राजीव कुमार झा| समस्तीपुर पैसेंजर ट्रेनों और डेमू, मेमू में नियमित रेल यात्रा करनेवाले यात्रियों की परेशानी अब किसी तकनीकी समस्या का परिणाम नहीं, बल्कि व्यवस्था की आदत बनती जा रही है। दरभंगा, सहरसा, बरौनी और मुजफ्फरपुर से आने-जाने वाली डेमू व मेमू ट्रेनों के यात्रियों को रोजाना आउटर पर खड़ा रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। रेल प्रशासन का तर्क है कि प्लेटफॉर्म व्यस्त रहते हैं।स्थिति यह है कि दरभंगा से आने वाली ट्रेन को मुक्तापुर के पास, सहरसा की ओर से आने वाली ट्रेन को जितवारपुर गुमटी संख्या 41-सी के आसपास, बरौनी से आने वाली ट्रेन को अटेरन चौक गुमटी पर तथा मुजफ्फरपुर की ओर आनेवाली वाली ट्रेनों को एलआईसी कार्यालय के निकट रोक दिया जाता है। कई बार ट्रेनें 20 मिनट से लेकर एक घंटे तक आउटर पर खड़ी रहती हैं। सवाल सुरक्षा का भी रहता है, यात्रियों के साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है। भास्कर की पड़ताल में यात्रियों ने कहा कि अब तो उन्हें स्टेशन से पहले ही यह अंदाजा हो जाता है कि ट्रेन कहां रोकी जाएगी। रेल प्रशासन की ओर से अक्सर कहा जाता है कि प्लेटफॉर्म व्यस्त रहने के कारण ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है। लेकिन सवाल यह है कि प्लेटफॉर्म संख्या-1 के दूसरी ओर स्थित लाइन संख्या-15 और पुरानी मालगोदाम क्षेत्र में बने जर्जर प्लेटफॉर्म को विकसित करके उसका उपयोग डेडिकेटेड प्लेटफार्म के रूप में किया तो जा सकता है। जर्जर मालगोदाम प्लेटफॉर्म बन गया है उपेक्षा का प्रतीक समस्तीपुर जंक्शन के पुराने मालगोदाम क्षेत्र में वर्षों पहले निर्मित प्लेटफॉर्म आज भी मौजूद है, लेकिन उपेक्षा के कारण उसकी स्थिति बदहाल हो चुकी है। टूटी संरचनाएं और जर्जर व्यवस्था रेलवे की विकास योजनाओं पर सवाल खड़े करती हैं। जिस स्थान को थोड़े संसाधनों से उपयोगी बनाया जा सकता है, उसे वर्षों से अनुपयोगी छोड़ दिया गया है। यदि यही प्लेटफॉर्म स्थानीय ट्रेनों के लिए आरक्षित कर दिया जाए तो आउटर पर पूरी तरह से समाप्त हो सकता है। ^ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और यार्ड रिमॉडलिंग के बाद सभी समस्याएं दूर हो जाएगी।कई ट्रेनों में डबल इंजनों की व्यवस्था की जा चुकी है जिससे लाईन कंजेशन भी घटा है और ट्रेनों को रिवर्स करने में समय नहीं लग रहा है, ट्रेन समय पर चल रही है। डेमू और मेमू के लिए डेडिकेट प्लेटफार्म के लिए मालगोदाम और 15 नंबर लाइन एरिया के निरीक्षण को टीम गठित कर दी गई है। रिपोर्ट मिलते ही उसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। -ज्योति प्रकाश मिश्रा, डीआरएम, समस्तीपुर प्रतिदिन 21 डेमू,मेमू होती है परिचालित {दरभंगा की ओर 6 पैसेंजर {मुजफ्फरपुर की ओर 5 पैसेंजर {सहरसा की ओर 6 पैसेंजर {बरौनी की ओर- 4 पैसेंजर राजीव कुमार झा| समस्तीपुर पैसेंजर ट्रेनों और डेमू, मेमू में नियमित रेल यात्रा करनेवाले यात्रियों की परेशानी अब किसी तकनीकी समस्या का परिणाम नहीं, बल्कि व्यवस्था की आदत बनती जा रही है। दरभंगा, सहरसा, बरौनी और मुजफ्फरपुर से आने-जाने वाली डेमू व मेमू ट्रेनों के यात्रियों को रोजाना आउटर पर खड़ा रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। रेल प्रशासन का तर्क है कि प्लेटफॉर्म व्यस्त रहते हैं।स्थिति यह है कि दरभंगा से आने वाली ट्रेन को मुक्तापुर के पास, सहरसा की ओर से आने वाली ट्रेन को जितवारपुर गुमटी संख्या 41-सी के आसपास, बरौनी से आने वाली ट्रेन को अटेरन चौक गुमटी पर तथा मुजफ्फरपुर की ओर आनेवाली वाली ट्रेनों को एलआईसी कार्यालय के निकट रोक दिया जाता है। कई बार ट्रेनें 20 मिनट से लेकर एक घंटे तक आउटर पर खड़ी रहती हैं। सवाल सुरक्षा का भी रहता है, यात्रियों के साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है। भास्कर की पड़ताल में यात्रियों ने कहा कि अब तो उन्हें स्टेशन से पहले ही यह अंदाजा हो जाता है कि ट्रेन कहां रोकी जाएगी। रेल प्रशासन की ओर से अक्सर कहा जाता है कि प्लेटफॉर्म व्यस्त रहने के कारण ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है। लेकिन सवाल यह है कि प्लेटफॉर्म संख्या-1 के दूसरी ओर स्थित लाइन संख्या-15 और पुरानी मालगोदाम क्षेत्र में बने जर्जर प्लेटफॉर्म को विकसित करके उसका उपयोग डेडिकेटेड प्लेटफार्म के रूप में किया तो जा सकता है। जर्जर मालगोदाम प्लेटफॉर्म बन गया है उपेक्षा का प्रतीक समस्तीपुर जंक्शन के पुराने मालगोदाम क्षेत्र में वर्षों पहले निर्मित प्लेटफॉर्म आज भी मौजूद है, लेकिन उपेक्षा के कारण उसकी स्थिति बदहाल हो चुकी है। टूटी संरचनाएं और जर्जर व्यवस्था रेलवे की विकास योजनाओं पर सवाल खड़े करती हैं। जिस स्थान को थोड़े संसाधनों से उपयोगी बनाया जा सकता है, उसे वर्षों से अनुपयोगी छोड़ दिया गया है। यदि यही प्लेटफॉर्म स्थानीय ट्रेनों के लिए आरक्षित कर दिया जाए तो आउटर पर पूरी तरह से समाप्त हो सकता है। ^ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और यार्ड रिमॉडलिंग के बाद सभी समस्याएं दूर हो जाएगी।कई ट्रेनों में डबल इंजनों की व्यवस्था की जा चुकी है जिससे लाईन कंजेशन भी घटा है और ट्रेनों को रिवर्स करने में समय नहीं लग रहा है, ट्रेन समय पर चल रही है। डेमू और मेमू के लिए डेडिकेट प्लेटफार्म के लिए मालगोदाम और 15 नंबर लाइन एरिया के निरीक्षण को टीम गठित कर दी गई है। रिपोर्ट मिलते ही उसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। -ज्योति प्रकाश मिश्रा, डीआरएम, समस्तीपुर प्रतिदिन 21 डेमू,मेमू होती है परिचालित {दरभंगा की ओर 6 पैसेंजर {मुजफ्फरपुर की ओर 5 पैसेंजर {सहरसा की ओर 6 पैसेंजर {बरौनी की ओर- 4 पैसेंजर


