भोजशाला में संस्कृत विश्वविद्यालय और सरस्वती लोक बनाने की मांग:धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर बने; हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने मुख्यमंत्री से की बड़ी मांगें

भोजशाला में संस्कृत विश्वविद्यालय और सरस्वती लोक बनाने की मांग:धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर बने; हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने मुख्यमंत्री से की बड़ी मांगें

धार स्थित भोजशाला मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर हाई कोर्ट के आदेश के बाद विभिन्न मांगों को पूरा करने का निवेदन किया है। संगठन ने भोजशाला को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में न्यायालय द्वारा भोजशाला को मां सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि अब वहां वर्षभर पूजा शुरू हो चुकी है और शुक्रवार को नमाज भी नहीं हुई, जिसे हिंदू पक्ष बड़ी उपलब्धि मान रहा है। उन्होंने बताया कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में वरिष्ठ एडवोकेट हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और अविनय जोशी के माध्यम से भोजशाला मामले में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसी प्रकरण में 15 मई 2026 को हाई कोर्ट ने विस्तृत आदेश पारित किया। संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ब्रिटिश संग्रहालय, लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास तेज किए जाएं और उसे पुनः भोजशाला में स्थापित किया जाए। पत्र में भोजशाला परिसर में ‘मां सरस्वती लोक’ विकसित करने की मांग भी की गई है, ताकि इसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर बनाने की मांग हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मांडू, धार, अमझेरा और इंदौर को जोड़ते हुए एक धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा है। संगठन का कहना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी। संगठन ने भोजशाला परिसर में वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय की शीघ्र स्थापना की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इससे भारतीय संस्कृति, वेद और संस्कृत अध्ययन को नया केंद्र मिलेगा। दर्शन व्यवस्था को लेकर भी उठाई मांग हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने यह भी मांग की है कि हाई कोर्ट के आदेश के पालन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ समन्वय बनाकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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