दिलीप कुमार ने बीमारी का किया नाटक, गुस्से में आकर सुभाष घई ने फिल्म ही कर दी थी बंद

दिलीप कुमार ने बीमारी का किया नाटक, गुस्से में आकर सुभाष घई ने फिल्म ही कर दी थी बंद

Dilip Kumar-Subhash Ghai Saudagar Movie: हिंदी सिनेमा में जब भी महान अभिनेताओं की बात होती है तो दिलीप कुमार का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। उन्होंने सिर्फ फिल्मों में अभिनय नहीं किया, बल्कि किरदारों को जीने की कला सिखाई। आज भी उनकी अदाकारी नए कलाकारों के लिए मिसाल मानी जाती है। उनके करियर से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं, लेकिन फिल्म सौदागर से जुड़ा एक किस्सा उनकी परफेक्शन की हद दिखाता है।

पिल्म ‘सौदागर’ की शूटिंग का किस्सा (Dilip Kumar-Subhash Ghai Saudagar Movie)

बताया जाता है कि सौदागर की शूटिंग हिमाचल प्रदेश के मनाली में चल रही थी। पूरी यूनिट तैयार रहती, कैमरे सेट रहते, लेकिन लगातार तीन दिन तक दिलीप कुमार शूटिंग पर नहीं पहुंचे। पहले दिन तबीयत खराब होने की खबर आई, दूसरे दिन घर की वजह बताई गई। तीसरे दिन भी जब वही हाल रहा, तो निर्देशक सुभाष घई का गुस्सा फूट पड़ा।

सुभाष घई ने कह दिया- फिल्म बंद करो (Dilip Kumar-Subhash Ghai Saudagar Movie)

कहा जाता है कि तीसरे दिन इंतजार खत्म होने पर सुभाष घई ने प्रोडक्शन टीम से साफ कह दिया कि शूटिंग समेटो और सबको मुंबई लौटने की तैयारी कराओ। उनके इस फैसले से सेट पर अफरा-तफरी मच गई। करोड़ों का सेट लगा था, कलाकार मौजूद थे और पूरी यूनिट तनाव में आ गई।

ऐसे समय में लेखक कमलेश पांडेय को आगे आना पड़ा। वह दिलीप कुमार से मिलने पहुंचे ताकि असली वजह पता चल सके कि आखिर वह सेट पर क्यों नहीं आ रहे।

होटल में बैठे थे शांत, मगर दिमाग में चल रही थी तैयारी

जब कमलेश पांडेय दिलीप कुमार से मिले तो वह बिल्कुल सामान्य नजर आए। ना कोई बीमारी, ना कोई परेशानी। इसके बाद जो वजह सामने आई, उसने सबको चौंका दिया।

दरअसल फिल्म में एक दृश्य था जिसमें उनका किरदार नदी किनारे नशे की हालत में संवाद बोलता है। दिलीप कुमार उसी सीन को लेकर परेशान थे। वह चाहते थे कि यह दृश्य बनावटी न लगे, बल्कि बिल्कुल वास्तविक दिखाई दे।

शराबी किरदार निभाना इतना आसान नहीं

दिलीप कुमार का मानना था कि नशे में अभिनय करना बेहद मुश्किल काम है। अगर अभिनेता थोड़ा कम करे तो अभिनय फीका लगता है, और अगर ज्यादा कर दे तो वह ओवरएक्टिंग बन जाती है। सही संतुलन पकड़ना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

उन्होंने समझाया कि युवा उम्र में शरीर पर नियंत्रण ज्यादा होता है, लेकिन बढ़ती उम्र में ऐसे दृश्य निभाना और कठिन हो जाता है। इसलिए वह जल्दबाजी में कैमरे के सामने नहीं जाना चाहते थे।

सीन के लिए मांगी थी खास तैयारी

बताया जाता है कि वो उस सीन को निभाने से पहले वास्तविक अनुभव और शरीर की भाषा समझना चाहते थे। यही कारण था कि उन्होंने शूटिंग टाल दी, ताकि जब कैमरे के सामने जाएं तो किरदार पूरी ईमानदारी से जीवित हो उठे।

उनकी यही सोच उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी। वह सिर्फ डायलॉग बोलने वाले अभिनेता नहीं थे, बल्कि हर भाव के पीछे गहराई खोजते थे।

इसलिए कहलाए अभिनय सम्राट

दिलीप कुमार ने अपने लंबे करियर में अनगिनत यादगार किरदार दिए। देवदास, मुगल-ए-आजम, राम और श्याम जैसी फिल्मों से उन्होंने इतिहास रचा। लेकिन सौदागर जैसा किस्सा बताता है कि उम्र चाहे जो हो, अभिनय के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। शायद यही वजह है कि उन्हें सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि अभिनय का विश्वविद्यालय कहा जाता है।

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