अभिनेता रणवीर शौरी ने दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के सड़क प्रदर्शन का कड़ा विरोध किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट शेयर करते हुए रणवीर ने कहा कि लोगों को सड़कों पर उतरने के बजाय अदालत, संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने सड़कों को जाम करने और कानून-व्यवस्था में बाधा डालने को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद सामने आया है। ‘संसद और वोटों में दिखाएं अपनी संख्या’ रणवीर शौरी ने CJP प्रवक्ता सौरव दास का एक वीडियो रीपोस्ट करते हुए लिखा कि अपनी ताकत सड़कों पर दिखाने के बजाय संसद और चुनाव में वोटों के जरिए दिखाएं। अगर यह रास्ता सही नहीं लगता तो अदालतों का रुख करें, यही असली लोकतांत्रिक तरीका है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जा करना और आम जनता को परेशान करना किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। ‘विरोध प्रदर्शन केवल आखिरी रास्ता होना चाहिए’ रणवीर ने आगे लिखा कि किसी भी लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन सबसे आखिरी रास्ता होना चाहिए, न कि न्यायपालिका या विधायिका को दरकिनार करने का जरिया। उन्होंने कहा कि असहमति जताने के अधिकार के नाम पर रोजाना सड़कों पर हंगामा करना और आम लोगों की जिंदगी मुश्किल में डालना गलत है। उनके मुताबिक, उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किए बिना सीधे प्रदर्शन करना केवल अराजकता फैलाने या पब्लिसिटी पाने का तरीका है। कंगना बोलीं- देश को अस्थिर करने की साजिश अभिनेत्री कंगना रनोट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व को ‘देशद्रोही और आतंकी ताकतें’ करार दिया है। कंगना ने कहा कि देश को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है और अब आम लोग ही इन ताकतों को पकड़कर जवाब मांगेंगे। कंगना ने कहा कि पुलिस की बात तो अलग है, अब आम जनता खुद इन लोगों को पकड़ेगी और सवाल पूछेगी क्योंकि लोगों ने इन्हें पहचानना शुरू कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि देश की सुरक्षा के लिए एजेंसियां काम कर रही हैं, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि आम नागरिकों को किसी तरह की असुविधा न हो। CEC के इस्तीफे की मांग कर रही CJP CJP और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। इसी मुद्दे पर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होना था। हालांकि, शनिवार और रविवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोका। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। इन दो दिनों में CJP, विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
3 महीने पहले शिक्षा मंत्री का लिया था इस्तीफा CJP ने तीन महीने पहले भी एक बड़ा आंदोलन चलाया था, जिसके दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपना इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद से ही यह संगठन लगातार प्रशासनिक और चुनावी सुधारों से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
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