Disha Salian Case: दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब दिशा के पिता सतिश सालियान, उनके वकील निलेश ओझा और दो अन्य लोगों ने पुलिस सुरक्षा की मांग की है। वकील निलेश ओझा ने आरोप लगाया है कि उन्हें और मामले से जुड़े कुछ लोगों को धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), भारत के मुख्य न्यायाधीश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजा गया है।
चार लोगों के लिए सुरक्षा की मांग
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में निलेश ओझा ने कहा कि CBI की ओर से FIR दर्ज होने के बाद चार लोगों की सुरक्षा के लिए पत्र भेजा गया। इनमें दिशा सालियान के पिता सतिश सालियान, मामले में गवाह बताए जा रहे समीर वानखेड़े, खुद निलेश ओझा और आशुतोष पाठक शामिल हैं। ओझा ने दावा किया कि इन लोगों को सुरक्षा दिए जाने की जरूरत है।
वकील ने यह भी सवाल उठाया कि कुछ लोगों को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है, जबकि उनके अनुसार मामले को सामने लाने वाले लोगों को सुरक्षा नहीं मिली। उन्होंने शिवसेना (UBT) के नेताओं की ओर से कथित धमकियों का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है।
CBI जांच के बीच सामने आया मामला
दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। शुरुआती जांच में मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना था और उस समय किसी तरह की आपराधिक साजिश के सबूत नहीं पाए थे।
हालांकि दिशा के पिता सतिश सालियान ने बाद में मामले की नए सिरे से जांच की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। 2 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट ने CBI को दिशा की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद CBI ने 13 सितंबर को FIR दर्ज की।
FIR में कई नाम, लेकिन किसी को आरोपी घोषित नहीं किया गया
CBI की FIR में कई लोगों के नाम और उनके कथित रोल की जांच का उल्लेख है। इनमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती समेत कई अन्य लोगों के नाम बताए गए हैं। हालांकि रिपोर्टों के मुताबिक FIR में किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है। नामों का उल्लेख जांच के दायरे में होने के संदर्भ में है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी स्पष्ट रूप से CBI को दिशा की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच करने को कहा है। इसलिए FIR में किसी का नाम होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता।
पहले की जांच में क्या सामने आया था?
दिशा सालियान की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की जांच की थी। बाद में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित SIT ने भी मामले की पड़ताल की थी। इन शुरुआती जांचों में दिशा की मौत में किसी आपराधिक साजिश के सबूत नहीं पाए गए थे। अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI पुराने रिकॉर्ड, पुलिस जांच, गवाहों, फोरेंसिक सामग्री और अन्य पहलुओं की नए सिरे से जांच कर रही है।
ऐसे में पुलिस सुरक्षा की मांग और धमकी के आरोप इस मामले में सामने आया नया घटनाक्रम हैं। इन आरोपों पर आगे की कार्रवाई और CBI की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा को लेकर किए गए दावों के पीछे क्या तथ्य हैं।

