Gonda Digital Arrest Case: गोंडा जिले के मालवीय नगर में एक महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 21 लाख 30 हजार 600 रुपये की साइबर ठगी की गई। घटना 10 अक्टूबर की बताई जा रही है। ठगों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का भय दिखाया। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने NCRP पोर्टल की मदद से ठगी की पूरी रकम होल्ड करा दी है।
गोंडा जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। मालवीय नगर की रहने वाली एक महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 21 लाख 30 हजार 600 रुपये ठग लिए गए। ठगों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी थी। इसके बाद महिला से इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करा ली गई।
मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर दिखाया डर
जानकारी के अनुसार, यह मामला 10 अक्टूबर का है। ठगों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले का भय दिखाया। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उसे डराया गया। इसके बाद महिला से 21 लाख 30 हजार 600 रुपये की ठगी की गई।
घटना के बाद पीड़िता ने साइबर पुलिस से शिकायत की। लिखित शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 16/26 दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
NCRP पोर्टल से पूरी रकम होल्ड
इस मामले में राहत की बात यह है कि साइबर पुलिस ने NCRP पोर्टल की मदद से ठगी की पूरी रकम होल्ड करा दी है। यानी 21 लाख 30 हजार 600 रुपये की रकम को रोकने की कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार, कोर्ट का आदेश मिलने के बाद पीड़िता को उसकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए तीन से चार बैंक कार्यदिवस का समय बताया गया है। हालांकि, रकम वापस मिलने की प्रक्रिया न्यायालय के आदेश और संबंधित औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी।
आरोपियों तक पहुंचने के लिए दो टीमें गठित
मामले में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए साइबर पुलिस ने दो टीमें बनाई हैं। पहली टीम पैसों के लेनदेन की कड़ी खंगाल रही है। इसके जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन बैंक खातों में गई और इसका इस्तेमाल कहां किया गया। वहीं, दूसरी टीम चैट के माध्यम से मिले दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस इन दस्तावेजों से साक्ष्य जुटाकर आरोपियों की पहचान करने में लगी है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान
पुलिस मामले में साक्ष्य जुटाने और आरोपियों का पता लगाने में जुटी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डर दिखाना साइबर ठगी का एक तरीका है। ऐसे मामलों में किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए। पुलिस या जांच एजेंसी के नाम पर धमकी मिलने पर उसकी पुष्टि आधिकारिक माध्यम से करनी चाहिए। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

