लंबे समय से प्रतीक्षित भारतीय जनता पार्टी के अंबेडकर नगर जिला अध्यक्ष की घोषणा हो चुकी है। जातीय समीकरण बैठाने के प्रयास में दिलीप पटेल को जिलाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है। इस नई घोषणा का प्रभाव पड़ोसी जिला अयोध्या में भी देखा जा रहा है।अंबेडकरनगर कभी अयोध्या (फैजाबाद) जिले का हिस्सा रहा है। इस घोषणा के साथ ही अंबेडकर नगर भाजपा में एक धड़ा पार्टी के आला कमान से मायूस है। जिलाध्यक्ष के दावेदारों में राणा रणधीर सिंह का नाम खासा चर्चा में था। और खींचतान में जिला अध्यक्ष का चयन नहीं हो पा रहा था। राणा के नाम को लेकर कई नेता अपनी हर कोशिश कर रहे थे।
जिला अध्यक्ष पद के लिए 55 नामांकनों की चर्चा करें तो उसमें सबसे प्रबल दावेदारों में त्रयंबक तिवारी, डा. मिथिलेश त्रिपाठी, श्याम बाबू गुप्ता, कपिल देव वर्मा, डा. रजनीश सिंह, राणा रणधीर सिंह, रामसूरत मौर्य, सुमन पाण्डेय सहित कई अन्य नाम प्रमुख है जो जिला अध्यक्ष बनने की दावेदारी पेश कर रहे थे। त्रयंबक तिवारी, कपिल देव वर्मा और डॉ.मिथिलेश त्रिपाठी तो जिलाध्यक्ष रह चुके हैं पार्टी ने जिला महामंत्री रहे पटेल का चयन किया तो इनको झटका लगना स्वाभाविक है, क्योंकि इनमें से तीन त्रयंबक तिवारी, कपिल देव वर्मा और डा.मिथिलेश त्रिपाठी तो जिला अध्यक्ष रह भी चुके हैं। नये जिलाध्यक्ष के समक्ष सबको साधने की चुनौती
अंबेडकर नगर में पार्टी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और नये जिलाध्यक्ष के समक्ष सबको साधने की चुनौती रहेगी। भाजपा के पास इस जिले में केवल एक ही सीट है और वह भी दूसरे दल से आये उम्मीदवार के जातीय समीकरण से हासिल हुई है। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में नये जिलाध्यक्ष को संगठन के साथ ही प्रदर्शन भी सुधारने का दबाव रहेगा।


