सीतापुर में नजूल की जमीन पर स्थापित चर्चित रानी कोठी को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने अवैध कब्जों को हटाने के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए नगर पालिका को 15 दिन के भीतर पूरी संपत्ति खाली कराने का निर्देश दिया है। डीएम न्यायालय से जारी इस आदेश को नगर पालिका प्रशासन ने रानी कोठी के मुख्य गेट पर चस्पा कर दिया है, जिससे कब्जेदारों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि रानी कोठी जनपद की बेशकीमती संपत्तियों में शुमार है, जो बट्सगंज स्थित नजूल भूखंड संख्या 1568 पर निर्मित है। वर्ष 1936 में ही इस भूमि का पट्टा समाप्त हो चुका था, जिसके बाद यह स्वतः ही राज्य सरकार की संपत्ति घोषित हो गई थी। इसके बावजूद वर्षों से यहां अवैध कब्जे बने हुए हैं। शनिवार को डीएम न्यायालय में अवैध कब्जेदारों द्वारा दायर आपत्तियों की सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी ने सभी दावों को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट के प्रोबेट आदेश और 1957 के विक्रय पत्र के आधार पर मालिकाना हक जताने की कोशिश की, लेकिन न्यायालय ने इसे अवैध करार दिया। डीएम ने स्पष्ट किया कि प्रोबेट आदेश केवल वसीयत की पुष्टि करता है, न कि नजूल भूमि पर स्वामित्व का अधिकार देता है। डीएम ने अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी को निर्देश दिए हैं कि 15 दिन के भीतर सभी अवैध कब्जेदारों और किरायेदारों को बेदखल कर भूमि का भौतिक कब्जा लिया जाए। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल का प्रयोग करने और पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शहर के भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों में खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि इस भूमि पर भविष्य में वृद्धाश्रम और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं विकसित की जा सकती हैं।


