दोमुहान बटाने नदी पुल पर बनेगा डायवर्सन:20 जून के बाद शुरू होगा निर्माण कार्य, 2 महीने के अंदर यातायात बहाल होने की उम्मीद

दोमुहान बटाने नदी पुल पर बनेगा डायवर्सन:20 जून के बाद शुरू होगा निर्माण कार्य, 2 महीने के अंदर यातायात बहाल होने की उम्मीद

बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-139 पर स्थित दोमुहान बटाने नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात व्यवस्था प्रभावित है। पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाए जाने से यात्रियों और मालवाहक वाहनों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पुल के पास डायवर्सन निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 5 करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस डायवर्जन के निर्माण से आवागमन की समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है। एनएचएआई के कार्यपालक अभियंता तुलसी प्रसाद ने बताया कि डायवर्जन निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। छह जून से एक सप्ताह तक संवेदक टेंडर जमा करेंगे। 13 जून को निविदा खोली जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 20 जून से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। मौसम अनुकूल रहने पर लगभग दो माह के अंदर डायवर्सन तैयार कर लिया जाएगा। बाढ़ में भी सुरक्षित रहेगा डायवर्सन डायवर्सन निर्माण को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की तैयारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार नदी में जल निकासी बाधित न हो, इसके लिए बड़े आकार के ह्यूम पाइप लगाए जाएंगे और उनके ऊपर कंक्रीट की ढलाई की जाएगी। इस व्यवस्था से बारिश और बाढ़ के समय भी पानी का प्रवाह सुचारु बना रहेगा। इंजीनियरों का दावा है कि प्रस्तावित डायवर्सन बाढ़ की स्थिति में भी सुरक्षित रहेगा और इसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना काफी कम होगी। कई राज्यों को जोड़ने वाली सड़क है एनएच -139 एनएच-139 बिहार और झारखंड के बीच प्रमुख संपर्क मार्ग है। इस सड़क से प्रतिदिन बिहार और झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, दिल्ली तथा हरियाणा सहित कई राज्यों के यात्री एवं मालवाहक वाहन गुजरते हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण व्यापार, परिवहन और आम लोगों की आवाजाही पर व्यापक असर पड़ा है। इस रास्ते से होकर आवागमन करने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। जिला प्रशासन की ओर से बारुण से तेतरिया मोड़ और दंगवार जपला होते हुए छतरपुर जाने की अनुमति दी गई है। ऐसे में हरिहरगंज से औरंगाबाद जाने के लिए वाहन चालकों को अतिरिक्त दूरी तय कर पहले छतरपुर जाना पड़ रहा है। इसके बाद जपला दंगवार तेतरिया मोड़ और बारुण होते हुए होते हुए एनएच 19 पर पहुंचना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त दूरी तय करने के साथ-साथ अतिरिक्त खर्च का भी बोझ बढ़ रहा है। वहीं लंबी दूरी की बसें भी इसी रास्ते या अन्य वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजर रहे हैं। जबकि औरंगाबाद से हरिहरगंज या नबीनगर जाने वाली बसें दोमुहान के पास से ही दूसरी बसों को मेल दे रहे हैं। ऐसे में सवारी की परेशानी बढ़ जा रही है। औरंगाबाद जाने वाली सवारियों को बटाने पुल के दक्षिणी छोर पर ही छोड़ दिया जा रहा है। यहां से उन्हें पैदल पारकर दूसरी ओर बस में बैठना पड़ रहा है। जिसके कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन की तैयारी में संघर्ष समिति आम लोगों की समस्याओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने एनएच-139 संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति फोरलेन बनाने और दोमुहान पुल के समीप जल्द डायवर्सन निर्माण की मांग कर रही है। अपनी मांगों के समर्थन में 8 जून यानी कल सोमवार को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि डायवर्जन निर्माण शुरू होने से लंबे समय से चली आ रही परेशानी का समाधान मिलेगा। बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-139 पर स्थित दोमुहान बटाने नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात व्यवस्था प्रभावित है। पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाए जाने से यात्रियों और मालवाहक वाहनों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पुल के पास डायवर्सन निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 5 करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस डायवर्जन के निर्माण से आवागमन की समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है। एनएचएआई के कार्यपालक अभियंता तुलसी प्रसाद ने बताया कि डायवर्जन निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। छह जून से एक सप्ताह तक संवेदक टेंडर जमा करेंगे। 13 जून को निविदा खोली जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 20 जून से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। मौसम अनुकूल रहने पर लगभग दो माह के अंदर डायवर्सन तैयार कर लिया जाएगा। बाढ़ में भी सुरक्षित रहेगा डायवर्सन डायवर्सन निर्माण को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की तैयारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार नदी में जल निकासी बाधित न हो, इसके लिए बड़े आकार के ह्यूम पाइप लगाए जाएंगे और उनके ऊपर कंक्रीट की ढलाई की जाएगी। इस व्यवस्था से बारिश और बाढ़ के समय भी पानी का प्रवाह सुचारु बना रहेगा। इंजीनियरों का दावा है कि प्रस्तावित डायवर्सन बाढ़ की स्थिति में भी सुरक्षित रहेगा और इसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना काफी कम होगी। कई राज्यों को जोड़ने वाली सड़क है एनएच -139 एनएच-139 बिहार और झारखंड के बीच प्रमुख संपर्क मार्ग है। इस सड़क से प्रतिदिन बिहार और झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, दिल्ली तथा हरियाणा सहित कई राज्यों के यात्री एवं मालवाहक वाहन गुजरते हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण व्यापार, परिवहन और आम लोगों की आवाजाही पर व्यापक असर पड़ा है। इस रास्ते से होकर आवागमन करने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। जिला प्रशासन की ओर से बारुण से तेतरिया मोड़ और दंगवार जपला होते हुए छतरपुर जाने की अनुमति दी गई है। ऐसे में हरिहरगंज से औरंगाबाद जाने के लिए वाहन चालकों को अतिरिक्त दूरी तय कर पहले छतरपुर जाना पड़ रहा है। इसके बाद जपला दंगवार तेतरिया मोड़ और बारुण होते हुए होते हुए एनएच 19 पर पहुंचना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त दूरी तय करने के साथ-साथ अतिरिक्त खर्च का भी बोझ बढ़ रहा है। वहीं लंबी दूरी की बसें भी इसी रास्ते या अन्य वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजर रहे हैं। जबकि औरंगाबाद से हरिहरगंज या नबीनगर जाने वाली बसें दोमुहान के पास से ही दूसरी बसों को मेल दे रहे हैं। ऐसे में सवारी की परेशानी बढ़ जा रही है। औरंगाबाद जाने वाली सवारियों को बटाने पुल के दक्षिणी छोर पर ही छोड़ दिया जा रहा है। यहां से उन्हें पैदल पारकर दूसरी ओर बस में बैठना पड़ रहा है। जिसके कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन की तैयारी में संघर्ष समिति आम लोगों की समस्याओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने एनएच-139 संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति फोरलेन बनाने और दोमुहान पुल के समीप जल्द डायवर्सन निर्माण की मांग कर रही है। अपनी मांगों के समर्थन में 8 जून यानी कल सोमवार को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि डायवर्जन निर्माण शुरू होने से लंबे समय से चली आ रही परेशानी का समाधान मिलेगा।  

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