा है। इतना ही नहीं भाजपा की ओर से आधारित घोषणा किए बिना गौरव वल्लभ के पर्चा खरीदने के बाद से राजनीति में गर्मी और बढ़ गई है। जानकार इसे भाजपा का डार्क हॉर्स प्लान बता रहे हैं। वहीं झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके परिमल नाथवानी भी रांची पहुंचे और सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इसके बाद से पॉलिटिकल सिनेरियो उलझा सा नजर आ रहा है। राज्यसभा चुनाव के मैदान में हैं ये उम्मीदवार बैजनाथ राम, झामुमो जेएमएम के वरिष्ठ नेता हैं। झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके हैं। झामुमो के अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें पार्टी के एससी वर्ग के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वे मूल रूप से लातेहार के धोबी मुहल्ला के रहने वाले हैं। गौरव वल्लभ, भाजपा भाजपा के प्रमुख नेता, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद हैं। अभी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं। एक्सएलआरआई जमशेदपुर व एसआईएसएस रांची में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। वे राजस्थान के जोधपुर के हैं। प्रणव झा, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी के मीडिया रणनीतिकार है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी निकटता है। वे मूल रूप से भागलपुर जिले के अनादिपुर गांव के हैं। बोकारो से पढ़ाई-लिखाई की है। फिलहाल दिल्ली के साउथ एवेन्यू में रहते हैं। परिमल नाथवानी, निर्दलीय उद्योगपति और अभी आंध्रप्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं। वे 2008 से 2020 तक लगातार 2 कार्यकाल के लिए झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद रहे हैं। वे गुजरात के अहमदाबाद के द्वारकेशनंदी में रहते हैं। साईं विजय रेड्डी, निर्दलीय चार्टर्ड अकाउंटेंट और आंध्र प्रदेश के राजनेता हैं। वाईएसआर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्हें वाईएसआरसीपी प्रमुख जगनमोहन रेड्डी के करीबी और पार्टी का ‘चाणक्य’ माना जाता था। वे आंध्र प्रदेश के इस्कॉन सिटी नेल्लोर के हैं। चर्चा में… क्यों है भाजपा का डार्क हॉर्स प्लान दरअसल, गौरव वल्लभ ने नामांकन पत्र खरीद लिया है, लेकिन भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इसी के बाद भाजपा के डार्क हॉर्स प्लान की चर्चा चल रही है। जानकार बता रहे हैं कि पार्टी की ओर से अधिकृत घोषणा में यह देरी अकारण नहीं है। अंदर की बात यह है कि भाजपा की यह चुप्पी उसकी मजबूरी नहीं, बल्कि प्लान-बी का हिस्सा मानी जा रही है। अगर पार्टी आधिकारिक तौर पर अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारती है, तो इसका सीधा अर्थ है कि वह पर्दे के पीछे से किसी मजबूत निर्दलीय को समर्थन देने का मन बना चुकी है। सीधे मुकाबले में हारने के बजाय निर्दलीय के माध्यम से महागठबंधन के वोट बैंक में सेंधमारी की जाए और असंतुष्ट विधायकों को साधा जाए। हैवीवेट उम्मीदवारों की एंट्री, प्रस्तावकों की चर्चा राज्यसभा के रण में परिमल नाथवानी और विजय साईं रेड्डी जैसे हैवीवेट निर्दलीयों की एंट्री ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। नियम के अनुसार नामांकन के लिए कम से कम 10 विधायकों का बतौर प्रस्तावक होना अनिवार्य है। अंदर की बात यह चल रही है कि झारखंड विधानसभा में बिना किसी बड़े दल की मूक सहमति या भितरघात के 10 विधायक जुटाना लगभग असंभव है। ऐसे में सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो हिडन विधायक कौन हैं, जो इन दिग्गजों का प्रस्तावक बनने को तैयार बैठे हैं? क्या सत्ता व विपक्ष के भीतर सुलग रहा कोई असंतोष इसका कारण बनेगा या फिर यह हॉर्स ट्रेडिंग की कोई नई बिसात बिछेगी ? शून्य का मार्जिन, एक वोट फिसला तो फंसेगी कांग्रेस आंकड़ों के लिहाज से सत्ताधारी गठबंधन के पास 56 विधायक हैं और दो सीटें सुरक्षित निकालने के लिए ठीक 56 (28 गुणा 2) वोटों की ही दरकार है। गणित एकदम ‘टच एंड गो’ वाला है। महागठबंधन के पास मार्जिन ऑफ एरर शून्य है। यदि सत्ता पक्ष का एक भी विधायक क्रॉस वोटिंग करता है, बीमार पड़ जाता है, या किस नाराजगी के चलते वोटिंग के दिन गायब हो जाता है, तो पूरा समीकरण ध्वस्त हो जाएगा। ऐसे हालात में झामुमो अपनी सीट तो सुरक्षित कर लेगी, लेकिन महागठबंधन की दूसरी सीट (संभवतः कांग्रेस की) सीधे तौर पर रेड जोन में आ जाएगी। एक प्रत्याशी को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोट की जरूरत झारखंड विधानसभा मे विधायकों की संख्या 81 है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के प्रथम वरीयता का वोट लाना जरूरी है। इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं तो विपक्ष में 24 विधायक। विपक्ष में भाजपा के 21 और लोजपा, जदयू, आजसू के एक-एक विधायक हैं जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने अभी तक अपन पत्ता नहीं खोला है। दूसरी तरफ सत्ताधारी गठबंधन में झामुमो के पास 34, कांग्रेस के पास 16, राजद के पास 4 और माले के पास दो विधायक हैं। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। इस चुनाव में पांच लोगों ने नामांकन पत्र खरीदा है। जेएमएम की ओर से बैजनाथ राम तो कांग्रेस की ओर से प्रणव झा के नाम हैं। जब तक इन दोनों के नाम थे तब तक सबकुछ ठीक लग रहा था। लेकिन इस चुनावी रणभूमि में परिमल नाथवानी और साईं विजय रेड्डी के बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद से झारखंड में राज्यसभा चुनाव उलझता नजर आ रहा है। इतना ही नहीं भाजपा की ओर से आधारित घोषणा किए बिना गौरव वल्लभ के पर्चा खरीदने के बाद से राजनीति में गर्मी और बढ़ गई है। जानकार इसे भाजपा का डार्क हॉर्स प्लान बता रहे हैं। वहीं झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके परिमल नाथवानी भी रांची पहुंचे और सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इसके बाद से पॉलिटिकल सिनेरियो उलझा सा नजर आ रहा है। राज्यसभा चुनाव के मैदान में हैं ये उम्मीदवार बैजनाथ राम, झामुमो जेएमएम के वरिष्ठ नेता हैं। झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके हैं। झामुमो के अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें पार्टी के एससी वर्ग के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वे मूल रूप से लातेहार के धोबी मुहल्ला के रहने वाले हैं। गौरव वल्लभ, भाजपा भाजपा के प्रमुख नेता, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद हैं। अभी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं। एक्सएलआरआई जमशेदपुर व एसआईएसएस रांची में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। वे राजस्थान के जोधपुर के हैं। प्रणव झा, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी के मीडिया रणनीतिकार है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी निकटता है। वे मूल रूप से भागलपुर जिले के अनादिपुर गांव के हैं। बोकारो से पढ़ाई-लिखाई की है। फिलहाल दिल्ली के साउथ एवेन्यू में रहते हैं। परिमल नाथवानी, निर्दलीय उद्योगपति और अभी आंध्रप्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं। वे 2008 से 2020 तक लगातार 2 कार्यकाल के लिए झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद रहे हैं। वे गुजरात के अहमदाबाद के द्वारकेशनंदी में रहते हैं। साईं विजय रेड्डी, निर्दलीय चार्टर्ड अकाउंटेंट और आंध्र प्रदेश के राजनेता हैं। वाईएसआर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्हें वाईएसआरसीपी प्रमुख जगनमोहन रेड्डी के करीबी और पार्टी का ‘चाणक्य’ माना जाता था। वे आंध्र प्रदेश के इस्कॉन सिटी नेल्लोर के हैं। चर्चा में… क्यों है भाजपा का डार्क हॉर्स प्लान दरअसल, गौरव वल्लभ ने नामांकन पत्र खरीद लिया है, लेकिन भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इसी के बाद भाजपा के डार्क हॉर्स प्लान की चर्चा चल रही है। जानकार बता रहे हैं कि पार्टी की ओर से अधिकृत घोषणा में यह देरी अकारण नहीं है। अंदर की बात यह है कि भाजपा की यह चुप्पी उसकी मजबूरी नहीं, बल्कि प्लान-बी का हिस्सा मानी जा रही है। अगर पार्टी आधिकारिक तौर पर अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारती है, तो इसका सीधा अर्थ है कि वह पर्दे के पीछे से किसी मजबूत निर्दलीय को समर्थन देने का मन बना चुकी है। सीधे मुकाबले में हारने के बजाय निर्दलीय के माध्यम से महागठबंधन के वोट बैंक में सेंधमारी की जाए और असंतुष्ट विधायकों को साधा जाए। हैवीवेट उम्मीदवारों की एंट्री, प्रस्तावकों की चर्चा राज्यसभा के रण में परिमल नाथवानी और विजय साईं रेड्डी जैसे हैवीवेट निर्दलीयों की एंट्री ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। नियम के अनुसार नामांकन के लिए कम से कम 10 विधायकों का बतौर प्रस्तावक होना अनिवार्य है। अंदर की बात यह चल रही है कि झारखंड विधानसभा में बिना किसी बड़े दल की मूक सहमति या भितरघात के 10 विधायक जुटाना लगभग असंभव है। ऐसे में सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो हिडन विधायक कौन हैं, जो इन दिग्गजों का प्रस्तावक बनने को तैयार बैठे हैं? क्या सत्ता व विपक्ष के भीतर सुलग रहा कोई असंतोष इसका कारण बनेगा या फिर यह हॉर्स ट्रेडिंग की कोई नई बिसात बिछेगी ? शून्य का मार्जिन, एक वोट फिसला तो फंसेगी कांग्रेस आंकड़ों के लिहाज से सत्ताधारी गठबंधन के पास 56 विधायक हैं और दो सीटें सुरक्षित निकालने के लिए ठीक 56 (28 गुणा 2) वोटों की ही दरकार है। गणित एकदम ‘टच एंड गो’ वाला है। महागठबंधन के पास मार्जिन ऑफ एरर शून्य है। यदि सत्ता पक्ष का एक भी विधायक क्रॉस वोटिंग करता है, बीमार पड़ जाता है, या किस नाराजगी के चलते वोटिंग के दिन गायब हो जाता है, तो पूरा समीकरण ध्वस्त हो जाएगा। ऐसे हालात में झामुमो अपनी सीट तो सुरक्षित कर लेगी, लेकिन महागठबंधन की दूसरी सीट (संभवतः कांग्रेस की) सीधे तौर पर रेड जोन में आ जाएगी। एक प्रत्याशी को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोट की जरूरत झारखंड विधानसभा मे विधायकों की संख्या 81 है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के प्रथम वरीयता का वोट लाना जरूरी है। इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं तो विपक्ष में 24 विधायक। विपक्ष में भाजपा के 21 और लोजपा, जदयू, आजसू के एक-एक विधायक हैं जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने अभी तक अपन पत्ता नहीं खोला है। दूसरी तरफ सत्ताधारी गठबंधन में झामुमो के पास 34, कांग्रेस के पास 16, राजद के पास 4 और माले के पास दो विधायक हैं।


