समस्तीपुर में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार है। गर्म हवा के चलते दोपहर के समय लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है है। जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप तेज होता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। आधुनिकता के इस दौर में लोग जहां ठंडा पानी पीने के लिए फ्रिज और वाटर कूलर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद देसी फ्रिज यानी मिट्टी के बर्तन की मांग बाजारों में इन दिनों खूब है। सुविधा के लिए इसमें नल भी लगा है। पानी निकालने के लिए सुराही के अंदर बर्तन डालने की जरूरत नहीं है। इस देसी फ्रिज से जहां बिजली की बचत होगी, वहीं पानी पीने से सर्दी-खांसी की शिकायत भी नहीं रहेगी। 20 लीटर में भी उपलब्ध है सुराही और घड़ा पेठिया गाछी के दुकानदार रामनरेश पंडित कहते हैं कि मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पुश्तैनी धंधा है। मेहनत करके इसे बनाते हैं। मौजूदा समय में 5, 10 और 20 लीटर पानी की क्षमता वाला घड़ा और सुराही की मांग खूब हो रही है। इसकी कीमत भी 150-400 रुपए तक है। एक सुराही बनाने में चार से पांच घंटे का समय लगता है। एक दिन में चार से पांच बर्तन बनाते हैं। बिक्री बढ़ने से राहत दुकानदार मनीष कुमार ने बतायाकि गर्मी बढ़ने के साथ ही घड़ा और सुराही की मांग बढ़ गई है। लोगों की सुविधा के लिए इसमें नल भी लगा दिया गया है। मांग के हिसाब से अपूर्ति नहीं हो पा रही है। अभी कारोबार अच्छा चल रहा है। जिससे हमलोगों को भी राहत मिली है। स्वास्थ्य के लिए लाभदायक डॉक्टर सोमेंदु मुखुर्जी बताते हैं कि सुराही और घड़े का पानी नुकसानदेह नहीं है। इसका तापमान मौसम के अनुकूल रहता है। जबकि फ्रिज और वाटर कूलर का तापमान 2-3 डिग्री तक रहता है। जिसका पानी पीने से टांसिल बढ़ जाता है। सर्दी-खांसी की समस्या हो जाती है। मिट्टी से बने बर्तन में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। जिस कारण तापमान समान्य रहता है। जिसके सेवन से शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता है। इसे ठंडा करने के लिए बिजली की जरूरत भी नहीं पड़ती। लोगों डबल फायदा मिलता है। समस्तीपुर में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार है। गर्म हवा के चलते दोपहर के समय लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है है। जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप तेज होता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। आधुनिकता के इस दौर में लोग जहां ठंडा पानी पीने के लिए फ्रिज और वाटर कूलर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद देसी फ्रिज यानी मिट्टी के बर्तन की मांग बाजारों में इन दिनों खूब है। सुविधा के लिए इसमें नल भी लगा है। पानी निकालने के लिए सुराही के अंदर बर्तन डालने की जरूरत नहीं है। इस देसी फ्रिज से जहां बिजली की बचत होगी, वहीं पानी पीने से सर्दी-खांसी की शिकायत भी नहीं रहेगी। 20 लीटर में भी उपलब्ध है सुराही और घड़ा पेठिया गाछी के दुकानदार रामनरेश पंडित कहते हैं कि मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पुश्तैनी धंधा है। मेहनत करके इसे बनाते हैं। मौजूदा समय में 5, 10 और 20 लीटर पानी की क्षमता वाला घड़ा और सुराही की मांग खूब हो रही है। इसकी कीमत भी 150-400 रुपए तक है। एक सुराही बनाने में चार से पांच घंटे का समय लगता है। एक दिन में चार से पांच बर्तन बनाते हैं। बिक्री बढ़ने से राहत दुकानदार मनीष कुमार ने बतायाकि गर्मी बढ़ने के साथ ही घड़ा और सुराही की मांग बढ़ गई है। लोगों की सुविधा के लिए इसमें नल भी लगा दिया गया है। मांग के हिसाब से अपूर्ति नहीं हो पा रही है। अभी कारोबार अच्छा चल रहा है। जिससे हमलोगों को भी राहत मिली है। स्वास्थ्य के लिए लाभदायक डॉक्टर सोमेंदु मुखुर्जी बताते हैं कि सुराही और घड़े का पानी नुकसानदेह नहीं है। इसका तापमान मौसम के अनुकूल रहता है। जबकि फ्रिज और वाटर कूलर का तापमान 2-3 डिग्री तक रहता है। जिसका पानी पीने से टांसिल बढ़ जाता है। सर्दी-खांसी की समस्या हो जाती है। मिट्टी से बने बर्तन में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। जिस कारण तापमान समान्य रहता है। जिसके सेवन से शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता है। इसे ठंडा करने के लिए बिजली की जरूरत भी नहीं पड़ती। लोगों डबल फायदा मिलता है।


