Dholpur: सीवरेज, जलभराव, जर्जर सडक़ें और सफाई व्यवस्था निकाय चुनाव में रहेंगे प्रमुख मुद्दे

Dholpur: सीवरेज, जलभराव, जर्जर सडक़ें और सफाई व्यवस्था निकाय चुनाव में रहेंगे प्रमुख मुद्दे

धौलपुर. आचार संहिता लागू होने के साथ ही धौलपुर समेत अन्य निकायों में प्रचार सामग्री को हटा दिया गया। हालांकि, कई जगह सुस्ती भी दिखी। धौलपुर नगर परिषद का चुनाव प्रथम चरण में 9 सितम्बर होगा। साथ ही राजाखेड़ा, मनियां व सैंपऊ पालिका के भी चुनाव होंगे। इसी के साथ नई शहरी सरकार को लेकर मतदाताओं की उम्मीदें भी जाग उठी हैं। हालांकि, अभी वार्डों में पार्टियां समेत अन्य निर्दलीय हवा का रुख भांप रहे हैं।

उधर, नगर परिषद के शुरुआती दिन ठीक-ठाक रहे लेकिन जैसे जैसे दिन निकलने लगे तो समस्याएं का ढेर लगने लगा है। और बीते तीन साल तो समस्याएं हर तरफ पानी की रफ्तार की तरह घरों तक पहुंच गई। शहर में सीवरेज के ढक्कन उफान मारते रहे और बारिश के दिनों में तो शहर की कई कॉलोनियां टापू बन गई। वहीं, जिन पर जिम्मेदारी थी वह नदारद दिखे। वहीं गत नगर परिषद बोर्ड के अंतिम बजट करीब 128 करोड़ रुपए का पारित हुआ। उक्त बैठक में एलईडी लाइटों की खरीद पर भी सवाल खड़े हुए। गत बोर्ड का कार्यकाल बीते साल नवम्बर में पूर्ण हो गया था। उसके बाद से आयुक्त और प्रशासक ने जिम्मा संभाल लिया। कार्यवाहक आयुक्तों के चलते पालिका की रेल पटरी से उतर गई। वहीं, परिषद के कार्मिकों के ट्रेप होने की घटना और फिर कुछ दिन पहले अधिशासी अभियंता गुमान सिंह के नोट गिनने का वीडियो वायरल होने की घटना ने परिषद की रही सही छबि को खासा धक्का पहुंचाया।

सीवरेज समस्या का नहीं हो पाया निराकरण

गत बोर्ड के कार्यकाल में चौक पड़ी सीवरेज और उफान मारते सीवरेज की समस्या से शहर में सैंपऊ रोड, बाड़ी रोड और ओडेला रोड समेत कई पॉश कॉलोनियों की भी दुर्गति होती रही। वर्तमान में भी यह समस्या बरकरार है। गत बोर्ड इस समस्या का निराकरण नहीं करवा सका और जनता गंदे पानी में होकर आती-जाती रही। अधिकारी बदल गए लेकिन समस्या जस की तस रही। गत वर्ष प्रशासन की ओर से कुछ प्रयास किए लेकिन वह भी नाकाफी साबित हुए। इसी तरह शहर में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी रही। दीपों के त्योहार पर भी लाइटें नहीं लग पाई थी। इसी तरह शहरों की जर्जर सडक़ों ने रही सही कसर पूरी कर दी। वर्तमान में भी कुछ खास सडक़ें पर काम हो पाया है जबकि गौरव पथ अभी तक अधूरा पड़ा है। जहां आबादी तक नहीं बस पाई, वहां सीसी सडक़ें बन गई और दिन में भी लाइटें जल रही हैं।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का दिखा विरोध

उधर, परिषद के तत्कालीन आयुक्त अशोक शर्मा के कार्यकाल के दौरान शहर में अतिक्रमण हटाने की कुछ कार्रवाई भी चर्चाओं का विषय रही। अतिक्रमण दस्ते के अचानक पहुंचने और फिर कागजातों की जांच नहीं करने समेत कई मुद्दे मौके पर छाए रहे। इसी तरह नाला सफाई कार्य के टेंडर से लेकर कार्य होने तक प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में रही।

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